शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे का मुकेश साहनी पर प्रहार: 'लोकतंत्र में हिंसा की भाषा अस्वीकार्य'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 25 सितंबर 2026 को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मुकेश साहनी की विवादास्पद टिप्पणी की कड़ी निंदा की। दुबे ने स्पष्ट कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेदों का समाधान केवल संवैधानिक और कानूनी मार्ग से होना चाहिए — गोली चलाने या हिंसा की बातें किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं।
साहनी की टिप्पणी पर दुबे की तीखी प्रतिक्रिया
दुबे ने कहा कि मुकेश साहनी की ओर से हिंसा और गोली चलाने जैसी बातें करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'लोकतंत्र में लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए।' उनके अनुसार, यदि ज्ञानेश कुमार से जुड़ी कोई भी गलती है, तो उसका उत्तर कानून और संविधान के दायरे में दिया जाना चाहिए। दुबे ने यह भी रेखांकित किया कि जनता ही किसी को सत्ता में लाती है और उसे बाहर भी कर सकती है — यह लोकतंत्र की असली ताकत है।
उन्होंने ऐसे बयानों पर कार्रवाई की माँग की और कहा कि छोटी राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करने के लिए भावनाओं में बहकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर पर भारतीय पक्ष का समर्थन
भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताए जाने पर दुबे ने उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। दुबे ने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर कथित कब्जे का आरोप लगाते हुए कहा कि वह क्षेत्र वापस किया जाना चाहिए, और इसे शांतिपूर्ण तरीके से लौटाना बेहतर होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि आवश्यक हुआ तो भविष्य में भारत सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए दुबे ने कहा कि वहाँ के लोग भोजन और रोज़मर्रा की ज़रूरतों से जूझ रहे हैं, और इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से पीओके में अत्याचारों का आरोप लगाया जाता है।
ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल पर उत्साह
दुबे ने ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल को लेकर प्रसन्नता जताई। उनके अनुसार, भारत, रूस, ईरान समेत कई देशों की भागीदारी वाला यह आयोजन रंगमंच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने भारत-रूस के पुराने सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संबंधों का उल्लेख किया और कहा कि ईरान के साथ भी अच्छे संबंध हैं। दुबे ने उम्मीद जताई कि भारत की अगुवाई में होने वाला यह फेस्टिवल कलाकारों को नए अवसर देगा।
आईआईटी बॉम्बे छात्र मृत्यु प्रकरण पर संयमित रुख
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के मामले पर दुबे ने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है और परिवार के प्रति सभी की संवेदनाएँ हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मामले में जल्दबाज़ी में राजनीति न की जाए और पुलिस जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार किया जाए। उनके अनुसार, कुछ लोग इसे जातिसूचक टिप्पणियों से जोड़ रहे हैं जबकि अन्य दावे भी सामने आ रहे हैं — वास्तविक स्थिति जाँच के बाद ही स्पष्ट होगी।
दुबे ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने, काउंसलिंग की व्यवस्था और शिक्षक, छात्र व समाज के बीच संवाद की ज़रूरत पर बल दिया।
चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष की आलोचना और ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाए जाने पर दुबे ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की सामूहिक प्रक्रिया का विषय है। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि ज्ञानेश कुमार और उनके दो सहयोगियों के बीच पिछले दस महीनों में कई बार मतभेद सामने आए हैं। दुबे ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट गलत है तो चुनाव आयोग को इसका खंडन करना चाहिए, और यदि इसमें सच्चाई है तो कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, और दुबे का बयान शिवसेना (यूबीटी) की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा लगता है जिसमें संस्थागत जवाबदेही को मुद्दा बनाया जा रहा है।