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केंद्र का निर्णय बीबीएमबी में बदलाव के जरिए नदी के पानी पर नियंत्रण की कोशिश: आप पंजाब

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केंद्र का निर्णय बीबीएमबी में बदलाव के जरिए नदी के पानी पर नियंत्रण की कोशिश: आप पंजाब

सारांश

पंजाब में आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के बीबीएमबी में बदलाव की आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय राज्य के जल संसाधनों पर नियंत्रण और अधिकार को कमजोर करने का प्रयास है। जानें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

केंद्र का निर्णय बीबीएमबी में बदलाव से चिंताजनक है।
पंजाब के जल संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश हो रही है।
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 का महत्व है।
हरियाणा ने अपने हिस्से का सारा पानी इस्तेमाल किया।
भूजल के अधिक उपयोग से समस्याएं बढ़ रही हैं।

चंडीगढ़, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में किए गए परिवर्तनों की कड़ी निंदा की। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय नदी के पानी पर नियंत्रण स्थापित करने और राज्य के संसाधनों पर उसके अधिकार को कमजोर करने का प्रयास है।

आप के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा, “पंजाब ने हमेशा अन्याय का सामना किया है, लेकिन वह हर बार मजबूती से खड़ा हुआ है। हालांकि, अतीत में कुछ नेताओं ने ही इसकी स्थिति को कमजोर किया था।”

उन्होंने कहा, “पंजाब के साथ हुए अन्याय की कहानी लंबी है, लेकिन यहां के लोग हर बार दोगुनी ताकत से मुकाबला करते हैं। दुर्भाग्य से, कुछ नेताओं ने राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाया है।”

पन्नू ने आगे कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय, जिसमें बीबीएमबी के महत्वपूर्ण पदों के लिए पूरे देश से आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की भावना के खिलाफ है।

उन्होंने बताया, “पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 और 1976 में बीबीएमबी के गठन के समय यह तय किया गया था कि ये महत्वपूर्ण पद पंजाब के लिए सुरक्षित रहेंगे। अब केंद्र सरकार अपने अधिकारियों को इन पदों पर नियुक्त कर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।”

इस घटनाक्रम को राज्य के जल संसाधनों के दोहन से जोड़ते हुए पन्नू ने कहा कि हरियाणा ने पिछले वर्ष अपने हिस्से का सारा पानी प्रयोग कर लिया था और बाद में अतिरिक्त पानी की मांग की।

उन्होंने बताया, “मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अगर हरियाणा अपने हिस्से का पानी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाया, तो यह उसकी गलती है, पंजाब की नहीं। इस वर्ष भी पंजाब ने हरियाणा को कई बार सलाह दी कि पानी का उपयोग समझदारी से करें।”

पन्नू ने आगे कहा कि पंजाब के पानी से संबंधित निर्णयों को प्रभावित करने के लिए मौजूदा अधिकारियों को हटाकर उनकी जगह केंद्र सरकार के करीबी लोगों को लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब पहले ही भूजल के अधिक उपयोग के कारण समस्याओं का सामना कर चुका है।

पन्नू ने कहा, “पंजाब को पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा है। धान की खेती के कारण भूजल स्तर तेजी से गिरा है और कीटनाशकों के उपयोग के कारण लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं।”

संपादकीय दृष्टिकोण

एक गंभीर चिंता का विषय है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक है, बल्कि जल प्रबंधन और संसाधनों के अधिकारों से भी जुड़ा है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीबीएमबी का गठन कब हुआ था?
बीबीएमबी का गठन 1976 में किया गया था।
आप ने केंद्र सरकार के निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आप ने इसे राज्य के जल संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश बताया है।
हरियाणा ने पानी के उपयोग को लेकर क्या कहा?
हरियाणा ने पिछले साल अपने हिस्से का सारा पानी इस्तेमाल किया था और फिर अतिरिक्त पानी की मांग की।
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 का क्या महत्व है?
यह अधिनियम पंजाब के जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
पंजाब में जल संकट कैसे बढ़ रहा है?
भूजल के अधिक उपयोग और कीटनाशकों के कारण पंजाब में जल संकट बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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