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बालापुर गणेश लड्डू नीलामी 2026: ₹39 लाख में बिका 21 किलो का लड्डू, बना नया रिकॉर्ड

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बालापुर गणेश लड्डू नीलामी 2026: ₹39 लाख में बिका 21 किलो का लड्डू, बना नया रिकॉर्ड

सारांश

₹450 से ₹39 लाख तक — बालापुर गणेश लड्डू की नीलामी तीन दशकों में हैदराबाद की सबसे अनोखी परंपरा बन चुकी है। 2026 में एस. प्रणीत रेड्डी ने नया रिकॉर्ड बनाया, और यह सिलसिला हर साल ऊँचाई छूता जा रहा है।

मुख्य बातें

बालापुर गणेश लड्डू की नीलामी 25 सितंबर 2026 को ₹39 लाख में हुई — एक नया रिकॉर्ड।
प्रणीत रेड्डी ने खुली नीलामी में 21 किलो का यह लड्डू खरीदा।
पिछले वर्ष यही लड्डू ₹35 लाख में बिका था; 2024 में कीमत ₹30.01 लाख थी।
लड्डू नीलामी की परंपरा 1994 में ₹450 से शुरू हुई थी; अब तक 31 बार नीलामी हो चुकी है।
2020 में कोविड-19 के कारण नीलामी नहीं हुई थी; लड्डू तत्कालीन मुख्यमंत्री के.
चंद्रशेखर राव को भेंट किया गया था।
नीलामी के बाद विसर्जन यात्रा हुसैन सागर झील तक पहुँचती है।

हैदराबाद के प्रसिद्ध बालापुर गणेश लड्डू ने इस वर्ष 25 सितंबर 2026 को नीलामी में नया रिकॉर्ड बनाया, जब कारोबारी एस. प्रणीत रेड्डी ने 21 किलो के इस लड्डू को खुली नीलामी में ₹39 लाख में खरीदा। यह नीलामी पारंपरिक गणेश विसर्जन यात्रा शुरू होने से पहले हैदराबाद के दक्षिणी इलाके में स्थित बालापुर गांव में आयोजित की गई।

नीलामी का मुख्य घटनाक्रम

इस वर्ष खुली नीलामी में कुल आठ प्रतिभागियों ने बोली लगाई, जिसमें एस. प्रणीत रेड्डी विजेता बने। पिछले वर्ष यही लड्डू ₹35 लाख में बिका था, और इस बार की कीमत ने उसे पीछे छोड़ नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। गौरतलब है कि 2024 में कोलानु शंकर रेड्डी ने इसे ₹30.01 लाख में खरीदा था, जबकि उससे पिछले वर्ष लिंगाला दशरथ गौड़ ने सबसे ऊंची बोली लगाकर यह लड्डू जीता था।

परंपरा की जड़ें: 1994 से अब तक का सफर

बालापुर गणेश उत्सव समिति के अनुसार, इस उत्सव का इतिहास 45 वर्ष पुराना है, किंतु लड्डू की नीलामी की परंपरा 1994 में आरंभ हुई थी। उस पहली नीलामी में यह लड्डू महज ₹450 में बिका था और इसे कोलानु मोहन रेड्डी ने खरीदा था। उन्होंने लगातार पाँच वर्षों तक इस नीलामी में जीत हासिल की और दावा किया कि लड्डू खरीदने के बाद उन्हें समृद्धि मिली। इस दावे ने नीलामी की लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया।

शुरुआती 15 वर्षों तक नीलामी में केवल स्थानीय निवासियों को भाग लेने की अनुमति थी। बाद में दूसरे इलाकों के लोगों के लिए भी दरवाजे खोले गए, जिससे भागीदारी और बोली की रकम दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अब तक बालापुर गणेश उत्सव समिति यह नीलामी 31 बार आयोजित कर चुकी है।

कोरोना महामारी का अपवाद

यह नीलामी 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण नहीं हो पाई थी। उस वर्ष आयोजकों ने यह लड्डू तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को भेंट स्वरूप प्रदान किया था। यह एकमात्र अवसर रहा जब इस परंपरा में बाधा आई।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

मान्यता है कि बालापुर गणेश का यह लड्डू सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष कारोबारी और राजनेता इसकी नीलामी में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। नीलामी में लड्डू जीतने वाले इसके टुकड़े अपने परिवार और मित्रों में बाँटते हैं तथा लड्डू के कुछ अंश अपने खेतों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और घरों में प्रसाद के रूप में रखते हैं।

विसर्जन यात्रा और आगे का कार्यक्रम

नीलामी के पश्चात् गणेश विसर्जन यात्रा आरंभ होती है, जो हैदराबाद के अलग-अलग इलाकों से होते हुए हुसैन सागर झील तक पहुँचती है। इस वर्ष भी यही परंपरा निभाई गई। हर वर्ष बढ़ती बोली यह दर्शाती है कि यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि हैदराबाद की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह अब पूरे तेलंगाना के व्यापारिक और राजनीतिक अभिजात वर्ग की भागीदारी का अखाड़ा बन गई है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालापुर गणेश लड्डू 2026 की नीलामी में कितने रुपए में बिका?
बालापुर गणेश लड्डू 2026 की नीलामी में ₹39 लाख में बिका, जो अब तक की सबसे ऊँची कीमत है। कारोबारी एस. प्रणीत रेड्डी ने 21 किलो के इस लड्डू को खुली नीलामी में खरीदा।
बालापुर गणेश लड्डू नीलामी की परंपरा कब से शुरू हुई?
बालापुर गणेश लड्डू की नीलामी परंपरा 1994 में शुरू हुई थी, जब पहली बार यह लड्डू महज ₹450 में बिका था। तब से यह परंपरा निरंतर जारी है और अब तक 31 बार यह नीलामी आयोजित हो चुकी है।
बालापुर गणेश लड्डू का धार्मिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि बालापुर गणेश का यह लड्डू खरीदने वाले के लिए सौभाग्य और समृद्धि लेकर आता है। लड्डू के टुकड़े परिवार-मित्रों में बाँटे जाते हैं और खेतों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी रखे जाते हैं।
क्या 2020 में बालापुर गणेश लड्डू की नीलामी हुई थी?
नहीं, 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण नीलामी नहीं हुई थी। उस वर्ष आयोजकों ने यह लड्डू तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को भेंट किया था।
बालापुर गणेश विसर्जन यात्रा कहाँ तक जाती है?
नीलामी के बाद आयोजित होने वाली गणेश विसर्जन यात्रा हैदराबाद के अलग-अलग इलाकों से होते हुए हुसैन सागर झील तक पहुँचती है। यह यात्रा बालापुर गांव से शुरू होती है।
राष्ट्र प्रेस
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