प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: बलरामपुर में ४,१७७ गर्भवती महिलाओं को मिला पोषण और आर्थिक सहारा
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की रामचंद्रपुर परियोजना में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) गर्भवती और धात्री महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव ला रही है। 1 जनवरी 2017 से केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस योजना के तहत अब तक परियोजना क्षेत्र में 4,177 महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं — जिनमें 3,428 प्रथम गर्भावस्था वाली और 749 द्वितीय संतान के रूप में बालिका की माताएं शामिल हैं। योजना का मूल उद्देश्य मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मज़बूत करना और गर्भावस्था के दौरान होने वाले आर्थिक नुकसान की आंशिक भरपाई करना है।
योजना की संरचना और सहायता राशि
परियोजना अधिकारी शीला एक्का के अनुसार, प्रथम संतान के जन्म पर पात्र लाभार्थी को ₹5,000 की राशि दो किस्तों में दी जाती है — पहली किस्त ₹3,000 और दूसरी किस्त ₹2,000 सीधे बैंक खाते में। द्वितीय संतान के रूप में बालिका के जन्म पर यह सहायता राशि बढ़कर ₹6,000 हो जाती है। यह राशि नकद हस्तांतरण के माध्यम से दी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।
योजना के तहत महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने और नवजात शिशुओं के समय पर टीकाकरण के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जोखिम कम किए जा सकें।
लाभार्थियों की आवाज़
लाभान्वित महिला अनिमा ने बताया कि जब आर्थिक तंगी थी, तब इस योजना ने सहारा दिया। उन्होंने कहा, पहली किस्त ₹3,000 और दूसरी किस्त ₹2,000 खाते में आई, जिससे पौष्टिक आहार लिया और माँ-बच्चे दोनों स्वस्थ रहे।
एक अन्य हितग्राही गीता देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता ने योजना की जानकारी दी, फॉर्म भरवाया और किस्तों की पूरी प्रक्रिया समझाई। उनके अनुसार यह योजना महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
आंगनबाड़ी की भूमिका
सुपरवाइजर संजीता बखला ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर महिलाओं को योजना से जोड़ने में केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। पात्र महिलाओं की पहचान, पंजीकरण और दस्तावेज़ीकरण — सब कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता सीमित है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहाँ आदिवासी और ग्रामीण आबादी अधिक है, मातृ-मृत्यु दर और शिशु कुपोषण राष्ट्रीय औसत से अधिक रहे हैं। ऐसे में PMMVY जैसी योजनाएं न केवल आर्थिक सहायता देती हैं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवहार में बदलाव लाने का माध्यम भी बनती हैं। सरकार ने पात्र गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे समय पर पंजीकरण कराएं और स्वास्थ्य विभाग की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें, ताकि योजना का पूरा लाभ मिल सके।