पश्चिम बंगाल चुनाव: दूसरे चरण से पहले 12 घंटों में 809 गिरफ्तारियाँ, 36 घंटों में कुल 1,583 हिरासत में
सारांश
Key Takeaways
- ECI के अनुसार 28 अप्रैल 2026 को सोमवार रात से मंगलवार दोपहर तक 12 घंटों में 809 एहतियाती गिरफ्तारियाँ की गईं।
- 36 घंटों में कुल गिरफ्तारियों का आँकड़ा 1,583 और 24 घंटों में 1,095 रहा।
- चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा पर फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में TMC उम्मीदवार के परिजनों को कथित धमकी देने का आरोप; डायमंड हार्बर में मामला दर्ज।
- कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने मतदान तक चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार किया।
- 29 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान निर्धारित।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले सोमवार रात से मंगलवार दोपहर तक महज 12 घंटों में 809 अतिरिक्त एहतियाती गिरफ्तारियाँ की गई हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, रविवार शाम से 24 घंटों में यह आँकड़ा 1,095 और 36 घंटों में 1,583 तक पहुँच गया।
मुख्य घटनाक्रम
चुनाव आयोग ने इस बार राज्यभर में संभावित उपद्रवियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लेने पर विशेष जोर दिया है, ताकि वे विधानसभा चुनाव के किसी भी चरण में मतदान प्रक्रिया को बाधित न कर सकें। हालाँकि, आयोग ने मंगलवार को 809 नई गिरफ्तारियों का जिलावार ब्यौरा नहीं दिया, जबकि सोमवार को 1,583 व्यक्तियों की गिरफ्तारी का विस्तृत विवरण जारी किया गया था।
पुलिस पर्यवेक्षक विवाद
इस बीच, चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा एक विवाद के केंद्र में आ गए। सोमवार को सामने आए एक वीडियो में उन्हें दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर स्थित फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहाँगीर खान के परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धमकी देते हुए देखा गया। मंगलवार को दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में उनके खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज किया गया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख
कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने सोमवार को अजय पाल शर्मा के खिलाफ दायर याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। मामले की पैरवी कर रहे वकील ने शर्मा को रोकने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन मामला दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण मंगलवार को पूर्ण सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने तक वे राज्य चुनाव प्रक्रिया के प्रभारी किसी भी व्यक्ति के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेंगी।
आम मतदाताओं पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की आशंका हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। गौरतलब है कि एहतियाती गिरफ्तारियों की यह संख्या राज्य में पिछले कई विधानसभा चुनावों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक बताई जा रही है। चुनाव आयोग का यह कदम निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की कोशिश को दर्शाता है, लेकिन इन गिरफ्तारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आगे क्या होगा
29 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान निर्धारित है। अजय पाल शर्मा के खिलाफ दर्ज मामले की अगली सुनवाई मतदान के बाद होने की संभावना है। चुनाव आयोग की कार्रवाई और उसके परिणाम इस चुनाव की विश्वसनीयता की असली कसौटी बनेंगे।