6 अगस्त 2026
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भारत में 'सेल ब्रॉडकास्ट' सेवा लॉन्च: C-DOT और NDMA की स्वदेशी तकनीक से मोबाइल आपदा अलर्ट प्रणाली शुरू

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भारत में 'सेल ब्रॉडकास्ट' सेवा लॉन्च: C-DOT और NDMA की स्वदेशी तकनीक से मोबाइल आपदा अलर्ट प्रणाली शुरू

सारांश

भारत ने स्वदेशी तकनीक से 'सेल ब्रॉडकास्ट' आपदा अलर्ट प्रणाली लॉन्च की — जापान और अमेरिका जैसे देशों के नक्शेकदम पर। C-DOT और NDMA की साझेदारी से विकसित यह सिस्टम मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए लाखों लोगों तक तत्काल आपदा सूचना पहुँचाने में सक्षम है, और इसे डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

मुख्य बातें

भारत ने 2 मई 2026 को C-DOT और NDMA द्वारा विकसित स्वदेशी 'सेलुलर ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम' लॉन्च किया।
मुंबई और वडोदरा सहित कई शहरों में टेस्ट अलर्ट सफलतापूर्वक जारी किए गए।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने इसे विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अहम कदम बताया; कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इसका स्वागत किया।
साइबर विशेषज्ञ अंकुर पुराणिक ने थर्ड-पार्टी ऐप्स से नकली अलर्ट की सीमित संभावना पर चेतावनी दी।
यह प्रणाली दूरसंचार विभाग (DoT) और मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के सहयोग से काम करती है।

भारत ने 2 मई 2026 को स्वदेशी तकनीक के ज़रिए 'सेलुलर ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम' (Cell Broadcast Alert System) की शुरुआत कर देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली की नींव रखी। इस पहल के तहत मुंबई, वडोदरा समेत कई शहरों में टेस्ट अलर्ट जारी किए गए, जिससे आपात स्थितियों में नागरिकों तक तत्काल सूचना पहुँचाने की क्षमता को परखा गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने इसे भारत के विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

प्रणाली कैसे काम करती है

साइबर विशेषज्ञ अंकुर पुराणिक के अनुसार, इस प्रणाली को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग से विकसित किया है। यह सिस्टम मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के नेटवर्क के माध्यम से काम करता है, जिससे किसी भी क्षेत्र के सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक एक साथ और तेज़ी से अलर्ट पहुँचाया जा सकता है।

पुराणिक ने बताया कि यह तकनीक पहले से जापान, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में उपयोग में है। भारत का यह संस्करण पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, जो इसे 'डिजिटल इंडिया' अभियान की एक उल्लेखनीय उपलब्धि बनाता है।

नेताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

दिनेश शर्मा ने कहा कि पहले लोगों को सतर्क करने के लिए सायरन जैसी पारंपरिक प्रणालियों का सहारा लिया जाता था, लेकिन अब मोबाइल-आधारित अलर्ट सिस्टम ने इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज़ बना दिया है। उन्होंने इसे डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि करार दिया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के सांसद तारिक अनवर ने भी इस पहल का स्वागत किया और इसे एक सकारात्मक विकास बताया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक से विकसित यह प्रणाली देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है और आपदा के समय बेहतर संचार सुनिश्चित करेगी। कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने भी इसे एक अच्छी पहल बताते हुए कहा कि इससे लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सकेगा।

साइबर विशेषज्ञ मयूर भुसावलकर ने कहा कि भूकंप या सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसी विशेष क्षेत्र के नागरिकों को तुरंत सूचना देने में यह प्रणाली बेहद कारगर साबित होगी।

सुरक्षा संबंधी चिंताएँ

अंकुर पुराणिक ने यह भी स्वीकार किया कि तकनीकी रूप से कुछ सीमित मामलों में नकली अलर्ट की नकल संभव हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि थर्ड-पार्टी ऐप्स के ज़रिए नकली अलर्ट संदेश बनाए जा सकते हैं, हालाँकि यह मुख्य प्रणाली से अलग मुद्दा है और इससे निपटने के लिए अलग सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।

आम जनता पर असर और आगे की राह

मुंबई और वडोदरा में टेस्ट अलर्ट मिलने के बाद नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ सोशल मीडिया पर साझा कीं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी आपदा-तैयारी के बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने पर ज़ोर दे रहा है। गौरतलब है कि इस तरह की प्रणाली का अभाव पहले कई आपदाओं में समय पर सूचना न मिल पाने का कारण रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली के पूर्ण परिचालन में आने के बाद आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब कोई वास्तविक आपदा आएगी — न कि नियंत्रित टेस्ट अलर्ट के दौरान। जापान और अमेरिका में यह तकनीक दशकों से परिपक्व हो चुकी है, जबकि भारत अभी इसके प्रारंभिक चरण में है। नकली अलर्ट की संभावना और थर्ड-पार्टी ऐप्स के दुरुपयोग का जो ज़िक्र विशेषज्ञों ने किया, वह मुख्यधारा की कवरेज में दब गया — जबकि यह जन-विश्वास के लिए सबसे संवेदनशील बिंदु है। बिना मज़बूत साइबर सुरक्षा ढाँचे और सार्वजनिक जागरूकता अभियान के, यह प्रणाली उतनी प्रभावी नहीं होगी जितनी इसकी क्षमता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में 'सेल ब्रॉडकास्ट' सेवा क्या है?
यह एक मोबाइल-आधारित आपदा अलर्ट प्रणाली है जो मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के ज़रिए किसी विशेष क्षेत्र के सभी उपयोगकर्ताओं को एक साथ आपात सूचना भेजती है। इसे C-DOT ने NDMA और दूरसंचार विभाग के सहयोग से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है।
सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को किसने विकसित किया?
इस प्रणाली को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग से विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
टेस्ट अलर्ट किन शहरों में जारी किए गए?
2 मई 2026 को मुंबई और वडोदरा सहित कई शहरों में टेस्ट अलर्ट जारी किए गए। इन अलर्ट का उद्देश्य आपात स्थितियों में प्रणाली की क्षमता को परखना था।
क्या सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट से नकली संदेश का खतरा है?
साइबर विशेषज्ञ अंकुर पुराणिक के अनुसार, मुख्य प्रणाली में नकली अलर्ट की संभावना सीमित है, लेकिन थर्ड-पार्टी ऐप्स के ज़रिए नकली अलर्ट संदेश बनाए जा सकते हैं। इससे निपटने के लिए अलग सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
यह प्रणाली आम नागरिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भूकंप, सुनामी या बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान यह प्रणाली किसी विशेष क्षेत्र के नागरिकों को बिना इंटरनेट के भी मोबाइल फोन पर तत्काल सूचना दे सकती है। इससे पारंपरिक सायरन-आधारित प्रणाली की तुलना में सूचना अधिक तेज़ और व्यापक रूप से पहुँचती है।
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