भारत-वानुअतु संबंध मजबूत: एमओएस मार्गेरिटा ने पीएम जोथम नापत से की ऐतिहासिक मुलाकात

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भारत-वानुअतु संबंध मजबूत: एमओएस मार्गेरिटा ने पीएम जोथम नापत से की ऐतिहासिक मुलाकात

सारांश

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने वानुअतु के पहले आधिकारिक दौरे पर पीएम जोथम नापत और कार्यवाहक विदेश मंत्री हैरी से मुलाकात की। स्वास्थ्य, डिजिटल कौशल और जलवायु बुनियादी ढांचे में सहयोग पर चर्चा हुई। भारत की प्रशांत कूटनीति को नई दिशा मिली।

Key Takeaways

  • केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने 23 अप्रैल 2025 को वानुअतु का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया।
  • पोर्ट विला में वानुअतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत से मुलाकात में द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
  • कार्यवाहक विदेश मंत्री जेवियर इमैनुएल हैरी से अलग बैठक में स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे पर सहयोग पर सहमति बनी।
  • भारत के सहयोग से स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का दौरा कर एमओएस ने इसे भारत-वानुअतु मित्रता का प्रतीक बताया।
  • यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंध मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
  • दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता जताई।

पोर्ट विला, 23 अप्रैल। भारत-वानुअतु द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री (एमओएस) पबित्रा मार्गेरिटा ने गुरुवार को पोर्ट विला में वानुअतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक में स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आपसी साझेदारी को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह एमओएस मार्गेरिटा का वानुअतु का पहला आधिकारिक दौरा है, जो भारत की प्रशांत द्वीप देशों के साथ गहरी होती कूटनीतिक संलग्नता का प्रतीक है।

पीएम जोथम नापत से बैठक: साझा प्रतिबद्धता का संकल्प

एमओएस मार्गेरिटा और वानुअतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के नागरिकों की भलाई और समग्र विकास के प्रति साझा संकल्प को दोहराया गया। बैठक के बाद एमओएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वानुअतु के प्रधानमंत्री से मिलकर सम्मानित महसूस हुआ और प्रमुख क्षेत्रों में भारत-वानुअतु सहयोग को सुदृढ़ करने पर गर्मजोशी भरी और परिणामोन्मुखी बातचीत हुई।

दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी और नेबरहुड फर्स्ट नीति के विस्तार के तहत प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।

एक्टिंग विदेश मंत्री हैरी से भी हुई द्विपक्षीय वार्ता

इसी दिन एमओएस मार्गेरिटा ने वानुअतु के कार्यवाहक विदेश मामले, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बाह्य व्यापार मंत्री जेवियर इमैनुएल हैरी से भी अलग से मुलाकात की। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर विचार-विमर्श हुआ।

एमओएस ने कहा कि भारत और वानुअतु आपसी विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित एक सुदृढ़ साझेदारी साझा करते हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे में द्विपक्षीय विकास सहयोग को आगे बढ़ाने पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि वानुअतु की विकास यात्रा में भारत एक समर्पित और विश्वसनीय भागीदार बना हुआ है।

आईटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: डिजिटल सशक्तिकरण की मिसाल

बुधवार को अपने दौरे के पहले दिन एमओएस मार्गेरिटा ने वानुअतु में भारत के सहयोग से स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का दौरा किया। यह संस्थान वानुअतु के युवाओं में डिजिटल कौशल विकसित करने और स्थानीय तकनीकी क्षमता को बढ़ाने के लिए समर्पित है।

एमओएस ने कहा कि यह संस्थान भारत-वानुअतु मित्रता का एक सशक्त स्तंभ है और बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों का जीवंत प्रमाण है। भारत की डिजिटल इंडिया पहल की विशेषज्ञता को इस तरह के संस्थानों के माध्यम से प्रशांत देशों तक पहुंचाना भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का एक महत्वपूर्ण आयाम बनता जा रहा है।

भारत की प्रशांत कूटनीति: रणनीतिक महत्व और व्यापक संदर्भ

यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है — इसका रणनीतिक महत्व भी है। वानुअतु सहित प्रशांत द्वीपीय देश वैश्विक मंचों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र में महत्वपूर्ण मतदाता हैं। भारत इन देशों के साथ संबंध मजबूत करके न केवल अपनी कूटनीतिक पहुंच बढ़ा रहा है, बल्कि प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते बाहरी प्रभाव को भी संतुलित करने की दिशा में काम कर रहा है।

गौरतलब है कि 2023 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने वानुअतु को मानवीय सहायता प्रदान की थी, जिसने दोनों देशों के बीच विश्वास की नींव को और मजबूत किया। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी भारत और वानुअतु के हित काफी हद तक एकसमान हैं। आने वाले समय में इस दौरे के दौरान हुई चर्चाओं के आधार पर ठोस समझौतों और परियोजनाओं की घोषणा की उम्मीद है।

Point of View

बल्कि भारत की उस सुविचारित रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह प्रशांत क्षेत्र में बाहरी प्रभाव को शांत लेकिन प्रभावशाली तरीके से संतुलित कर रहा है। आईटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी परियोजनाएं भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का वह आयाम हैं जो कर्ज की बजाय क्षमता निर्माण पर जोर देता है। जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर वानुअतु जैसे देशों का समर्थन भारत को वैश्विक मंचों पर भी मजबूती देता है। मुख्यधारा की कवरेज इस दौरे को केवल बैठकों तक सीमित देख रही है, लेकिन असली कहानी यह है कि भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनने के अपने दावे को जमीन पर साबित कर रहा है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

एमओएस पबित्रा मार्गेरिटा वानुअतु दौरे पर क्यों गए?
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा वानुअतु के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत-वानुअतु द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से गए। इस दौरे में स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे और डिजिटल कौशल विकास में सहयोग पर चर्चा हुई।
एमओएस मार्गेरिटा ने वानुअतु में किन नेताओं से मुलाकात की?
एमओएस मार्गेरिटा ने वानुअतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत और कार्यवाहक विदेश मंत्री जेवियर इमैनुएल हैरी से अलग-अलग बैठकें कीं। दोनों बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
वानुअतु में भारत द्वारा स्थापित आईटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्या है?
वानुअतु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत के सहयोग से स्थापित एक विशेष संस्थान है जो वानुअतु के युवाओं में डिजिटल कौशल विकसित करने के लिए काम करता है। यह संस्थान भारत-वानुअतु मित्रता का प्रतीक माना जाता है।
भारत और वानुअतु के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी?
दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे, डिजिटल कौशल और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत ने वानुअतु की विकास यात्रा में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत की प्रशांत द्वीप देशों के साथ कूटनीति क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रशांत द्वीपीय देश संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत के सहयोगी हो सकते हैं। यह कूटनीति भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की व्यापक रणनीति का भी अहम हिस्सा है।
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