10 अगस्त 2026
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ऑपरेशन लोटस और ऑपरेशन टाइगर से दूरी: शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे का बड़ा बयान

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ऑपरेशन लोटस और ऑपरेशन टाइगर से दूरी: शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे का बड़ा बयान

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला — ऑपरेशन लोटस और टाइगर से दूरी, राम मंदिर दानपात्र में कथित लूट पर देशद्रोह की माँग, और पार्टी छोड़ने वाले छह सांसदों पर तीखी टिप्पणी। यह बयान शिवसेना (यूबीटी) की बढ़ती आंतरिक उथल-पुथल के बीच आया है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 जून 2026 को मुंबई में कहा कि पार्टी का ऑपरेशन लोटस और ऑपरेशन टाइगर से कोई संबंध नहीं।
2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने 9 सांसद जीते, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना केवल 7 जीत पाई।
16 जून को पार्टी के 6 सांसद नॉट रिचेबल होने की खबर के बाद से आंतरिक उठापटक जारी है।
राम मंदिर दानपात्र में कथित घपलेबाजी पर दुबे ने देशद्रोह के तहत कार्रवाई की माँग की; नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय की चुप्पी पर सवाल उठाए।
दुबे ने कहा कि शिवसेना का जन्म 19 जून 1986 को हुआ और असली शिवसेना उद्धव ठाकरे के साथ है; शिंदे गुट को 'पार्टी नहीं, गुट' बताया।
समाजवादी पार्टी को भी सावधान रहने की सलाह दी, यह कहते हुए कि विघटनकारी ताकतों की नजर उस पर भी है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 जून 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में अपनी पार्टी की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का ऑपरेशन लोटस और ऑपरेशन टाइगर — दोनों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य आम जनता के हितों के लिए काम करना है और वह इसी राह पर आगे बढ़ती रहेगी।

2022 की टूट और 2024 के चुनावी नतीजे

दुबे ने 2022 में पार्टी में हुई टूट को 'साजिशन की गई' करार दिया। उन्होंने कहा कि इतनी विकट परिस्थितियों के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 9 सांसद जीते, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना केवल 7 सांसद ही जीत पाई। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस भी जानते हैं कि जनता इस तरह की राजनीति को पसंद नहीं करती, फिर भी वे जोर-आजमाइश के बल पर आगे बढ़ रहे हैं।

राम मंदिर दानपात्र विवाद पर कड़ा प्रहार

दुबे ने राम मंदिर के दानपात्र में कथित घपलेबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, महाकुंभ से लेकर अब तक श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई भगवान राम को अर्पित की — इस विश्वास के साथ कि यह राशि अस्पतालों, स्कूलों और जरूरतमंदों की मदद में लगेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस धन की 'बंदरबाट' हो रही है और नृपेंद्र मिश्रा तथा चंपत राय खामोश हैं।

दुबे ने कहा कि कथित चोरी से जुड़े व्यक्ति भी सरकार से संबद्ध हैं और जाँच के लिए गठित एसआईटी के सदस्य भी सरकार से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष जाँच और न्याय की उम्मीद कैसे की जाए। उनका कहना था, 'यह मामला देशद्रोह की श्रेणी में आता है और इसी के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, तभी राम भक्तों को न्याय मिलेगा।'

पार्टी में उठापटक और छह सांसदों का 'नॉट रिचेबल' होना

शिवसेना (यूबीटी) में हाल की आंतरिक उठापटक पर दुबे ने कहा कि 16 जून को जब खबर आई कि पार्टी के छह सांसद नॉट रिचेबल हैं, तभी यह आभास हो गया था कि वे पार्टी में नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन सांसदों को पार्टी ने टिकट, साधन और संसाधन दिए, शिंदे खेमे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा — और आज वही लोग जा रहे हैं। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा, 'जाने वाले को कोई नहीं रोक सकता, लेकिन कम से कम यह तो बताएँ कि क्यों जा रहे हैं।'

दुबे ने आगे कहा कि जो लोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाएँगे, वे BJP जैसा आचरण करेंगे — यह 'संगत का असर' है। उनका मानना है कि तोड़फोड़ की राजनीति अधिक समय तक टिक नहीं सकती और इसका अंत अवश्यंभावी है।

उद्धव ठाकरे और शिवसेना की असली पहचान

उद्धव ठाकरे के हालिया बयान का समर्थन करते हुए दुबे ने कहा कि शिवसेना का जन्म 19 जून 1986 को हुआ था और असली शिवसेना आज भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में है, क्योंकि शिवसैनिक उन्हें ही अपना नेता मानते हैं। उन्होंने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 'गुट' करार दिया और समाजवादी पार्टी को भी सावधान रहने की सलाह दी, यह कहते हुए कि 'इन लोगों की वक्रदृष्टि अब समाजवादी पार्टी की ओर है।'

आनंद दुबे के इस बयान से स्पष्ट है कि शिवसेना (यूबीटी) आंतरिक चुनौतियों के बीच भी अपनी वैचारिक जमीन पर खड़ी रहने का दावा कर रही है — और आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति व आंतरिक एकजुटता की असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक पार्टी इस मुद्दे पर संसद या न्यायालय में ठोस कदम नहीं उठाती। 2022 की टूट के बाद 2024 में 9 सांसदों की जीत पार्टी की जमीनी ताकत दिखाती है, लेकिन अब जो सांसद जा रहे हैं, वे उसी चुनावी ढाँचे का हिस्सा थे — यह विरोधाभास पार्टी नेतृत्व के लिए असली चुनौती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद दुबे ने ऑपरेशन लोटस और ऑपरेशन टाइगर पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 जून 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का ऑपरेशन लोटस और ऑपरेशन टाइगर — दोनों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी का एकमात्र लक्ष्य जनहित में काम करना है।
राम मंदिर दानपात्र विवाद में शिवसेना (यूबीटी) की क्या माँग है?
आनंद दुबे ने कहा कि राम मंदिर के दानपात्र में कथित घपलेबाजी देशद्रोह की श्रेणी में आती है और इसी के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय की चुप्पी पर सवाल उठाए और एसआईटी की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया।
शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद 'नॉट रिचेबल' क्यों हो गए?
दुबे के अनुसार, 16 जून को यह खबर आई कि पार्टी के छह सांसद नॉट रिचेबल हैं, जिससे यह आभास हो गया कि वे पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने इन सांसदों को पार्टी द्वारा दिए गए समर्थन और संसाधनों का हवाला देते हुए इसे 'विश्वासघात' करार दिया।
2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) का प्रदर्शन कैसा रहा?
दुबे के अनुसार, 2022 में पार्टी टूटने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 9 सांसद जीते, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना केवल 7 सीटें जीत पाई। दुबे ने इसे पार्टी की जनाधार में मजबूती का प्रमाण बताया।
असली शिवसेना कौन सी है — उद्धव ठाकरे की या एकनाथ शिंदे की?
आनंद दुबे ने कहा कि शिवसेना का जन्म 19 जून 1986 को हुआ और असली शिवसेना उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में है, क्योंकि शिवसैनिक उन्हें ही अपना नेता मानते हैं। उन्होंने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को पार्टी नहीं, बल्कि एक 'गुट' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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