असम-अरुणाचल सीमा विवाद: हिमंता सरमा बोले — सिर्फ 52 गाँव बाकी, दिलों को कोई सीमा नहीं बाँट सकती
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 13 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच का रिश्ता किसी भी अंतर-राज्यीय सीमा-रेखा से कहीं गहरा है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद में अब केवल 52 गाँव विवादित हैं और दोनों सरकारें इन्हें भी बातचीत के ज़रिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एक्स पर क्या कहा मुख्यमंत्री ने
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर साझा की गई एक पोस्ट में सरमा ने लिखा, "असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच एक ऐसा बंधन है जो सीमाओं से कहीं आगे है। पीढ़ियों से हमारे लोग प्यार, स्नेह और आपसी सम्मान के साथ भाई-बहन की तरह रहे हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "सीमाएँ भले ही हमारे राज्यों को तय करती हों, लेकिन वे हमारे दिलों को कभी नहीं बाँट सकतीं।"
सीमा विवाद की मौजूदा स्थिति
असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद पूर्वोत्तर भारत के सबसे पुराने अंतर-राज्यीय सीमा मुद्दों में से एक है। हालाँकि, हाल के वर्षों में दोनों राज्यों ने संस्थागत तंत्र और उच्च-स्तरीय बातचीत के ज़रिए इस विवाद को सुलझाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। सरमा ने बताया कि अधिकांश मतभेद पहले ही सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाए जा चुके हैं और अब केवल 52 गाँव ही विवाद के दायरे में बचे हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य अपनी सीमाओं को लेकर द्विपक्षीय वार्ता के नए दौर में हैं। असम ने पिछले कुछ वर्षों में मेघालय के साथ भी सीमा समझौते की दिशा में कदम उठाए हैं, जिससे यह क्षेत्रीय कूटनीति का एक सकारात्मक उदाहरण बनता जा रहा है।
शांति और सद्भाव की अपील
मुख्यमंत्री सरमा ने सीमावर्ती जिलों के निवासियों से विशेष रूप से अपील की कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि या बयानबाज़ी से दूर रहें जिससे दोनों राज्यों के बीच का सौहार्दपूर्ण माहौल बिगड़ सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सीमा विवाद का असर दोनों समुदायों के पारंपरिक और सांस्कृतिक संबंधों पर नहीं पड़ना चाहिए।
सरकारी स्तर पर यह माना जा रहा है कि टकराव की बजाय संवाद से निकला समाधान ही सीमावर्ती इलाकों में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित कर सकता है और दोनों ओर के समुदायों के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को बरकरार रख सकता है।
असम सरकार की प्राथमिकता
सरमा के ये बयान असम सरकार की उस व्यापक नीति को रेखांकित करते हैं जिसमें पड़ोसी राज्यों के साथ बातचीत को प्राथमिकता दी गई है। यह दृष्टिकोण न केवल प्रशासनिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एकता को मज़बूत करने की कोशिश को दर्शाता है।
आगे क्या
दोनों राज्यों के बीच शेष 52 गाँवों के मुद्दे पर बातचीत जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही सहयोगात्मक रवैया बना रहा, तो असम-अरुणाचल सीमा विवाद पूर्वोत्तर में सफल अंतर-राज्यीय संवाद का एक नज़ीर बन सकता है।