असम-अरुणाचल सीमा विवाद सुलझा: CM हिमंता बिस्वा सरमा का ऐलान, धेमाजी में 18 घायल
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार, 10 अगस्त को घोषणा की कि धेमाजी जिले में असम और अरुणाचल प्रदेश के निवासियों के बीच हुई झड़प से उपजे सीमा विवाद का समाधान हो गया है। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद यह सफलता मिली है।
मुख्य घटनाक्रम
असम-अरुणाचल प्रदेश की सीमा के निकट स्थित मिंगमांग बस्ती में हाल ही में हुई फायरिंग के बाद दोनों राज्यों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया था। इस गोलीबारी की चपेट में आकर 18 लोग घायल हो गए, जिनमें से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में भूमि अतिक्रमण को लेकर हुए विवाद के कारण यह झड़प भड़की। कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश की ओर से एक अज्ञात व्यक्ति ने पहले फायरिंग की, जिसके बाद कई लोग घायल हो गए।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि असम सरकार ने अपने मंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अरुणाचल प्रदेश के उनके समकक्ष अधिकारियों के साथ तत्काल बातचीत करने का निर्देश दिया था। साथ ही, प्रभावित इलाके में शांति बहाल करने के भी आदेश दिए गए थे। दोनों राज्यों की सरकारों ने मिलकर स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास तेज किए।
घटना की पृष्ठभूमि
यह तनाव अरुणाचल प्रदेश के निचले सियांग जिले में कांगकू सर्कल के पास एक मिसिंग समुदाय के युवक से जुड़ी गोलीबारी की घटना के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। निचला सियांग जिला धेमाजी से सीमा साझा करता है। कथित तौर पर लापता हुआ यह युवक बाद में पैर में चोट के साथ मिला। गोलीबारी के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान और पूरा घटनाक्रम अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना के बाद मिसिंग और गैलो समुदाय के बीच भी तनाव बढ़ गया था।
आम जनता पर असर
घायलों को पहले नजदीकी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल चार लोगों को बाद में असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ में भर्ती कराया गया। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले निवासियों में इस घटना के बाद भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था, जिसे प्रशासनिक हस्तक्षेप से अब काबू में लाने की कोशिश की जा रही है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि असम और अरुणाचल प्रदेश इससे पहले भी सीमा विवादों का सामना कर चुके हैं और प्रशासनिक व स्थानीय स्तर पर हस्तक्षेप की माँग उठती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच सीमा समझौतों की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों की पहचान और घटनाक्रम की जाँच अभी जारी है, और आगे की कार्रवाई इसी के आधार पर तय होगी।