23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अवैध निर्माण पर मंदिर-मस्जिद में भेद नहीं: शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अवैध निर्माण पर मंदिर-मस्जिद में भेद नहीं: शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे का बड़ा बयान — अवैध निर्माण पर मंदिर और मस्जिद में कोई फ़र्क नहीं, कानून सबके लिए एक है। साथ ही एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की माँग और आईआईटी बॉम्बे मामले में जाँच पूरी होने तक संयम की अपील।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा — मंदिर हो या मस्जिद , अवैध निर्माण पर कानूनी कार्रवाई पूरी तरह जायज़ है।
एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की माँग; पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली में मतदाताओं के नाम कटने की बातों पर चिंता जताई।
आईआईटी बॉम्बे आत्महत्या मामले में क्राइम ब्रांच जाँच चल रही है; दुबे ने निष्कर्ष आने तक संयम बरतने की अपील की।
कर्नाटक के 'वंदे मातरम' विवाद पर दुबे का स्पष्ट रुख — वह इसे गाते रहेंगे; न्यायिक पहलू पर टिप्पणी से परहेज।
उत्तर प्रदेश एनकाउंटर पर कहा — अपराधी की कोई जाति-धर्म नहीं, लेकिन जहाँ संभव हो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए।

शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने 23 सितंबर 2026 को मुंबई में कई संवेदनशील मुद्दों पर अपना पक्ष रखा — जिनमें चुनाव आयोग का एसआईआर (विशेष सारांश पुनरीक्षण) विवाद, आईआईटी बॉम्बे में हुई आत्महत्या का मामला, मस्जिदों पर कथित कार्रवाई और उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर शामिल हैं। दुबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माण को धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए — चाहे वह मंदिर हो या मस्जिद।

एसआईआर विवाद: चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की माँग

आनंद दुबे ने कहा कि अब तक विपक्ष और जनता ही एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगा रही थी, लेकिन अब चुनाव आयोग के भीतरी मतभेदों की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह प्रक्रिया किसी को फायदा पहुँचाने या किसी को कमज़ोर करने के इरादे से चलाई जा रही है।

दुबे के अनुसार पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली में अधिकारियों, नेताओं, मंत्रियों और पुलिसकर्मियों के साथ-साथ आम नागरिकों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के नाम भी मतदाता सूची से कटने की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने इस पर व्यापक बहस और चुनाव आयोग की ओर से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता बताई।

दुबे ने यह भी स्वीकार किया कि एसआईआर अपने आप में एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और मतदाता सूची को अद्यतन रखने के लिए ऐसी समीक्षा होनी चाहिए। लेकिन उनका कहना था कि यदि किसी जीवित मतदाता को मृत दिखाकर उसे मताधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय होगा।

आईआईटी बॉम्बे आत्महत्या: जाँच पूरी होने तक संयम की अपील

आईआईटी बॉम्बे में हुई आत्महत्या की घटना को दुबे ने 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि क्राइम ब्रांच मामले की जाँच कर रही है। उन्होंने अपील की कि जाँच के नतीजे आने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जाए।

दुबे ने मुंबई की विविध सामाजिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना को जातिगत विवाद के रूप में देखने से पहले आधिकारिक जाँच के निष्कर्ष सामने आने चाहिए। उन्होंने मृत छात्र के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए।

अवैध धार्मिक निर्माण: मंदिर और मस्जिद में कोई भेद नहीं

मस्जिदों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से तोड़े जाने और दिल्ली में हुई कार्रवाई के सवाल पर आनंद दुबे ने कहा कि प्रशासन को अपना काम करने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार यदि कोई धार्मिक या अन्य संरचना अवैध तरीके से बनाई गई है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

दुबे ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण को धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए — मंदिर हो या मस्जिद, कानून सबके लिए एक है। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में कई मंदिरों पर भी इसी आधार पर कार्रवाई हो चुकी है। साथ ही उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उल्लेख किया और एआईएमआईएम (AIMIM) की राजनीति पर सवाल उठाए।

'वंदे मातरम' और यूपी एनकाउंटर पर रुख

कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर चल रहे विवाद पर दुबे ने कहा कि वह पहले दिन से मानते हैं कि यह राष्ट्रभक्ति से जुड़ा विषय है। मामला न्यायालय के सामने होने के कारण उन्होंने न्यायिक पहलू पर टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन अपना व्यक्तिगत रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' गाया जाना चाहिए और वह इसे गाते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश में हो रहे पुलिस एनकाउंटरों पर दुबे ने कहा कि 2017 से राज्य में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उनका मत था कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता और जहाँ संभव हो, गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया से सजा मिलनी चाहिए। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाए, तो आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई पुलिस का अधिकार है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और उच्च-शिक्षा संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विडंबना यह है कि वही दल जो मतदाता सूची की पारदर्शिता की बात करते हैं, राज्य सत्ता में रहते हुए उसी प्रक्रिया को प्रभावित करते रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे मामले में 'इंतज़ार करो' की अपील संतुलित ज़रूर लगती है, पर यह उस संस्थागत जवाबदेही के सवाल को टालती है जो तत्काल उठनी चाहिए। कुल मिलाकर दुबे का यह बहु-मुद्दा बयान एक ऐसे नेता की छवि बनाता है जो विवादों में मध्यमार्गी दिखना चाहता है — चुनावी नज़रिए से एक सोची-समझी रणनीति।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद दुबे ने अवैध निर्माण पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा कि अवैध निर्माण को धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए — मंदिर हो या मस्जिद, कानून के तहत कार्रवाई जायज़ है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में कई मंदिरों पर भी इसी आधार पर कार्रवाई हो चुकी है।
एसआईआर विवाद पर दुबे का क्या रुख है?
दुबे ने चुनाव आयोग से एसआईआर प्रक्रिया पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की माँग की है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली में जीवित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटने की बातें सामने आ रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
आईआईटी बॉम्बे आत्महत्या मामले पर दुबे ने क्या कहा?
दुबे ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि क्राइम ब्रांच जाँच कर रही है। उन्होंने अपील की कि जाँच के नतीजे आने तक किसी जातिगत या अन्य निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जाए और मृत छात्र के परिवार के साथ-साथ कॉलेज प्रबंधन के साथ भी न्याय होना चाहिए।
'वंदे मातरम' विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) का रुख क्या है?
दुबे ने कहा कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रभक्ति से जुड़ा विषय है और वह इसे गाते रहेंगे। कर्नाटक में मामला न्यायालय के सामने होने के कारण उन्होंने न्यायिक पहलू पर सीधी टिप्पणी से परहेज किया।
उत्तर प्रदेश पुलिस एनकाउंटर पर दुबे का क्या मत है?
दुबे ने कहा कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होती और अपराध करने वालों को सज़ा मिलनी चाहिए। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही, लेकिन साथ में यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाए तो आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई पुलिस का अधिकार है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले