भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी का ऐलान, नए सहयोग अवसरों की खोज
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्रालय की विशेष ब्रीफिंग में सचिव (पूर्व) पी कुमारन ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे म्युंग भारत की राजकीय यात्रा पर आए हैं। यह उनकी पद ग्रहण करने (जून 2025) के बाद की पहली यात्रा है, जो रविवार (19 अप्रैल) शाम को शुरू हुई और मंगलवार (21 अप्रैल) को समाप्त होगी। उनके साथ मंत्रिस्तरीय, आधिकारिक और प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों का दल भी है।
यह दोनों नेताओं की तीसरी मुलाकात है। इससे पहले, वे जी7 शिखर सम्मेलन 2025 और जी20 समिट 2025 में मिल चुके हैं।
राष्ट्रपति ली ने अपने आगमन पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। सोमवार सुबह उन्हें राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया और उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच विस्तृत वार्ता हुई, जिसमें द्विपक्षीय “विशेष रणनीतिक साझेदारी” की समीक्षा की गई और भविष्य की दिशा निर्धारित की गई।
दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। जहाज निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इंडो-पैसिफिक समेत कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों के दृष्टिकोण में समानता दिखी।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली ने उद्योग जगत के नेताओं के साथ चर्चा की और बिजनेस सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ली भारत–कोरिया बिजनेस फोरम में भी शामिल हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में कारोबारी नेता उपस्थित हैं। इसके अलावा, दिल्ली में वित्तीय सहयोग फोरम और बेंगलुरु में “स्पेस डे” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
इस यात्रा के दौरान व्यापार, शिपिंग, पर्यावरण, विज्ञान-तकनीक, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। चार संयुक्त बयान जारी किए गए, जिनमें “इंडिया–आरओके जॉइंट स्ट्रैटेजिक विजन” प्रमुख है, जो दोनों देशों के रिश्तों के भविष्य का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
समुद्री क्षेत्र में सहयोग को विशेष महत्व दिया गया है। शिपबिल्डिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए नया ढांचा तैयार किया गया है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा पर भी साझा रणनीति बनाई गई है।
दोनों देशों ने नियमित शिखर बैठकें और मंत्री स्तर की बातचीत बढ़ाने पर सहमति जताई। “इंडिया–आरके इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन कमेटी” और “इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग” जैसी नई पहल भी शुरू की गई हैं।
2030 तक 50 बिलियन डॉलर के व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीईपीए समझौते को अपग्रेड करने की प्रक्रिया फिर शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने का निर्णय लिया गया है, जिससे एमएसएमई और आपूर्ति श्रृंखला को लाभ होगा।
यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर नई गति प्रदान करने वाली मानी जा रही है।