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फार्मा आत्मनिर्भरता में MSME की बड़ी भूमिका: JP नड्डा ने LUB फार्मा कॉन्क्लेव-2026 में दिया आह्वान

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फार्मा आत्मनिर्भरता में MSME की बड़ी भूमिका: JP नड्डा ने LUB फार्मा कॉन्क्लेव-2026 में दिया आह्वान

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP नड्डा ने नई दिल्ली में LUB फार्मा कॉन्क्लेव-2026 में स्पष्ट किया कि भारत की फार्मा आत्मनिर्भरता की असली ताकत MSME सेक्टर है। वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में 60% हिस्सेदारी के साथ, अब गुणवत्ता और नियामक अनुपालन ही अगली छलांग की कुंजी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP नड्डा ने 25 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एलयूबी फार्मा कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन किया।
नड्डा ने कहा कि MSME सेक्टर अफोर्डेबल मेडिसिन, बल्क ड्रग्स, वैक्सीन और मेडिकल डिवाइसेस की मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता की धुरी बनेगा।
भारत वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में 60% योगदान देता है और फार्मा निर्यात $30 बिलियन से अधिक है।
फार्मा सचिव मनोज जोशी ने MSME की गुणवत्ता चूक पर चिंता जताई; DCGI राजीव सिंह रघुवंशी ने MSME क्लस्टर के ज़रिए नियामक अनुपालन को सरल बनाने का सुझाव दिया।
कॉन्क्लेव में 10 राज्यों के ड्रग कंट्रोलर और 400 दवा उत्पादकों ने भाग लिया; 5 अग्रणी फार्मा उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
कॉन्क्लेव की थीम: 'विकसित भारत-2047 के लिए फार्मा सेक्टर का रोड मैप' ।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 25 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एलयूबी फार्मा कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि औषध निर्माण के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एमएसएमई (MSME) सेक्टर की भूमिका निर्णायक होगी। लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव की थीम थी — 'विकसित भारत-2047 के लिए फार्मा सेक्टर का रोड मैप'

मंत्री नड्डा का मुख्य संदेश

नड्डा ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में अफोर्डेबल मेडिसिन, बल्क ड्रग्स, वैक्सीन और मेडिकल डिवाइसेस की मैन्युफैक्चरिंग में तेज़ी लाने के लिए MSME सेक्टर केंद्रीय भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज पूरी दुनिया भारत में निर्मित दवाओं पर भरोसा करती है।

उन्होंने देशभर के फार्मा उद्यमियों से आग्रह किया कि वे मात्रा की जगह गुणवत्ता को प्राथमिकता दें, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर 'ब्रांड भारत' की छवि और मज़बूत हो सके।

भारत की फार्मा ताकत: आँकड़े

नड्डा ने बताया कि वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 60 फीसदी है। इसके अलावा, फार्मा सेक्टर देश के $30 बिलियन के निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता की माँग बढ़ रही है और भारत को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

नियामक और गुणवत्ता मानकों पर ज़ोर

फार्मा विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि जब भी MSME गुणवत्ता में चूक करता है, तो उसका सीधा लाभ बड़ी कंपनियों को मिलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फार्मा उद्योग में नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है और रेगुलेटरी व कंप्लायंस दोनों मोर्चों पर मौजूद कमियों को दूर करना होगा।

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया राजीव सिंह रघुवंशी ने दवा उत्पादकों को नए नियामक ढाँचे की जानकारी देते हुए बताया कि MSME क्लस्टर के माध्यम से अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने प्रशासनिक ऑडिट के महत्व पर प्रकाश डाला।

उद्यमियों का सम्मान और लघु उद्योग भारती की उपलब्धियाँ

कॉन्क्लेव में MSME से शुरू होकर बड़े कॉर्पोरेट तक पहुँचने वाले 5 अग्रणी उद्यमियों को सम्मानित किया गया — सिस्टोपिक लेबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड के एमडी पीके दत्ता, एसीजी ग्रुप के एमडी अजीत सिंह, नेक्स्ट वेव इंडिया एंड एबीएस मर्केंटाइल के एमडी बोध राज सिकरी, ईस्ट अफ्रीकन इंडिया ओवरसीज के एमडी रामकुमार जैन और कोवेलेंट लैबोरेटरीज के डायरेक्टर एम. विजय किरण

लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महासचिव ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि संगठन ने CSIR से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री-अकेडेमिया सहयोग और सरकार के GeM पोर्टल पर लघु उद्योगों को जोड़ने के लिए निरंतर वेबिनार आयोजित किए हैं।

कॉन्क्लेव के समन्वयक एवं लघु उद्योग भारती के फार्मा उत्पाद समूह के प्रमुख डॉ. राजेश गुप्ता ने फार्मा उद्योग की चुनौतियों का ज्ञापन स्वास्थ्य मंत्री नड्डा को सौंपा। इस कॉन्क्लेव में 10 प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर और देशभर के 400 दवा उत्पादकों ने भाग लिया।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह कॉन्क्लेव ऐसे समय में आयोजित हुई जब केंद्र सरकार फार्मा सेक्टर में PLI योजनाओं के विस्तार और बल्क ड्रग पार्कों की स्थापना पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि MSME को नियामक अनुपालन में सहायता और तकनीकी उन्नयन मिले तो भारत 2047 तक वैश्विक फार्मा हब के रूप में अपनी स्थिति और मज़बूत कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि छोटे दवा निर्माताओं को नियामक अनुपालन, तकनीकी उन्नयन और वित्त तीनों मोर्चों पर एक साथ संघर्ष करना पड़ता है। फार्मा सचिव का यह स्वीकारोक्ति कि MSME की गुणवत्ता चूक का फायदा सीधे बड़ी कंपनियों को मिलता है, एक संरचनात्मक विसंगति को उजागर करती है जिसे केवल कॉन्क्लेव की थीम से नहीं सुलझाया जा सकता। वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में 60% हिस्सेदारी गर्व की बात है, पर यह बड़े संस्थानों की उपलब्धि है — MSME को उस ऊँचाई तक ले जाने के लिए नीतिगत प्रतिबद्धता से परे ठोस वित्तीय और तकनीकी सहयोग चाहिए।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलयूबी फार्मा कॉन्क्लेव-2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या था?
एलयूबी फार्मा कॉन्क्लेव-2026 लघु उद्योग भारती द्वारा 25 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसकी थीम 'विकसित भारत-2047 के लिए फार्मा सेक्टर का रोड मैप' थी। इसमें 10 राज्यों के ड्रग कंट्रोलर और 400 दवा उत्पादकों ने भाग लिया।
JP नड्डा ने फार्मा सेक्टर में MSME की भूमिका के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP नड्डा ने कहा कि अफोर्डेबल मेडिसिन, बल्क ड्रग्स, वैक्सीन और मेडिकल डिवाइसेस की मैन्युफैक्चरिंग में भारत को गति देने में MSME सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने उद्यमियों से मात्रा की जगह गुणवत्ता पर ध्यान देने का आह्वान किया।
भारत का वैश्विक फार्मा और वैक्सीन उत्पादन में क्या स्थान है?
भारत वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में 60 फीसदी योगदान देता है और देश का फार्मा निर्यात $30 बिलियन से अधिक है। नड्डा ने कहा कि पूरी दुनिया में भारत में बनी दवाओं पर भरोसा किया जाता है।
MSME फार्मा उद्यमियों के लिए नियामक अनुपालन की चुनौतियाँ क्या हैं?
फार्मा विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि गुणवत्ता में MSME की चूक का सीधा फायदा बड़ी कंपनियों को मिलता है, इसलिए नियमों का सख्त पालन ज़रूरी है। DCGI राजीव सिंह रघुवंशी ने सुझाया कि MSME क्लस्टर के माध्यम से नियामक अनुपालन को आसान बनाया जा सकता है।
लघु उद्योग भारती ने फार्मा MSME के लिए क्या कदम उठाए हैं?
लघु उद्योग भारती ने CSIR से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री-अकेडेमिया सहयोग और GeM पोर्टल पर लघु उद्योगों को जोड़ने के लिए निरंतर वेबिनार आयोजित किए हैं। संगठन ने फार्मा उद्योग की चुनौतियों का ज्ञापन भी स्वास्थ्य मंत्री नड्डा को सौंपा।
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