मद्दुर में भाजपा-जेडीएस का गणपति विसर्जन जुलूस, 10,000 लोगों की भीड़; पुलिस हाई अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मांड्या जिले के मद्दुर में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) की ओर से बड़े पैमाने पर गणपति विसर्जन जुलूस आयोजित किया जा रहा है। पिछले वर्ष इसी अवसर पर हुई पत्थरबाजी और सांप्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह हाई अलर्ट पर है।
जुलूस का स्वरूप और मार्ग
इस वर्ष 'दोस्ती' गुट की ओर से 108 गणेश मूर्तियों का सामूहिक विसर्जन किया जा रहा है। मद्दुर की कई जगहों पर स्थापित गणपति प्रतिमाओं को एक साथ विसर्जित करने से पहले एक विशाल जुलूस मुख्य सड़क से होकर गुजरेगा। गठबंधन ने निर्णय लिया है कि जुलूस उसी मार्ग से निकाला जाएगा जिस पर पिछले वर्ष विवाद उत्पन्न हुआ था। इस जुलूस में लगभग 10,000 लोगों के शामिल होने की संभावना व्यक्त की गई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। जिस मस्जिद के पास से जुलूस गुजरेगा, वहाँ विशेष रूप से सुरक्षा बढ़ाई गई है। पूरे गणेश जुलूस पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है, ताकि हर गतिविधि पर कड़ी नज़र बनी रहे।
जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आज मद्दुर शहर में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। बार और रेस्तरां खोलने पर भी रोक लगाई गई है, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
पिछले साल की घटना की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले वर्ष मद्दुर में गणेश जुलूस के दौरान पत्थरबाजी की घटना हुई थी, जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया था और राज्य भर में सुर्खियाँ बटोरी थीं। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर सियासी बहस पहले से ही जारी है।
राजनीतिक संदेश और चुनावी निहितार्थ
राजनीतिक दृष्टि से भी यह जुलूस अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा-जेडीएस गठबंधन इस आयोजन के ज़रिए पिछले साल के दंगों से सबक लेते हुए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। गठबंधन के राज्य स्तरीय नेता इस रैली में शामिल होंगे। पेट स्ट्रीट पर मस्जिद के निकट गणपति रैली का मुख्य आयोजन होगा, जहाँ दोनों दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। आलोचकों का कहना है कि इस आयोजन का स्वरूप एक सुनियोजित चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
आगे क्या
सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन की तैयारी और गठबंधन का एकजुटता का दाँव मद्दुर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने में सफल होता है। जुलूस की समाप्ति और विसर्जन के बाद की स्थिति यह तय करेगी कि इस क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव की दिशा में यह कदम कितना प्रभावी रहा।