अशोक गहलोत ने जोधपुर पार्किंग परियोजना में देरी पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- जोधपुर पार्किंग परियोजना की देरी पर अशोक गहलोत ने सवाल उठाए।
- भाजपा सरकार की नीति को लापरवाही का प्रतीक बताया।
- इस परियोजना का उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना था।
- नए पुलिस कंट्रोल रूम भवन की भी योजना।
- समय सीमा अब 2026 तक बढ़ी।
जयपुर, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जोधपुर में चल रही बहुस्तरीय पार्किंग परियोजना में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार से प्रश्न उठाते हुए इसे भाजपा सरकार की 'देरी और उपेक्षा की नीति' का उदाहरण बताया।
गहलोत ने अपने डिजिटल चैनल 'इंतजार शास्त्र' पर एक पोस्ट में कहा कि जोधपुर की नई सड़क पर बन रही यह परियोजना निष्क्रिय शासन का प्रतीक बन गई है।
उन्होंने आगे कहा कि यह परियोजना वर्षों पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन भाजपा की अदूरदर्शी सोच के कारण यह अधर में लटकी हुई है। यह 'इंतजार शास्त्र' का एक जीता-जागता उदाहरण है।
इस पार्किंग परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात को सुगम बनाना और पार्किंग की सुविधा प्रदान करना था। इसे 2013 में 675 वाहनों की क्षमता के साथ शुरू किया गया था। लगभग 2,317 वर्ग मीटर भूमि की पहचान की गई और इसके कार्यान्वयन के लिए 28 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई। चूंकि यह भूमि पुलिस कंट्रोल रूम कक्ष की थी, इसलिए यहां एक नए पुलिस कंट्रोल रूम भवन की भी योजना बनाई गई थी।
गहलोत ने आरोप लगाया कि 2013 में सत्ता में आने के बाद, भाजपा सरकार ने जानबूझकर इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना को 5 वर्षों तक रोक रखा था, जबकि जोधपुर के लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया।
कांग्रेस के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमने 2018 में इस परियोजना को पुनर्जीवित किया और 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण अभूतपूर्व व्यवधान के बावजूद, 2022 में पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ काम फिर से शुरू किया।
मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना दिसंबर 2024 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब भाजपा धन की कमी का बहाना बनाकर शेष कार्य रोक रही है और समय सीमा 2026 तक बढ़ा दी गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकेगी।