जयपुर: JDA कमिश्नर सिद्धार्थ महाजन और डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, 12 अक्टूबर को पेशी का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने 8 अक्टूबर 2026 को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के कमिश्नर आईएएस सिद्धार्थ महाजन और जोन-9 के डिप्टी कमिश्नर सूर्यकांत शर्मा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। यह वारंट 'निलय कुंज हाउसिंग स्कीम' के तहत प्लॉट आवंटन में आयोग के 2016 के आदेश की अनुपालना न करने को लेकर दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किए गए। आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर 12 अक्टूबर 2026 को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता कृष्णा ने JDA की 'निलय कुंज हाउसिंग स्कीम' के तहत प्लॉट नंबर 454 के लिए आवेदन किया था, जो उन्हें लॉटरी के माध्यम से आवंटित किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्लॉट का कब्जा नहीं सौंपा गया। करीब एक वर्ष की प्रतीक्षा के बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहाँ यह मामला लगभग चार वर्षों तक चला।
आयोग के आदेश और JDA की अनुपालना न करना
2016 में जिला उपभोक्ता आयोग ने JDA को आवंटित प्लॉट का कब्जा पत्र जारी करने का निर्देश दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस आदेश के बावजूद JDA ने निर्देशों का पालन नहीं किया। इससे भी आगे, शिकायतकर्ता का कहना है कि प्लॉट नंबर 454 किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया, और बाद में जो विकल्प के रूप में प्लॉट नंबर 194 की पेशकश की गई, वह भी किसी और को दे दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम: सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा मामला
इसके बाद शिकायतकर्ता को 'निलय कुंज स्कीम, फेज-2' में प्लॉट नंबर 7 आवंटित किया गया और उन्होंने पूरी धनराशि जमा कर दी। शिकायतकर्ता के अनुसार, बाद में JDA ने प्लॉट का मूल लेआउट बदलकर सामने की चौड़ाई (फ्रंटेज) कम कर दी, जिससे उन्हें पूर्ण और वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया। JDA ने जिला उपभोक्ता आयोग के 2016 के आदेश को राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी, किंतु शिकायतकर्ता के अनुसार किसी भी स्तर पर JDA को राहत नहीं मिली और मामला अंततः सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा।
अवमानना याचिका और गिरफ्तारी वारंट
2020 में शिकायतकर्ता ने अदालती आदेश की अवमानना को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग-2 में याचिका दायर की। हालिया सुनवाई में आयोग ने पाया कि मूल आदेश का अनुपालन अब भी नहीं हुआ है, जिसके बाद JDA कमिश्नर सिद्धार्थ महाजन और डिप्टी कमिश्नर सूर्यकांत शर्मा के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। यह मामला दर्शाता है कि न्यायालयीन आदेशों की अनुपालना न होने पर उपभोक्ता आयोग सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी कड़े कदम उठाने में सक्षम है।
आगे क्या होगा
आयोग ने 12 अक्टूबर 2026 को दोनों अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की है। यदि पुलिस आयोग के निर्देश का पालन करती है तो यह राजस्थान में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है। यह देखना होगा कि JDA प्रशासन अगली सुनवाई से पहले कोई समझौता या अनुपालना करता है या नहीं।