अविनाश वधावन: शाहरुख-अक्षय-अजय से आगे थे 90s के इस सितारे, फिर कैसे डूबा करियर?
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता अविनाश वधावन एक वक्त 90 के दशक के सबसे चमकदार सितारों में शुमार थे — वह दौर जब अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार जैसे नाम अभी अपनी पहचान बना रहे थे। 1991 में आई फिल्म 'आई मिलन की रात' ने उन्हें रातों-रात स्टार बनाया, लेकिन कुछ ही वर्षों में गलत फैसलों, निजी उलझनों और लंबी गैरहाजिरी ने उनके करियर को ऐसी ठोकर लगाई जिससे वे कभी उबर नहीं पाए। आज वह बड़े पर्दे के बजाय टीवी और OTT की दुनिया में सक्रिय हैं।
प्रतिभाशाली छात्र से मॉडल तक का सफर
अविनाश वधावन का जन्म 2 नवंबर 1968 को मुंबई में हुआ। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले अविनाश को कॉलेज के दिनों में लगातार स्कॉलरशिप मिलती रही। उन्होंने दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और उन्हें प्रतिष्ठित आईआईएम लखनऊ में दाखिला भी मिल गया था।
हालाँकि, अविनाश ने मुंबई के जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट से MBA करने का निर्णय लिया। पढ़ाई के दौरान एक मशहूर फैशन डिजाइनर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें मॉडलिंग का प्रस्ताव मिला — यहीं से जिंदगी ने करवट ली। महज एक साल में उन्होंने 67 विज्ञापनों और फैशन शोज़ में हिस्सा लिया, जिसके चलते MBA की कक्षाएँ छूटने लगीं और दो सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
बॉलीवुड में धमाकेदार दस्तक
80 के दशक के आखिरी वर्षों में अविनाश ने फिल्मों में कदम रखा, लेकिन असली पहचान दिलाई 1991 की फिल्म 'आई मिलन की रात' ने, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। इस कामयाबी के बाद उन्होंने अगले चार-पाँच सालों में बैक-टू-बैक करीब 17 से 18 फिल्में साइन कीं।
'बलमा', 'जुनून', 'दिल की बाजी', 'गीत' और 'पापी गुड़िया' जैसी फिल्मों के जरिए वे निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद बन गए थे। अविनाश ने खुद एक साक्षात्कार में बताया कि 1991 और 1992 के दौरान वे कई निर्देशकों की पहली पसंद थे और काम के मामले में अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार से काफी आगे चल रहे थे।
हाथ से निकलीं मील का पत्थर बनने वाली फिल्में
यह वह दौर था जब किस्मत ने कुछ और तय किया हुआ था। कथित तौर पर सुपरहिट फिल्म 'फूल और कांटे' सबसे पहले उन्हें ही ऑफर हुई थी। इसी तरह 'दीवाना' में एक अहम किरदार उनके लिए सोचा गया था, जिसे बाद में शाहरुख खान ने निभाया। वहीं, यश चोपड़ा की फिल्म 'ये दिल्लगी' की मीटिंग में देर से पहुँचने के कारण वह भूमिका भी उनके हाथ से निकल गई, जो अंततः सैफ अली खान को मिली। गौरतलब है कि ये तीनों फिल्में अपने-अपने नायकों के करियर के लिए निर्णायक साबित हुईं।
निजी जिंदगी की उथल-पुथल और लंबी गैरहाजिरी
करियर की ऊँचाई पर ही अविनाश वधावन ने 1990 में शादी कर ली और कम उम्र में पिता भी बन गए। निजी जिंदगी में बढ़ती परेशानियों का असर काम पर साफ दिखने लगा और उन्होंने खुद माना कि उन्होंने व्यक्तिगत समस्याओं को करियर पर हावी होने दिया। इसी दरमियान वे भारत छोड़कर विदेश चले गए और लंबे अरसे तक इंडस्ट्री से कट गए।
अविनाश ने बताया, 'मैं एक फिल्म की शूटिंग के लिए विदेश गया और फिर वापस ही नहीं लौटा।' इस लंबी दूरी का नतीजा यह हुआ कि मेकर्स और निर्देशकों के साथ उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया। 2000 में उनकी पहली पत्नी छाया पारेख — जो पूर्व मॉडल और जानी-मानी चित्रकार हैं और अब छाया स्मृति मिरानी के नाम से जानी जाती हैं — से तलाक हो गया। इसके बाद 2003 में उन्होंने दूसरी शादी की।
आज कहाँ हैं अविनाश वधावन
जब वे इंडस्ट्री में वापस लौटे, तब तक बॉलीवुड का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका था। वे अब बड़े पर्दे से लगभग अनुपस्थित हैं और टीवी शोज़ तथा OTT प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। उनकी कहानी इस बात की याद दिलाती है कि सही समय पर सही फैसले न करने की कीमत, चाहे करियर में हो या निजी जिंदगी में, कितनी बड़ी हो सकती है।