14 अगस्त 2026
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महाकाल की भस्म आरती: त्रिपुंड, रजत मुकुट और मुंडमाला से सजे बाबा, श्रावण द्वितीया पर उमड़े श्रद्धालु

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महाकाल की भस्म आरती: त्रिपुंड, रजत मुकुट और मुंडमाला से सजे बाबा, श्रावण द्वितीया पर उमड़े श्रद्धालु

सारांश

श्रावण शुक्ल द्वितीया पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — त्रिपुंड, रजत मुकुट और मुंडमाला से सुसज्जित बाबा महाकाल के दर्शन को हज़ारों श्रद्धालु रात से ही कतार में खड़े रहे। पंचामृत अभिषेक, शंखनाद और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हुआ।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 14 अगस्त को श्रावण शुक्ल द्वितीया पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को त्रिपुंड , रजत मुकुट , मुंडमाला और ताजे सुगंधित पुष्पों से अलौकिक रूप में सजाया गया।
दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ कपाट खोले गए; झांझ-मंजीरे और शंखनाद के साथ भस्म आरती हुई।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
हज़ारों श्रद्धालु बीती रात से ही दर्शन के लिए कतारबद्ध थे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि, शुक्रवार 14 अगस्त को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। त्रिपुंड, रजत मुकुट, मुंडमाला और ताजे सुगंधित पुष्पों की भव्य मालाओं से सुसज्जित बाबा के दर्शन के लिए हज़ारों श्रद्धालु बीती रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलने का क्रम

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दिव्य दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।

दिव्य शृंगार का विवरण

बाबा महाकाल को रजत (चाँदी) का मुकुट धारण कराया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा सुशोभित रहे। रुद्राक्ष, ताजे पुष्पों की मालाओं तथा विशेष मुंडमाला से बाबा का शृंगार किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने नवीन मुकुट धारण किया।

अभिषेक और आरती की विधि

मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम जल अर्पित किया गया। तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई, जिसे मंदिर के पुजारी ने संपन्न कराया।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति और परंपरा

श्रावण माह में महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व होने के कारण बड़ी संख्या में भक्त रात से ही पंक्तिबद्ध थे। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा मंदिर की सदियों पुरानी वेशभूषा संहिता का हिस्सा है। गौरतलब है कि श्रावण माह में प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।

आगे क्या

श्रावण माह के शेष सोमवारों और विशेष तिथियों पर भी इसी प्रकार की भव्य भस्म आरती और दिव्य शृंगार के आयोजन होंगे। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति श्रद्धालुओं से अनुरोध करती है कि वे समय से पूर्व पंजीकरण कराएँ और मंदिर की परंपराओं का पालन करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है। श्रावण माह में श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ यह दर्शाती है कि आस्था और परंपरा आधुनिक जीवनशैली के बीच भी अटूट बनी हुई है। मंदिर प्रबंधन के लिए असली चुनौती यह है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को सुरक्षित और सुव्यवस्थित दर्शन अनुभव में बदला जाए — भीड़ प्रबंधन और डिजिटल पंजीकरण इस दिशा में सकारात्मक कदम हैं, लेकिन पीक सीज़न में इनकी पर्याप्तता अभी भी एक खुला प्रश्न है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल की भस्म आरती क्या होती है और यह कब होती है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव को समर्पित एक विशेष प्रातःकालीन अनुष्ठान है, जो तड़के कपाट खुलने के बाद संपन्न होती है। इसमें भगवान का पंचामृत अभिषेक, दिव्य शृंगार और भस्म से आरती की जाती है।
श्रावण माह में महाकाल दर्शन का क्या महत्व है?
श्रावण माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। श्रावण की प्रत्येक तिथि पर विशेष शृंगार और आरती का आयोजन होता है।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए वेशभूषा नियम क्या हैं?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और इसका पालन सभी श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक है।
14 अगस्त को बाबा महाकाल का शृंगार किस प्रकार किया गया?
14 अगस्त को श्रावण शुक्ल द्वितीया पर बाबा महाकाल को त्रिपुंड, रजत (चाँदी) का मुकुट, मुंडमाला और ताजे सुगंधित पुष्पों की भव्य मालाओं से सजाया गया। मस्तक पर चंद्रमा धारण कराया गया तथा रुद्राक्ष और विशेष मुंडमाला से भी अलंकृत किया गया।
महाकाल भस्म आरती के लिए दर्शन कैसे बुक करें?
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालुओं को मंदिर प्रबंध समिति की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पहले से बुकिंग कराने की सलाह दी जाती है, विशेषकर श्रावण माह और विशेष तिथियों पर।
राष्ट्र प्रेस
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