भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय वार्ता: संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई।
- वैश्विक मुद्दों पर संवाद स्थापित किया गया।
- रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भारत यात्रा पर चर्चा।
- दिसंबर 2025 के समिट के निर्णयों की समीक्षा की गई।
- आतंकवाद-रोधी उपायों पर चर्चा की गई।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 30 मार्च, 2026 को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) किया। विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी, आपसी हितों और वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई।
इस दौरान, दोनों पक्षों ने अपने आपसी संबंधों के सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित 23वें वार्षिक समिट में लिए गए निर्णयों की कार्यान्वयन प्रक्रिया की भी समीक्षा की। इस यात्रा के दौरान, रुडेंको ने भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से भी मुलाकात की थी। एफओसी का पिछला दौर मार्च 2025 में मॉस्को में आयोजित किया गया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेन्को ने की।"
उन्होंने आगे कहा, "दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के सभी पहलुओं की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।"
इसके अतिरिक्त, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मई में भारत यात्रा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, लावरोव 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं।
इससे पहले, 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे। खासकर आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषयों पर।
जायसवाल ने 'एक्स' पर कहा, "दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र यूएनएससी के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।"
इससे पहले, 11 मार्च को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की।