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क्या भारत दुनिया के सबसे कनेक्टेड समाजों में से एक बन गया है?: डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी

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क्या भारत दुनिया के सबसे कनेक्टेड समाजों में से एक बन गया है?: डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी

सारांश

क्या भारत सच में दुनिया के सबसे कनेक्टेड समाजों में से एक बन गया है? केंद्रीय मंत्री डॉ. चंद्र शेखर ने इस सम्मेलन में भारत की डिजिटल प्रगति का उल्लेख करते हुए वैश्विक सहयोग का आश्वासन दिया। जानें भारत की डिजिटल पहचान के बारे में क्या कहा गया!

मुख्य बातें

भारत की डिजिटल पहचान में 1.2 अरब दूरसंचार ग्राहक शामिल हैं।
4जी और 5जी के लिए भारत ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।
भारत में सबसे कम डेटा शुल्क और सबसे अधिक डेटा खपत है।
डिजिटल बुनियादी ढांचे से 46 प्रतिशत वैश्विक डिजिटल लेनदेन सक्षम हैं।
भारत विकासशील देशों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

नई दिल्ली, 18 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने मंगलवार को बाकू में विश्व दूरसंचार विकास सम्मेलन (डब्ल्यूटीडीसी-25) के उच्चस्तरीय समूह को सम्बोधित करते हुए भारत के सुरक्षित और समावेशी वैश्विक डिजिटल भविष्य की दिशा में दृष्टिकोण का परिचय दिया।

उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के साथ भारत की दीर्घकालिक साझेदारी की भी पुष्टि की।

डॉ. चंद्र शेखर ने बताया कि भारत अब दुनिया के सबसे अधिक कनेक्टेड समाजों में से एक बनकर उभरा है, जिसमें 1.2 अरब दूरसंचार ग्राहक, 1 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता और 1.4 अरब डिजिटल पहचान शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने 4.8 अरब डॉलर की लागत से 4जी की पहुंच दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ाई और 5जी की सबसे तेजी से शुरुआत की, जिससे 99 प्रतिशत जिलों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई।

डिजिटल बुनियादी ढांचे के संदर्भ में, भारत ने सबसे कम डेटा शुल्क, सबसे अधिक डेटा खपत और 46 प्रतिशत वैश्विक डिजिटल लेनदेन को सक्षम बनाकर यह साबित किया है कि पहुंच, सामर्थ्य और पैमाने को एक साथ बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय नवाचार, जैसे डिजिटल पहचान, भुगतान, और गवर्नेंस, अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिए सहयोग प्रदान कर रहे हैं। यह सहयोग व्यावसायिक हितों से नहीं, बल्कि डिजिटल क्षमताओं के साझा करने के विश्वास से प्रेरित है। भारत ने स्पेक्ट्रम प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन में हजारों पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है और विकासशील देशों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की लगातार वकालत की है।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने 2027-2030 के कार्यकाल के लिए आईटीयू परिषद में भारत की उम्मीदवारी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को प्राथमिकता देना जारी रखेगा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा क्षमता निर्माण जैसे व्यावहारिक समाधानों का समर्थन करेगा।

उन्होंने रेडियो संचार ब्यूरो के निदेशक पद के लिए भारत के नामांकन की भी घोषणा की, जिससे भविष्य-तैयार स्पेक्ट्रम प्रशासन को बढ़ावा देने का भारत का संकल्प स्पष्ट हुआ।

समापन भाषण में, डॉ. चंद्र शेखर ने कहा कि भारत सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि कनेक्टिविटी का लाभ दुनिया के प्रत्येक नागरिक तक पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसा कदम है जो विकासशील देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। इस दिशा में निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है ताकि हर नागरिक तक कनेक्टिविटी का लाभ पहुंच सके।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के डिजिटल विकास में कौन-कौन से पहल शामिल हैं?
भारत ने 4जी और 5जी के विस्तार, डिजिटल पहचान और भुगतान प्रणालियों में नवाचार, और विकासशील देशों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे पहल किए हैं।
भारत की आईटीयू परिषद में उम्मीदवारी का क्या महत्व है?
भारत की आईटीयू परिषद में उम्मीदवारी विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर डिजिटल सहयोग को मजबूत करने में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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