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चीन की निगरानी तकनीक से यूक्रेन की सुरक्षा खतरे में, 80-90% कैमरों तक पहुंच संभव

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चीन की निगरानी तकनीक से यूक्रेन की सुरक्षा खतरे में, 80-90% कैमरों तक पहुंच संभव

सारांश

यूक्रेन में लगे 80-90% निगरानी कैमरे चीनी तकनीक पर आधारित हैं और हिकविजन का बैकडोर एक्सेस युद्धकाल में ड्रोन हैकिंग समेत बड़े सुरक्षा संकट को जन्म दे सकता है। अमेरिका और ब्रिटेन पहले ही इन उपकरणों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

मुख्य बातें

चीन यूक्रेन के 80-90% निगरानी कैमरों तक संभावित पहुंच रख सकता है, जिसमें टोही ड्रोन कैमरे भी शामिल हैं।
चीनी कंपनी हिकविजन ने 2020 तक कीव में 7,000 से अधिक स्मार्ट सर्विलांस कैमरे स्थापित किए।
अमेरिका में FCC और ब्रिटेन दोनों ने हिकविजन व दाहुआ उपकरणों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया है।
खतरा केवल कैमरों तक नहीं — मोबाइल बेस स्टेशन बैटरियां , स्मार्टफोन और ऊर्जा उपकरण भी चीनी तकनीक पर निर्भर हैं।
रूस पहले भी यूक्रेनी ड्रोन का नियंत्रण अपने हाथों में लेने में सफल रहा है, जिससे ड्रोन हैकिंग का खतरा और गंभीर हो जाता है।
यूक्रेन की तकनीकी संरचना पर चीन (हार्डवेयर) और अमेरिका (सॉफ्टवेयर/क्लाउड) दोनों का समानांतर वर्चस्व है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में सामने आया है कि चीन, यूक्रेन में स्थापित 80 से 90 प्रतिशत निगरानी कैमरों तक संभावित पहुंच रखता है — और इनमें युद्धक्षेत्र में तैनात टोही ड्रोन पर लगे कैमरे भी शामिल हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब रूस-यूक्रेन युद्ध अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और तकनीकी जासूसी एक नए मोर्चे के रूप में उभर रही है।

हिकविजन का खतरनाक नेटवर्क

ऑक्टावा कैपिटल के संस्थापक ओलेक्सांद्र कार्डाकोव के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी कंपनी हिकविजन ने 2020 तक कीव स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अकेले राजधानी में 7,000 से अधिक कैमरे स्थापित किए थे। ये कैमरे महज सड़कों की निगरानी नहीं करते — ये नंबर प्लेट पहचान, चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) और स्कूलों व किंडरगार्टन की सुरक्षा निगरानी जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य भी करते हैं।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि हिकविजन पूरे यूक्रेन में सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला वीडियो सर्विलांस सिस्टम है। यदि चीन के पास इन प्रणालियों में बैकडोर एक्सेस है, तो वह केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि पूरे देश की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

ड्रोन हैकिंग और रूस का पूर्व अनुभव

यूक्रेनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पहले भी ऐसे मामले दर्ज हो चुके हैं जब रूस ने यूक्रेनी ड्रोन का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था। यदि चीनी कैमरा तकनीक में बैकडोर मौजूद है, तो यह खतरा और भी व्यापक हो सकता है — दुश्मन देश न केवल ड्रोन की फुटेज देख सकता है, बल्कि उन्हें इंटरसेप्ट या हाईजैक भी कर सकता है।

यह विरोधाभास उल्लेखनीय है कि यूक्रेन एक ओर पश्चिमी देशों से हथियार और सैन्य सहायता ले रहा है, वहीं दूसरी ओर उसका पूरा निगरानी ढांचा चीनी तकनीक पर टिका है — और चीन रूस का करीबी साझेदार है।

अमेरिका और ब्रिटेन पहले ही जता चुके हैं चिंता

अमेरिका में हिकविजन और दाहुआ के उपकरणों को फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) की प्रतिबंधित सूची में डाला जा चुका है और इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया गया है। ब्रिटेन ने भी संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों पर चीनी निगरानी प्रणाली लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद यूक्रेन में इन उपकरणों की भारी मौजूदगी चिंताजनक है।

मोबाइल नेटवर्क और ऊर्जा उपकरणों का खतरा

खतरा केवल कैमरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क बेस स्टेशनों में लगी चीनी बैटरियों में प्रायः रिमोट कंट्रोल की क्षमता होती है। इसके अतिरिक्त, यूक्रेन में उपयोग होने वाले अधिकांश स्मार्टफोन भी चीन निर्मित हैं।

बिजली संकट के दौरान घरों को ऊर्जा देने वाली कंपनियां — इकोफ्लो, ब्लूएटी और डेये — भी चीनी मूल की हैं और यूक्रेन में अत्यंत लोकप्रिय हैं। यानी युद्धग्रस्त देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी चीनी तकनीक पर निर्भर है।

अमेरिका का तकनीकी वर्चस्व और व्यापक परिप्रेक्ष्य

रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि चीन के अलावा अमेरिका का यूक्रेन की तकनीकी संरचना पर सबसे गहरा प्रभाव है। वीजा, मास्टरकार्ड जैसे भुगतान प्रणाली और AWS, माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर, गूगल जैसी क्लाउड सेवाएं अमेरिकी नियंत्रण में हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी ओपनएआई (ChatGPT), एंथ्रोपिक (Claude) और Gemini जैसे अमेरिकी प्लेटफॉर्म का दबदबा है।

यह स्थिति दर्शाती है कि यूक्रेन तकनीकी रूप से दो महाशक्तियों — एक मित्र (अमेरिका) और एक संदिग्ध (चीन) — पर एक साथ निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन को अपनी साइबर संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी विविधीकरण की नीति अपनानी होगी। आने वाले महीनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या यूक्रेन सरकार चीनी निगरानी उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का कोई ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसकी आंखें — यानी निगरानी तंत्र — चीनी तकनीक की हैं, और चीन रूस का रणनीतिक साझेदार है। भारत को भी यह सबक लेना चाहिए: 'मेड इन चाइना' तकनीक पर निर्भरता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामरिक खतरा भी है। जो देश अपनी तकनीकी संप्रभुता नहीं बचा सकता, वह युद्ध के मैदान में भी कमजोर पड़ सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन यूक्रेन के कितने निगरानी कैमरों तक पहुंच बना सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार चीन यूक्रेन में लगे 80 से 90 प्रतिशत निगरानी कैमरों तक संभावित पहुंच रख सकता है। इनमें युद्धक्षेत्र में तैनात टोही ड्रोन पर लगे कैमरे भी शामिल हैं।
हिकविजन कंपनी यूक्रेन में क्या करती है?
हिकविजन एक चीनी कंपनी है जो यूक्रेन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला वीडियो सर्विलांस सिस्टम उपलब्ध कराती है। इसने 2020 तक कीव स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 7,000 से अधिक कैमरे लगाए थे जो चेहरा और नंबर प्लेट पहचानने में सक्षम हैं।
क्या अमेरिका ने हिकविजन पर प्रतिबंध लगाया है?
हां, अमेरिका में फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने हिकविजन और दाहुआ के उपकरणों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करते हुए प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है। ब्रिटेन ने भी संवेदनशील स्थानों पर इन उपकरणों के उपयोग पर रोक लगाई है।
यूक्रेन में चीनी तकनीक से ड्रोन हैकिंग का खतरा क्यों है?
यदि चीनी निगरानी उपकरणों में बैकडोर एक्सेस मौजूद है, तो दुश्मन देश ड्रोन की लाइव फुटेज देख सकता है और उन्हें इंटरसेप्ट या हाईजैक कर सकता है। पहले भी रूस द्वारा यूक्रेनी ड्रोन का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के मामले सामने आ चुके हैं।
यूक्रेन की तकनीक पर किन देशों का सबसे ज्यादा प्रभाव है?
रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन की तकनीकी संरचना पर सबसे अधिक प्रभाव चीन और अमेरिका का है। चीन निगरानी कैमरों, मोबाइल नेटवर्क और ऊर्जा उपकरणों में हावी है, जबकि अमेरिका भुगतान प्रणाली, क्लाउड सेवाओं और एआई प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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