10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान ANTF ने केरल में सात साल बाद पकड़ा ₹25,000 इनामी भगोड़ा तस्कर, 'ऑपरेशन यमलकमली' से मिली सफलता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान ANTF ने केरल में सात साल बाद पकड़ा ₹25,000 इनामी भगोड़ा तस्कर, 'ऑपरेशन यमलकमली' से मिली सफलता

सारांश

सात साल, फर्जी भाषा, फर्जी पहचान — और 2,500 किलोमीटर का पीछा। राजस्थान ANTF ने केरल के पहाड़ी इलाके में कंबल बेचने वाले एक 'स्थानीय' को पकड़ा, जो असल में ₹25,000 इनामी भगोड़ा तस्कर रंजीत दायमा था। 'ऑपरेशन यमलकमली' ने अंतर-राज्यीय नशा नेटवर्क की एक और कड़ी तोड़ी।

मुख्य बातें

राजस्थान ANTF ने 'ऑपरेशन यमलकमली' के तहत ₹25,000 इनामी भगोड़े तस्कर रंजीत दायमा उर्फ रंजीत बंजारा को केरल से गिरफ्तार किया।
आरोपी सात वर्षों से केरल के शोरनूर और वडक्कनचेरी इलाके में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था।
रंजीत ने कन्नड़, तेलुगु और मलयालम भाषाएँ सीखकर स्थानीय पहचान बनाई और कंबल की दुकान आड़ के रूप में चलाई।
कथित तौर पर उसे पोस्ता भूसा परिवहन पर प्रति किलोग्राम ₹500 कमीशन मिलता था; एक खेप पर कमाई ₹50,000 से ₹2 लाख तक थी।
ANTF जवान राजस्थान से केरल तक 2,500 किलोमीटर का सफर करके गए और ग्राहक बनकर आरोपी को पकड़ा।
आरोपी को राजस्थान लाया गया है और अंतर-राज्यीय नशा नेटवर्क की जाँच जारी है।

राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अंतर-राज्यीय नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए ₹25,000 के इनामी भगोड़े तस्कर सरगना को केरल से गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले सात वर्षों से फर्जी पहचान अपनाकर केरल के दूर-दराज इलाकों में छिपा हुआ था और राजस्थान पुलिस की पकड़ से बाहर था। यह गिरफ्तारी 'ऑपरेशन यमलकमली' के तहत 23 जून को अंजाम दी गई।

कौन है आरोपी रंजीत दायमा

गिरफ्तार आरोपी की पहचान रंजीत दायमा उर्फ रंजीत बंजारा के रूप में हुई है, जो मूलतः मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा का निवासी है। ANTF के इंस्पेक्टर जनरल विकास कुमार के अनुसार, रंजीत एक अन्य कथित तस्कर रमेश बंजारा का करीबी साथी और रिश्तेदार था, जिसे ANTF पहले ही 'ऑपरेशन मदाविकधाट' के तहत गिरफ्तार कर चुकी थी। रमेश से मिली जानकारी के आधार पर ही रंजीत को ट्रेस करने की कार्रवाई शुरू की गई।

कैसे बनाई फर्जी पहचान

जाँचकर्ताओं के अनुसार, रंजीत ने कन्नड़, तेलुगु और मलयालम भाषाएँ सीखकर स्थानीय समुदायों में खुद को पूरी तरह घुला-मिला लिया था। शोरनूर इलाके में वह इतनी धाराप्रवाह मलयालम बोलता था कि स्थानीय लोग उसे वहीं का मूल निवासी समझते थे। फरार रहने के दौरान वह केरल के वडक्कनचेरी में कंबल की दुकान चलाता था और रोज़ाना मोटरसाइकिल से लगभग 150 किलोमीटर का सफर कर कंबल बेचता था। यह व्यवसाय उसकी असली पहचान छिपाने का ज़रिया था।

तस्करी नेटवर्क में भूमिका

पुलिस जाँच में सामने आया है कि जहाँ रमेश बंजारा कथित तौर पर नशीले पदार्थों के सौदे तय करता था, वहीं रंजीत सुरक्षित ठिकानों से पोस्ता भूसा (डोडा-चूरा) के परिवहन और वितरण की ज़िम्मेदारी संभालता था। कथित तौर पर उसे प्रति किलोग्राम लगभग ₹500 का कमीशन मिलता था। 100 से 500 किलोग्राम की खेप पर उसकी अनुमानित कमाई ₹50,000 से ₹2 लाख तक होती थी। जाँचकर्ताओं को संदेह है कि वह तस्करी नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने के लिए समय-समय पर राजस्थान और मध्य प्रदेश भी आता-जाता रहता था।

कैसे हुई गिरफ्तारी

ANTF के जवान राजस्थान से केरल तक लगभग 2,500 किलोमीटर का सफर तय करके पहुँचे। शोरनूर पहुँचकर उन्होंने राजस्थानी कारीगर बनकर इलाके की रेकी की। जब पता चला कि रंजीत पहाड़ी नेलियामपति क्षेत्र में कंबल बेचने गया है, तो अधिकारियों ने संभावित ग्राहक का रूप धारण कर उसे बड़ी खरीदारी के बहाने अपनी गाड़ी के पास बुलाया और हिरासत में ले लिया।

पूछताछ और आगे की कार्रवाई

शुरुआती पूछताछ में रंजीत ने कथित तौर पर राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पोस्ता भूसा सप्लाई करने की बात स्वीकार की। खबरों के अनुसार, उसने यह भी बताया कि उसे अपने खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और गिरफ्तार करने वाली पुलिस के राज्य की जानकारी नहीं थी। आरोपी को अब राजस्थान लाया गया है, जहाँ अंतर-राज्यीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क की पूरी कड़ी उजागर करने के लिए उससे गहन पूछताछ जारी है। यह मामला राज्यों की सीमाओं के पार फैले नशा तस्करी नेटवर्क पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दीर्घकालिक भगोड़ा प्रबंधन में भी दक्ष हो चुके हैं। यह सवाल उठता है कि राज्यों के बीच अपराधियों की साझा डेटाबेस और रियल-टाइम सूचना-साझेदारी तंत्र कितना प्रभावी है। जब तक केंद्रीय स्तर पर इंटरस्टेट क्रिमिनल ट्रैकिंग को मज़बूत नहीं किया जाता, ऐसे 'ऑपरेशन' अपवाद बने रहेंगे, नियम नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन यमलकमली क्या है और इसमें किसे गिरफ्तार किया गया?
ऑपरेशन यमलकमली राजस्थान ANTF का एक विशेष अभियान है, जिसके तहत ₹25,000 इनामी भगोड़े तस्कर रंजीत दायमा उर्फ रंजीत बंजारा को केरल से गिरफ्तार किया गया। वह मध्य प्रदेश के नीमच जिले का निवासी है और सात वर्षों से फरार था।
रंजीत दायमा इतने सालों तक पकड़ से कैसे बचता रहा?
रंजीत ने कन्नड़, तेलुगु और मलयालम भाषाएँ सीखकर केरल के शोरनूर इलाके में स्थानीय पहचान बना ली थी। वह वडक्कनचेरी में कंबल की दुकान चलाता था और रोज़ाना मोटरसाइकिल से 150 किलोमीटर का सफर कर व्यापार करता था, जिससे उसकी असली पहचान छिपी रही।
रंजीत तस्करी नेटवर्क में क्या भूमिका निभाता था?
जाँचकर्ताओं के अनुसार, रंजीत पोस्ता भूसा (डोडा-चूरा) के परिवहन और वितरण की ज़िम्मेदारी संभालता था। कथित तौर पर उसे प्रति किलोग्राम ₹500 कमीशन मिलता था और 100 से 500 किलोग्राम की खेप पर उसकी कमाई ₹50,000 से ₹2 लाख तक होती थी।
ANTF ने केरल में रंजीत को कैसे पकड़ा?
ANTF के जवान राजस्थानी कारीगर बनकर शोरनूर इलाके में पहुँचे और रेकी की। जब पता चला कि रंजीत नेलियामपति पहाड़ी क्षेत्र में कंबल बेचने गया है, तो अधिकारियों ने संभावित ग्राहक बनकर उसे बड़ी खरीदारी के बहाने बुलाया और गिरफ्तार कर लिया।
इस गिरफ्तारी से अंतर-राज्यीय नशा नेटवर्क पर क्या असर पड़ेगा?
रंजीत की गिरफ्तारी से राजस्थान और मध्य प्रदेश में फैले पोस्ता भूसा तस्करी नेटवर्क की अहम कड़ी टूटी है। फिलहाल उससे गहन पूछताछ जारी है और जाँचकर्ता नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले