असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों का अंतिम चरण, पोलिंग कर्मियों का अनोखा अनुभव
सारांश
Key Takeaways
- असम विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
- पोलिंग कर्मियों का उत्साह और जिम्मेदारी का भाव विशेष ध्यान देने योग्य है।
- मतदाता अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
- चुनाव आयोग ने मतदान को निष्पक्ष बनाने के लिए सभी तैयारियां की हैं।
- असम में 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
विश्वनाथ, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम विधानसभा चुनाव की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। विश्वनाथ और होजाई में पोलिंग दल अपने मतदान केंद्रों के लिए बुधवार को निकल पड़े हैं। चुनावी माहौल में कर्मचारियों का उत्साह और उनके प्रति जिम्मेदारी का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
होजाई से एक पोलिंग कर्मी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए राष्ट्र प्रेस को बताया कि यह उनके जीवन का पहला ऐसा अनुभव है और वे खुद को बहुत उत्साहित और तरोताजा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी पर जाना उनके लिए गर्व की बात है और यह एक नये अनुभव के रूप में देखा जा रहा है।
एक अन्य पोलिंग कर्मी ने कहा कि सभी लोग एक ही चरण में चुनाव ड्यूटी निभा रहे हैं, जिससे टीमवर्क और सहयोग की भावना मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है और यह अनुभव उनके लिए बेहद खास है।
एक पोलिंग कर्मी ने बताया कि उनका पोलिंग स्टेशन संख्या 92 है और उनकी टीम में कुल चार सदस्य हैं, जो मिलकर चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में जुटे हैं।
नगांव से एक पोलिंग कर्मी ने कहा, "मैं मतदाताओं से अनुरोध करता हूँ कि वे जल्दी आएं और मतदान प्रक्रिया में भाग लें। अपने वोट डालें और अपने अधिकार का उपयोग करें।"
गौरतलब है कि असम में गुरुवार को एक ही चरण में मतदान होना है। राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर इस बार कुल 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनमें राष्ट्रीय दलों के 211, राज्य स्तरीय दलों के 116, पंजीकृत दलों के 137 और 258 निर्दलीय प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियों को सुनिश्चित किया है। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।
असम में लोकतंत्र के इस महापर्व को लेकर सभी में उत्साह का माहौल है और सभी की नजरें मतदान और नतीजों पर टिकी हुई हैं।