अमृतसर पुलिस ने सीमा पार हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया, 7 पिस्तौल सहित 2 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अमृतसर पुलिस ने 1 जुलाई 2026 को सीमा पार से अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक सक्रिय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से 7 आधुनिक पिस्तौल और 40 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस कार्रवाई की जानकारी साझा की।
मुख्य घटनाक्रम
डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से विदेश में बैठे तस्करों के सीधे संपर्क में थे। वे सीमा पार के रास्तों से अवैध हथियारों की खेप मंगवाकर स्थानीय आपराधिक तत्वों को सप्लाई कर रहे थे। इस मामले में सुल्तानविंड पुलिस स्टेशन, अमृतसर में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली गई है।
जांच की स्थिति
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस अवैध हथियार आपूर्ति श्रृंखला में शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान करने और नेटवर्क की संपूर्ण कड़ियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में सीमा पार हथियार तस्करी के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
बठिंडा में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले सोमवार को पंजाब की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने बठिंडा में सरहिंद नहर लिंक रोड के पास हुई मुठभेड़ के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एक ग्लॉक 9 एमएम पिस्तौल, एक .30 बोर पिस्तौल, पाँच जिंदा कारतूस और दो खाली खोखे बरामद किए गए थे। ऑपरेशन के दौरान एक आरोपी घायल भी हुआ था।
डीजीपी के अनुसार, बठिंडा में गिरफ्तार चारों आरोपियों का आपराधिक इतिहास रहा है और वे पुलिस स्टेशन भगता भाईका, बठिंडा में दर्ज एक हालिया आपराधिक मामले में वांछित थे। इस मामले में पुलिस स्टेशन कैंट, बठिंडा में एफआईआर दर्ज की गई है।
पंजाब पुलिस की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति
डीजीपी गौरव यादव ने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस अवैध हथियारों की तस्करी, संगठित अपराध और सीमा पार के आपराधिक नेटवर्क के विरुद्ध 'जीरो-टॉलरेंस' नीति पर दृढ़ता से कायम है। पुलिस का लक्ष्य न केवल तत्काल गिरफ्तारियाँ करना है, बल्कि इन नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचकर उन्हें पूरी तरह नष्ट करना है।
आगे क्या होगा
अमृतसर और बठिंडा — दोनों मामलों में जांच एजेंसियाँ आरोपियों के विदेशी संपर्कों और घरेलू आपूर्ति नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए हथियार तस्करी का यह तरीका सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।