7 अक्टूबर 2026
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असम में पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया मजबूत: SEIAA और SEAC का गठन, श्यामंत बेजबरुआ अध्यक्ष नियुक्त

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असम में पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया मजबूत: SEIAA और SEAC का गठन, श्यामंत बेजबरुआ अध्यक्ष नियुक्त

सारांश

असम सरकार ने SEIAA और SEAC के गठन से पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया को विशेषज्ञ-आधारित संस्थागत ढाँचा दिया है। IIT गुवाहाटी, काजीरंगा के पूर्व फील्ड डायरेक्टर और कई विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ इसमें शामिल हैं — पूर्वोत्तर में बढ़ती परियोजनाओं के बीच यह कदम अहम है।

मुख्य बातें

असम सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को SEIAA और SEAC — दो वैधानिक पर्यावरण निकायों का गठन किया।
गठन का आधार पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 6 अक्टूबर 2026 की केंद्रीय अधिसूचना है।
दोनों निकायों का कार्यकाल राजपत्र प्रकाशन की तारीख से चार वर्ष होगा।
असम PWD के सेवानिवृत्त सचिव श्यामंत बेजबरुआ SEIAA के अध्यक्ष; काजीरंगा के पूर्व फील्ड डायरेक्टर जतिंद्र शर्मा SEAC के अध्यक्ष नियुक्त।
दोनों कार्यालय गुवाहाटी के बामुनिमैदाम में असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भवन की तीसरी मंजिल पर स्थापित।
निर्णय सामूहिक जिम्मेदारी के आधार पर; सहमति न बनने पर बहुमत की राय मान्य होगी।

असम सरकार ने राज्य में पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया को संस्थागत रूप से सुदृढ़ करते हुए 7 अक्टूबर 2026 को दो महत्वपूर्ण वैधानिक निकायों — स्टेट लेवल एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) और स्टेट लेवल एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी (SEAC) — का गठन किया है। इन निकायों की स्थापना से अब राज्य में पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता वाले सभी परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए एक स्पष्ट और विशेषज्ञ-आधारित ढाँचा तैयार हो गया है।

गठन का आधार और कार्यकाल

इन दोनों वैधानिक निकायों का गठन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के आधार पर किया गया है। दोनों निकायों का कार्यकाल केंद्र सरकार की अधिसूचना के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से चार वर्ष का होगा। SEIAA की सिफारिशों के आधार पर पर्यावरण मंजूरी आवेदनों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और यह प्राधिकरण संबंधित सरकारी अधिसूचना के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करेगा।

SEIAA का नेतृत्व और संरचना

असम लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त पूर्व सचिव श्यामंत बेजबरुआ को SEIAA का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। गुवाहाटी विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सोसिंद्र कुमार बोरठाकुर प्राधिकरण में सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। असम सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव प्राधिकरण के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।

SEAC की विशेषज्ञ समिति

स्टेट लेवल एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी की अध्यक्षता जतिंद्र शर्मा, आईएफएस (सेवानिवृत्त) करेंगे, जो पूर्व मुख्य वन संरक्षक और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रह चुके हैं। समिति में असम विश्वविद्यालय, सिलचर के प्रोफेसर पार्थंकर चौधरी, कॉटन विश्वविद्यालय के डॉ. राहुल महंता, पर्यावरणविद् डॉ. अरूप बरपुजारी, आईआईटी गुवाहाटी के डॉ. अरूप कुमार शर्मा, गुवाहाटी विश्वविद्यालय के डॉ. भागवत प्राण दुवारा और कॉटन विश्वविद्यालय के डॉ. नारायण शर्मा शामिल हैं। असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव SEAC के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया

विशेषज्ञ पैनल सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर कार्य करेगा। अध्यक्ष व्यक्तिगत मामलों पर विचार के दौरान आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे, और यदि सहमति नहीं बन पाती तो बहुमत की राय मान्य होगी। दोनों निकायों के कार्यालय गुवाहाटी के बामुनिमैदाम स्थित असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इमारत की तीसरी मंजिल पर स्थापित किए गए हैं।

संसाधन और प्रशासनिक व्यवस्था

असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दोनों संस्थानों के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करेगा और वित्तीय, लॉजिस्टिकल तथा जनशक्ति सहायता प्रदान करेगा। राज्य सरकार आवास, परिवहन और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराएगी, जबकि अध्यक्षों और सदस्यों के पारिश्रमिक एवं भत्ते असम सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार निर्धारित होंगे। गौरतलब है कि यह ढाँचा ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर राज्यों में अवसंरचना परियोजनाओं की संख्या और उनसे जुड़ी पर्यावरणीय जाँच की माँग दोनों तेज़ी से बढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ये निकाय विकास परियोजनाओं के दबाव में कितनी स्वायत्तता से काम कर पाते हैं। पूर्वोत्तर में बड़े बुनियादी ढाँचे की गति तेज होने के साथ, SEAC की सिफारिशों पर SEIAA का रुख यह तय करेगा कि यह ढाँचा पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक तंत्र बनता है या महज अनुमोदन की एक और परत।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में SEIAA और SEAC क्या हैं?
SEIAA (स्टेट लेवल एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी) और SEAC (स्टेट लेवल एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी) दो वैधानिक निकाय हैं जो राज्य में पर्यावरण मंजूरी आवश्यक परियोजनाओं का मूल्यांकन और अनुमोदन करेंगे। SEAC की सिफारिशों के आधार पर SEIAA अंतिम निर्णय लेगी।
इन निकायों का गठन किस आधार पर हुआ?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को एक अधिसूचना जारी की, जिसके आधार पर असम सरकार ने इन दोनों वैधानिक निकायों का गठन किया। दोनों का कार्यकाल राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से चार वर्ष का होगा।
SEIAA के अध्यक्ष कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
श्यामंत बेजबरुआ को SEIAA का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो असम लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त पूर्व सचिव हैं। SEAC की अध्यक्षता जतिंद्र शर्मा (IFS, सेवानिवृत्त) कर रहे हैं, जो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डायरेक्टर रहे हैं।
इन निकायों के कार्यालय कहाँ स्थित होंगे?
दोनों निकायों के कार्यालय गुवाहाटी के बामुनिमैदाम में असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इमारत की तीसरी मंजिल पर स्थापित किए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दोनों के लिए सचिवालय के रूप में वित्तीय और लॉजिस्टिकल सहायता भी प्रदान करेगा।
इन निकायों में निर्णय कैसे लिए जाएंगे?
दोनों निकाय सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर काम करेंगे। अध्यक्ष पहले आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे, और यदि सहमति नहीं बन पाती तो बहुमत की राय को मान्यता दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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