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भारत-कोरिया शिखर सम्मेलन: रणनीतिक साझेदारी को नया मोड़, महत्वपूर्ण समझौते हुए

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भारत-कोरिया शिखर सम्मेलन: रणनीतिक साझेदारी को नया मोड़, महत्वपूर्ण समझौते हुए

सारांश

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने में सहायक साबित होगा।

मुख्य बातें

द्विपक्षीय बैठक का आयोजन हैदराबाद हाउस में हुआ।
रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए संयुक्त दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया।
समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए।
भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज की स्थापना की गई।
वर्ष 2028-29 को भारत-कोरिया मैत्री वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की। यह दोनों नेताओं की तीसरी बैठक है। इससे पहले उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन 2025 और जी20 समिट 2025 के दौरान मुलाकात की थी।

राष्ट्रपति ली जे म्युंग की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और कोरिया गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों, संयुक्त वक्तव्य और घोषणाएं की गईं।

दोनों देशों ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जहाज निर्माण, शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में व्यापक ढांचे पर सहमति बनी। स्थिरता और ऊर्जा संसाधन सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी संयुक्त वक्तव्य जारी किए गए, जो भविष्य में सहयोग की दिशा तय करते हैं।

इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अनेक समझौता ज्ञापन (एमओयू) और ढांचे स्थापित किए गए। इनमें बंदरगाहों के विकास, औद्योगिक सहयोग समिति की स्थापना, इस्पात आपूर्ति श्रृंखला में तकनीक और व्यापार तथा लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त समुद्री विरासत, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, जलवायु और पर्यावरण तथा पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत सहयोग को भी औपचारिक रूप दिया गया।

डिजिटल क्षेत्र में “भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज” की स्थापना और वित्तीय सहयोग के तहत संस्थानों के बीच समझौते भी किए गए। सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2026-2030), रचनात्मक उद्योगों और खेल के क्षेत्र में सहयोग को भी बढ़ावा दिया गया, साथ ही व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को उन्नत करने के लिए वार्ता पुनः आरंभ करने की घोषणा की गई।

अंत में, दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय और वैश्विक सहयोग को सशक्त बनाना है। आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत, विशिष्ट आगंतुक कार्यक्रम (डीवीपी) की स्थापना तथा जलवायु परिवर्तन, आर्कटिक और समुद्री सहयोग जैसे वैश्विक मुद्दों पर संवाद प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।

कोरिया गणराज्य ने हिंद-प्रशांत महासागर पहल और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की, जबकि भारत वैश्विक हरित विकास संस्थान से जुड़ने पर सहमत हुआ। साथ ही, वर्ष 2028-29 को भारत-कोरिया मैत्री वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना था।
कौन-कौन से महत्वपूर्ण समझौते हुए?
बंदरगाहों के विकास, औद्योगिक सहयोग, इस्पात आपूर्ति श्रृंखला, और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
राष्ट्र प्रेस
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