26 सितंबर 2026
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शहबाज शरीफ के यूएन भाषण के दौरान बलूच-पश्तून कार्यकर्ताओं का विरोध, न्यूयॉर्क और जिनेवा में प्रदर्शन

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शहबाज शरीफ के यूएन भाषण के दौरान बलूच-पश्तून कार्यकर्ताओं का विरोध, न्यूयॉर्क और जिनेवा में प्रदर्शन

सारांश

जिस वक्त शहबाज शरीफ यूएन महासभा में पाकिस्तान की छवि पेश कर रहे थे, उसी वक्त परिसर के बाहर बलूच और पश्तून कार्यकर्ता उन्हीं नीतियों के कथित शिकारों की आवाज़ बन रहे थे। न्यूयॉर्क और जिनेवा में एक साथ हुए इन प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों की पीड़ा को वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया।

मुख्य बातें

बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) और पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूएन परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन उस समय हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहे थे।
BNM ने जिनेवा में यूएन मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान भी समानांतर रैली निकाली और ब्रोकन चेयर स्मारक पर फोटो प्रदर्शनी आयोजित की।
PTM ने बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और पाकिस्तान द्वारा कथित 'हथियारबंद समूहों' को समर्थन की स्वतंत्र जाँच की माँग की।
PTM ने अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर तालिबानी प्रतिबंधों की भी निंदा करते हुए खुद को तालिबान से अलग बताया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान 26 सितंबर 2026 को बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) और पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) के समर्थकों ने न्यूयॉर्क स्थित यूएन परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने-अपने समुदायों पर कथित हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और अन्यायपूर्ण कारावास के विरुद्ध आवाज़ उठाई।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्रवार, 26 सितंबर को अलग-अलग आयोजित इन प्रदर्शनों में BNM और PTM के कार्यकर्ताओं ने बलूच और पश्तून समुदायों पर कथित दमन को रोकने की माँग रखी। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियाँ थीं, जिन पर लिखा था — 'वे आम नागरिक थे, निशाना नहीं। यूएन अब कार्रवाई करे और बलूचिस्तान में सामूहिक सज़ा बंद कराए', 'जबरन गायब करना बंद करो' और 'बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्ज़ा किया है।' ये सभी नारे और आरोप प्रदर्शनकारियों के अपने दावे हैं।

उल्लेखनीय है कि न्यूयॉर्क में विरोध उस वक्त हो रहा था, जब जिनेवा में BNM का तीन दिवसीय सम्मेलन भी एक साथ चल रहा था — यह समन्वित अंतरराष्ट्रीय दबाव की रणनीति का स्पष्ट संकेत है।

जिनेवा में समानांतर प्रदर्शन

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान BNM ने जिनेवा में एक विरोध रैली निकाली। संगठन के अनुसार, इसका उद्देश्य बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर बढ़ रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना था।

BNM के अनुसार, जिनेवा के प्रतिष्ठित ब्रोकन चेयर स्मारक पर एक फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें बलूचिस्तान में कथित रूप से बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति को दृश्यों के ज़रिये उजागर किया गया। सम्मेलन में 'बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति, जबरन गुमशुदगी, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याएँ, सामूहिक सज़ा और राजनीतिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध' जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।

पश्तून तहफुज मूवमेंट की माँगें

PTM ने अपने प्रदर्शन के दौरान एक औपचारिक प्रस्ताव पढ़ा, जिसमें संगठन ने कहा कि वह बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और अपने इलाकों में बिना फटे गोला-बारूद के पड़े होने से जुड़ी विश्वसनीय शिकायतों को लेकर बेहद चिंतित है। PTM ने अफगानिस्तान के भीतर पश्तून इलाकों में पाकिस्तान की ओर से कथित जमीनी और हवाई हमलों की भी निंदा की।

गौरतलब है कि पश्तून समुदाय अफगानिस्तान और पाकिस्तान को विभाजित करने वाली डूरंड लाइन के दोनों तरफ बसा है। PTM इस सीमा को मनमाने ढंग से खींची गई मानता है। संगठन ने पाकिस्तान पर 'हथियारबंद समूहों' को कथित समर्थन देने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की।

तालिबान और महिला अधिकारों पर PTM का रुख

PTM ने अपनी तालिबान से अलग पहचान पर ज़ोर देते हुए अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा तथा रोज़गार पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी कड़ी निंदा की। यह स्थिति दर्शाती है कि इन आंदोलनों का दायरा केवल पाकिस्तान विरोध तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय मानवाधिकारों की व्यापक चिंता तक फैला है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का वार्षिक उच्च-स्तरीय सत्र चल रहा है और दुनिया भर के नेता न्यूयॉर्क में एकत्रित हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के ज़रिए BNM और PTM ने वैश्विक मंच पर अपनी आवाज़ पहुँचाने की कोशिश की है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी क्षण उनकी सरकार पर लगाए जा रहे आरोप परिसर के बाहर तख्तियों पर टँगे थे — यह संयोग नहीं, सुनियोजित रणनीति है। BNM और PTM का एक साथ न्यूयॉर्क और जिनेवा में उतरना दर्शाता है कि ये आंदोलन अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक पैरोकारी की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर शरीफ के भाषण की सामग्री पर केंद्रित रहती है, लेकिन असली खबर यह है कि पाकिस्तान को अब अपने ही नागरिकों की आवाज़ों के सामने वैश्विक मंच पर सफाई देनी पड़ रही है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं ने यूएन के बाहर विरोध क्यों किया?
BNM और PTM के कार्यकर्ताओं ने 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान न्यूयॉर्क में यूएन परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। उनका उद्देश्य बलूच और पश्तून समुदायों पर कथित हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और दमन की ओर वैश्विक ध्यान खींचना था।
बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने जिनेवा में क्या किया?
BNM ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान एक तीन दिवसीय सम्मेलन और विरोध रैली आयोजित की। साथ ही ब्रोकन चेयर स्मारक पर फोटो प्रदर्शनी भी लगाई, जिसमें बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर किया गया।
पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) की मुख्य माँगें क्या हैं?
PTM ने बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और पाकिस्तान द्वारा 'हथियारबंद समूहों' को कथित समर्थन की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की है। संगठन ने अफगानिस्तान के पश्तून इलाकों में पाकिस्तान के कथित हमलों की भी निंदा की।
डूरंड लाइन को लेकर PTM का रुख क्या है?
PTM अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खींची गई डूरंड लाइन को मनमाने ढंग से बनाई गई सीमा मानता है। संगठन का कहना है कि पश्तून समुदाय इस सीमा के दोनों तरफ रहता है और उसे कृत्रिम सीमा की वजह से विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।
इन प्रदर्शनों का अंतरराष्ट्रीय महत्व क्या है?
यूएन महासभा के वार्षिक उच्च-स्तरीय सत्र के दौरान इन प्रदर्शनों का आयोजन सुनियोजित था, ताकि वैश्विक नेताओं और मीडिया की नज़र में ये मुद्दे आ सकें। न्यूयॉर्क और जिनेवा में एक साथ हुए इन प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि ये आंदोलन अब वैश्विक पैरोकारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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