ऑपरेशन लोटस का अगला निशाना सपा-कांग्रेस होगी : शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे का बड़ा दावा

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ऑपरेशन लोटस का अगला निशाना सपा-कांग्रेस होगी : शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे का बड़ा दावा

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने राघव चड्ढा के भाजपा में जाने पर कहा — यही ऑपरेशन लोटस कल सपा और कांग्रेस में होगा। केजरीवाल पर नेतृत्व विफलता का आरोप, मराठी भाषा नीति पर भी बड़ा बयान।

Key Takeaways

  • राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के कई सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं।
  • शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने चेतावनी दी कि अगला निशाना समाजवादी पार्टी और कांग्रेस होंगी।
  • 2022 में शिवसेना और 2023 में NCP के विभाजन का हवाला देते हुए दुबे ने इसे ऑपरेशन लोटस का हिस्सा बताया।
  • आनंद दुबे ने केजरीवाल पर स्वाति मालिवाल और राघव चड्ढा विवाद को लेकर नेतृत्व विफलता का आरोप लगाया।
  • मराठी भाषा नीति पर दुबे ने मांग की कि मुंबई में फ्लैट खरीदारों के लिए भी मराठी परीक्षा अनिवार्य हो।
  • पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 4 मई को आएंगे, तब ही ऐतिहासिक वोटर टर्नआउट का सही अर्थ स्पष्ट होगा।

मुंबई, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित आम आदमी पार्टी (आप) के कई सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है। इस घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने शुक्रवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ऑपरेशन लोटस का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा — कल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी इसी राह पर होंगी।

राघव चड्ढा पर शायराना तंज

आनंद दुबे ने शायराना अंदाज में कहा, "जिन्होंने भाजपा के लिए बना दिया नया अड्डा और 'आप' के लिए खोद दिया गड्ढा, उनका नाम है राघव चड्ढा।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब 10 में से 7 राज्यसभा सांसद 'आप' छोड़कर भाजपा में चले गए, तो पार्टी के पास बचा क्या? उनके अनुसार, जो पार्टी आम आदमी के नाम पर बनी थी, उसके प्रतिनिधि ही 'खास आदमी' बन गए।

दुबे ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में सवाल भाजपा से बनता है, न कि विपक्ष से। उनका आरोप है कि भाजपा देश में ऐसा राजनीतिक माहौल तैयार कर रही है जिसमें विपक्ष की कोई जगह न बचे।

ऑपरेशन लोटस का पैटर्न और शिवसेना का अनुभव

आनंद दुबे ने 2022 में शिवसेना के विभाजन की याद दिलाते हुए कहा कि जो आज आम आदमी पार्टी के साथ हो रहा है, वही कभी उनकी पार्टी के साथ हुआ था। उन्होंने कहा, "कैसे एक शिवसेना को तोड़कर दो शिवसेना बनाई गई, कैसे सांसद और विधायक रातोंरात पाला बदल गए — वही खेल अब 'आप' में दोहराया जा रहा है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य विपक्ष-मुक्त भारत बनाना है और इसके लिए वह एक-एक विपक्षी दल को अंदर से खोखला करने की रणनीति पर काम कर रही है। उनके अनुसार, यह क्रम समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तक भी जल्द पहुंचेगा।

गौरतलब है कि 2022 में महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना टूट गई थी। इसी तरह 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी दो धड़ों में बंट गई थी। यह पैटर्न बताता है कि विपक्षी दलों को अंदर से तोड़ने की रणनीति कोई नई नहीं है।

केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल

आनंद दुबे ने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केजरीवाल अपनी पार्टी को संभालने में नाकाम रहे हैं। पहले स्वाति मालिवाल से विवाद हुआ और अब राघव चड्ढा जैसे करीबी नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। उनके अनुसार, अगर केजरीवाल अपने मूल सिद्धांतों पर टिके रहते, तो आज यह स्थिति नहीं आती।

मराठी भाषा नीति पर दुबे का रुख

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के रिक्शा-ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फरमान पर आनंद दुबे ने कहा कि यह नियम केवल रिक्शा चालकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मुंबई में फ्लैट खरीदने वालों के लिए भी मराठी जानना अनिवार्य हो और इसके लिए एक छोटी परीक्षा ली जाए। उनके अनुसार, बॉलीवुड कलाकारों और बड़े उद्योगपतियों को भी मराठी सीखनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान पर टिप्पणी

पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक वोटर टर्नआउट पर दुबे ने कहा कि अधिक मतदान हमेशा सरकार बदलने का संकेत नहीं होता — कभी-कभी यह मौजूदा सरकार को बचाने की कोशिश भी हो सकती है। उन्होंने इसे एसआईआर (SIR) का खेल बताया और कहा कि 4 मई को परिणाम आने के बाद ही जनता का असली रुख स्पष्ट होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आप में हुई यह टूट 2026 के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी खेमे के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंडिया गठबंधन इस संकट से कैसे उबरता है और क्या विपक्षी एकजुटता बनाए रखी जा सकती है।

Point of View

2023 में NCP और अब 2025 में 'आप' — यह पैटर्न स्पष्ट संकेत देता है कि सत्ता की केंद्रीकरण की प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है। विडंबना यह है कि केजरीवाल, जो खुद भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से उभरे थे, आज अपनी पार्टी के भीतर ही विश्वसनीयता की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर इंडिया गठबंधन ने इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया, तो 2026 के चुनावों से पहले विपक्षी एकता की तस्वीर और भी धुंधली हो सकती है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा समेत कई सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। इसे विपक्षी खेमे में ऑपरेशन लोटस की एक और कड़ी माना जा रहा है।
आनंद दुबे ने भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष-मुक्त भारत बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। उनके अनुसार, जो आज 'आप' में हुआ, वही कल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में होगा।
ऑपरेशन लोटस क्या है?
ऑपरेशन लोटस एक राजनीतिक रणनीति को कहा जाता है जिसमें विपक्षी दलों के विधायकों और सांसदों को तोड़कर सत्तारूढ़ दल में शामिल कराया जाता है। 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना और 2023 में NCP इसी तरह टूटी थीं।
मराठी भाषा को लेकर आनंद दुबे की क्या मांग है?
आनंद दुबे ने मांग की है कि मुंबई में फ्लैट खरीदने वालों के लिए मराठी जानना अनिवार्य किया जाए और इसके लिए एक परीक्षा ली जाए। उनका कहना है कि यह नियम केवल रिक्शा-ऑटो चालकों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में अधिक मतदान का क्या मतलब है?
आनंद दुबे के अनुसार, अधिक मतदान हमेशा सरकार बदलने का संकेत नहीं होता। 4 मई को परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि जनता ने किस दिशा में वोट किया।
Nation Press