बेंगलुरु में जनगणना अधिकारियों से दुर्व्यवहार, महिला कर्मचारी को अपशब्द — FIR दर्ज
सारांश
Key Takeaways
- 20 अप्रैल को जनगणना अधिकारी वीना को पेरी मोनार्क अपार्टमेंट, आरटी नगर में जानकारी देने से मना किया गया।
- 25 अप्रैल को पर्यवेक्षक रश्मी आर. के साथ दुर्व्यवहार और अपशब्द का प्रयोग किया गया।
- प्रभार अधिकारी डॉ. लोकेश ने जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11(1) और BNS की धारा 223 व 79 के तहत FIR दर्ज कराई।
- आयुक्त पोम्माला सुनील कुमार ने दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
- राष्ट्रीय जनगणना-2027 कोविड के कारण स्थगित 2021 जनगणना का विकल्प है और यह सरकारी योजनाओं का आधार है।
- जनगणना में सहयोग न करना प्रत्येक नागरिक के कानूनी दायित्व का उल्लंघन है।
बेंगलुरु, 25 अप्रैल — कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राष्ट्रीय जनगणना-2027 के कार्य में लगी महिला अधिकारियों के साथ आरटी नगर स्थित एक अपार्टमेंट में बाधा डालने और अभद्र भाषा में गाली देने की गंभीर घटना सामने आई है। शिकायत के आधार पर संबंधित निवासी के विरुद्ध जनगणना अधिनियम, 1948 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
मुख्य घटनाक्रम
20 अप्रैल को बेंगलुरु उत्तर नगर निगम के वार्ड संख्या 43 में तैनात जनगणना अधिकारी वीना जनगणना संबंधी जानकारी एकत्र करने के उद्देश्य से सुल्तानपाल्या मुख्य सड़क के निकट स्थित पेरी मोनार्क अपार्टमेंट पहुंचीं। हालांकि, संबंधित निवासी ने आवश्यक सूचना देने से साफ इनकार कर दिया।
इसके बाद 25 अप्रैल को सत्यापन के दौरान सर्किल-2 की पर्यवेक्षक रश्मी आर. स्वयं उस स्थान पर पहुंचीं और जनगणना से जुड़ी जानकारी मांगी। निवासी ने न केवल सहयोग करने से मना किया, बल्कि जनगणना कार्य में बाधा डाली और महिला अधिकारी को अपशब्द कहे।
कानूनी कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद जनगणना प्रभार अधिकारी डॉ. लोकेश ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 और 79 के अंतर्गत मामला दर्ज कराया है।
जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11(1) के तहत जनगणना अधिकारी के कार्य में बाधा डालना दंडनीय अपराध है। BNS की धारा 223 लोक सेवक के कार्य में बाधा और धारा 79 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित है।
आयुक्त की चेतावनी और अपील
बेंगलुरु उत्तर नगर निगम के आयुक्त पोम्माला सुनील कुमार ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मियों के साथ पूर्ण सहयोग करें और सटीक जानकारी प्रदान करें, क्योंकि यह प्रत्येक भारतीय नागरिक का कानूनी दायित्व है।
जनगणना का महत्व और व्यापक संदर्भ
राष्ट्रीय जनगणना-2027 भारत की वह महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी। यह जनगणना देश की जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, आवास और बुनियादी सुविधाओं के आंकड़े एकत्र करती है जो सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का आधार बनते हैं।
गौरतलब है कि जनगणना में बाधा डालना केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि यह करोड़ों नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं और संसाधनों की सटीक योजना को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधूरे या गलत जनगणना आंकड़े हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों में जनगणना अधिकारियों — विशेषकर महिला कर्मचारियों — के साथ असहयोग और दुर्व्यवहार की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं, जो जन-जागरूकता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
आगे क्या होगा
दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस अब आरोपी निवासी से पूछताछ करेगी। यदि अभियोजन सफल रहा तो संबंधित व्यक्ति को जनगणना अधिनियम और BNS के तहत जुर्माने एवं कारावास दोनों का सामना करना पड़ सकता है। बेंगलुरु उत्तर नगर निगम ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि जनगणना प्रक्रिया निर्बाध रूप से पूरी हो सके।