पश्चिम एशिया युद्ध इंसानियत पर कलंक, कोई विजेता नहीं : दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त अनिल सूकलाल
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने 23 अप्रैल 2026 को राष्ट्र प्रेस को दिए साक्षात्कार में पश्चिम एशिया युद्ध को इंसानियत पर कलंक बताया।
- PM नरेंद्र मोदी के 'अभी युद्ध का समय नहीं' के संदेश को दक्षिण अफ्रीका ने अपना पूर्ण समर्थन दिया।
- पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की गति बाधित हो रही है।
- ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका को जी20 शिखर सम्मेलन की गतिविधियों से बाहर रखा, जिसे राजदूत ने 'जी20 को हथियार बनाना' करार दिया।
- दक्षिण अफ्रीका ने 1996 में अपना संविधान बनाते समय भारतीय संविधान से प्रेरणा ली थी — संविधान दिवस की 30वीं वर्षगांठ पर यह जानकारी साझा की गई।
- ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ मिलकर एक नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने पश्चिम एशिया संघर्ष को मानवता के लिए एक गंभीर अभिशाप करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि युद्धरत पक्षों के बीच संवाद जारी रखा जाए और इंसानियत की भलाई के लिए स्थायी शांति की राह तलाशी जाए। राष्ट्र प्रेस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने यह बात कही।
जंग का वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर असर
उच्चायुक्त सूकलाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का पूरी दुनिया पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष की वजह से वैश्विक आर्थिक विकास अवरुद्ध हो रहा है और रोजगार व विकास के अवसर सिकुड़ रहे हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि अभी युद्ध का समय नहीं है। सूकलाल ने कहा, "अगर जंग जारी रही तो इसका हम सभी पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। यह जंग इंसानियत पर एक दाग है। जंग में कोई नहीं जीतता — हम सब हारे हैं, सिर्फ युद्धरत पक्ष ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता।"
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा तो नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक निवेश भी धीमा पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर उम्मीद
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ाया है, हालांकि समुद्री नाकेबंदी पूरी तरह बरकरार है। व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि बातचीत के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा।
इस संदर्भ में राजदूत सूकलाल ने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता सकारात्मक परिणाम दे सकती है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा, "बातचीत से ही मतभेद सुलझते हैं और स्थायी शांति मिलती है। हमें सभी पक्षों को संवाद में बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।"
नवीकरणीय ऊर्जा पर युद्ध का प्रतिकूल प्रभाव
जब यह पूछा गया कि क्या पश्चिम एशिया संघर्ष नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की गति को धीमा कर रहा है, तो सूकलाल ने सीधे जवाब दिया — "बिल्कुल, यह रिन्यूएबल एनर्जी और हर प्रकार के ऊर्जा सहयोग को बाधित कर रहा है।" यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन यह युद्ध उस गति को थाम रहा है।
यह विरोधाभास उजागर करना जरूरी है कि एक तरफ दुनिया COP जलवायु सम्मेलनों में नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य तय करती है, दूसरी तरफ भू-राजनीतिक संघर्ष उन्हीं लक्ष्यों को पटरी से उतार देते हैं।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की भूमिका
उच्चायुक्त सूकलाल ने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय (मल्टीपोलर) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते कि हमारी सामूहिक दुनिया का भविष्य एक या दो महाशक्तियां तय करें। वैश्विक शक्ति का वितरण पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में होना चाहिए।"
उन्होंने भारत को ग्लोबल साउथ का अग्रणी देश बताते हुए कहा कि ब्रिक्स देश मिलकर एक नई बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स का विस्तार हो रहा है और कई नए देश इसमें शामिल हो रहे हैं, जो पश्चिमी प्रभुत्व वाली व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
जी20 में दक्षिण अफ्रीका को बाहर रखने पर कड़ी आपत्ति
सूकलाल ने अमेरिका द्वारा दक्षिण अफ्रीका को जी20 शिखर सम्मेलन से बाहर रखने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "जी20 को भी हथियार बना दिया गया है। दक्षिण अफ्रीका जी20 का पूर्ण सदस्य है और उसने हर शिखर सम्मेलन में भाग लिया है, जिसमें वह सम्मेलन भी शामिल है जिसे हमने पिछले साल सफलतापूर्वक आयोजित किया था।"
उन्होंने भरोसा दिलाया कि दक्षिण अफ्रीका अगले साल जी20 टेबल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जी20 एक सामूहिक गठबंधन के रूप में काम करे।
भारतीय संविधान से प्रेरणा और लोकतंत्र की विरासत
दक्षिण अफ्रीका के संविधान दिवस की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर सूकलाल ने बताया कि 1996 में अपना नया संविधान बनाते समय दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय संविधान से प्रेरणा ली थी। उन्होंने कहा, "हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि नस्लवाद और रंगभेद की तबाही दक्षिण अफ्रीकी समाज में दोबारा कभी न उभरे।"
उन्होंने भारत को दुनिया के सबसे जीवंत और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में सराहा और कहा कि दक्षिण अफ्रीका को भारत जैसे देश के साथ अपने संबंधों पर गर्व है। यह बयान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को रेखांकित करता है।
आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और जी20 में भागीदारी को लेकर वैश्विक राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। ग्लोबल साउथ के देशों की एकजुटता और ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका आने वाले वर्षों में विश्व व्यवस्था को नई शक्ल देगी।