असम विपक्ष नेता देबब्रत सैकिया बोले — एग्जिट पोल अक्सर असली जनादेश नहीं दर्शाते
सारांश
Key Takeaways
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने शनिवार, 2 मई को गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए विधानसभा चुनाव परिणामों का अनुमान लगाने वाले एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर गहरा संदेह जताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे अनुमान अक्सर मतदाताओं के अंतिम जनादेश को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने में विफल रहते हैं। नाजिरा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे सैकिया ने यह भी दावा किया कि इस बार असम का राजनीतिक माहौल पहले से बिल्कुल अलग है।
पिछले चुनावों का हवाला
सैकिया ने अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने याद दिलाया कि उस चुनाव में अनेक सर्वेक्षण एजेंसियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निर्णायक जीत का अनुमान लगाया था, किंतु मतगणना के बाद परिणाम पूरी तरह भिन्न निकले। उनके अनुसार, ऐसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि चुनाव-पश्चात सर्वेक्षण हमेशा मतदाताओं की वास्तविक मनोदशा का सटीक आकलन नहीं कर पाते।
असम का बदला राजनीतिक माहौल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस बार असम में मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने मतदान के दौरान अपनी पसंद को लेकर संशय बनाए रखा। उनके अनुसार, इसी कारण सर्वेक्षण एजेंसियों के लिए जनभावना का सटीक आकलन करना कठिन हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मतदाता स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं की संभावित प्रतिक्रिया के भय से अपनी पसंद सार्वजनिक रूप से बताने में हिचकिचा रहे थे।
साइलेंट वोटर्स की भूमिका
सैकिया ने कहा कि मतदाताओं की यह 'चुप्पी' राज्य में राजनीतिक परिवर्तन के पक्ष में एक अंतर्मुखी भावना का संकेत हो सकती है। उनके मुताबिक, मौजूदा प्रशासन से असंतुष्ट लोगों ने अपना फैसला सार्वजनिक चर्चा में उजागर करने के बजाय निजी रखना बेहतर समझा। उन्होंने कहा कि अंतिम परिणाम काफी हद तक इन्हीं 'साइलेंट वोटर्स' की भूमिका पर निर्भर करेगा।
सत्ता विरोधी लहर का दावा
सैकिया ने आगे दावा किया कि कथित कुप्रशासन, जन असंतोष और सत्ता विरोधी भावना जैसे मुद्दे मतगणना के दिन सत्ताधारी पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस की जीत की संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि इसीलिए अंतिम परिणाम एग्जिट पोल के अनुमानों से काफी अलग हो सकता है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम विधानसभा चुनाव की मतगणना नज़दीक है और राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है।