भारत-रूस साझेदारी पर विदेश कार्यालय बैठक में वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

Click to start listening
भारत-रूस साझेदारी पर विदेश कार्यालय बैठक में वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

सारांश

भारत और रूस ने नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श बैठक में द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बैठक में रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। जानें इस बैठक की खास बातें।

Key Takeaways

  • भारत और रूस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की।
  • द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मुद्दों पर चर्चा हुई।

नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत और रूस के विदेश मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में दोनों देशों ने अपनी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समग्र समीक्षा की और आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूसी उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, "भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में हुआ, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।"

उन्होंने बताया, "दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के संपूर्ण स्पेक्ट्रम का मूल्यांकन किया और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।"

इससे पहले, 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य विषय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, जैसे आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना और यूएनएससी सुधार।

जायसवाल ने कहा, "दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेषकर आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।"

इसके पूर्व, 11 मार्च को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की।

यह बातचीत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हुई, जो 28 फरवरी को संयुक्त अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनका लक्ष्य अमेरिका की संपत्तियां, क्षेत्रीय राजधानी और पश्चिम एशिया में सहयोगी बल थे।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिसंबर में भारत का दो दिवसीय राज्य दौरा किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ औपचारिक वार्ता की और भारत-रूस साझेदारी की स्थिति की समीक्षा की, जिसे रणनीतिक साझेदारी के रूप में नामित किए जाने को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

इस चर्चा के बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां दोनों पक्षों ने आने वाले वर्षों के लिए प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें ऊर्जा, परमाणु शक्ति, व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी में सहयोग को प्रमुखता दी गई।

Point of View

यह संवाद और सहयोग महत्वपूर्ण है।
NationPress
31/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत और रूस के बीच विदेश कार्यालय परामर्श का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करना था।
इस बैठक में किन-किन मुद्दों पर चर्चा की गई?
बैठक में आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई।
Nation Press