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DRDO और भारतीय नौसेना ने NASM-SR मिसाइल का हेलीकॉप्टर से पहला सफल परीक्षण किया, एक साथ दागी गईं दो मिसाइलें

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DRDO और भारतीय नौसेना ने NASM-SR मिसाइल का हेलीकॉप्टर से पहला सफल परीक्षण किया, एक साथ दागी गईं दो मिसाइलें

सारांश

DRDO और भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में हेलीकॉप्टर से NASM-SR का पहला सफल सामूहिक प्रक्षेपण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की — एक ही प्लेटफॉर्म से दो मिसाइलें दागना भारत की स्वदेशी समुद्री मारक क्षमता में नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्य बातें

DRDO और भारतीय नौसेना ने 29 अप्रैल 2026 को ओडिशा तट पर NASM-SR मिसाइल का हेलीकॉप्टर से पहला सफल प्रक्षेपण किया।
एक ही हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से दो मिसाइलें त्वरित गति से दागी गईं — यह इस प्रणाली का पहला सामूहिक प्रक्षेपण था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय नौसेना, वायु सेना और उद्योग भागीदारों को बधाई दी।
25 अप्रैल 2026 को अहिल्यानगर में DRDO अध्यक्ष डॉ.
कामत ने उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण किया।
बख्तरबंद प्लेटफॉर्म में वर्तमान में 65% स्वदेशी सामग्री; लक्ष्य 90% तक बढ़ाना है।
निर्माण टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज द्वारा SME सहयोग से।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने 29 अप्रैल 2026 को ओडिशा के तट से बंगाल की खाड़ी में नौसेना के हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से नौसैनिक लघु-श्रेणी जहाज-रोधी मिसाइल (NASM-SR) का पहला सफल प्रक्षेपण किया। इस परीक्षण में एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें त्वरित गति से दागी गईं, जो इस उन्नत वायु-प्रवेशित जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली का पहला सामूहिक प्रक्षेपण था।

परीक्षण का विवरण और महत्व

DRDO और भारतीय नौसेना द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस परीक्षण में NASM-SR ने अपनी सटीकता और त्वरित प्रक्षेपण क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। एक ही हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से दो मिसाइलों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण इस प्रणाली की परिचालन विश्वसनीयता को दर्शाता है। यह परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना, उद्योग जगत और DCPP भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के विकास से सशस्त्र बलों की क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को तेज़ी से सुदृढ़ कर रहा है।

उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण

इससे पहले 25 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित DRDO की प्रयोगशाला में रक्षा विभाग (अनुसंधान एवं विकास) के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE) द्वारा डिज़ाइन किए गए उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म — ट्रैक और पहिएदार — का अनावरण किया। ये प्लेटफॉर्म 30 मिमी क्रूलेस टरेट और 7.62 मिमी PKT गन से लैस हैं, जिन्हें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रक्षेपण के लिए भी कॉन्फ़िगर किया गया है।

इन प्लेटफॉर्मों में उच्च शक्ति वाले इंजन, स्वचालित ट्रांसमिशन, STANAG स्तर 4 और 5 की बैलिस्टिक सुरक्षा, और मॉड्यूलर विस्फोट-रोधी सुरक्षा शामिल है। एक उभयचर मॉडल में हाइड्रो जेट्स की सुविधा भी है, जो जलीय बाधाओं को पार करने में सक्षम है।

स्वदेशीकरण और उद्योग भागीदारी

इन बख्तरबंद प्लेटफॉर्मों में वर्तमान में 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत करने की योजना है। इनका निर्माण टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड द्वारा कई लघु एवं मध्यम उद्यमों के सहयोग से किया गया है। यह सहयोग भारत के रक्षा औद्योगिक तंत्र को मजबूती देने की दिशा में एक ठोस कदम है।

आगे की राह

NASM-SR के सफल परीक्षण और उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्मों के अनावरण के साथ, DRDO का यह दोहरा कदम भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा नीति को ज़मीन पर उतारने का प्रयास है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले चरण में इन प्रणालियों को नौसेना और थलसेना के परिचालन बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी परीक्षण स्थल से परिचालन बेड़े तक की यात्रा में है — जो भारतीय रक्षा कार्यक्रमों में अक्सर सबसे लंबा चरण साबित होता है। एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलों का सामूहिक प्रक्षेपण तकनीकी परिपक्वता का संकेत देता है, परंतु NASM-SR को नौसेना के मौजूदा हेलीकॉप्टर बेड़े में एकीकृत करने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। बख्तरबंद प्लेटफॉर्म में 65% स्वदेशीकरण सराहनीय है, किंतु 90% के लक्ष्य तक पहुँचना महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NASM-SR मिसाइल क्या है?
NASM-SR यानी नौसैनिक लघु-श्रेणी जहाज-रोधी मिसाइल एक स्वदेशी वायु-प्रवेशित जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली है, जिसे DRDO ने भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से संचालित करने के लिए विकसित किया है। इसका 29 अप्रैल 2026 को ओडिशा तट पर बंगाल की खाड़ी में पहला सफल परीक्षण किया गया।
इस परीक्षण में क्या खास था?
इस परीक्षण में एक ही हेलीकॉप्टर से दो NASM-SR मिसाइलें त्वरित गति से दागी गईं, जो इस प्रणाली का पहला सामूहिक प्रक्षेपण था। यह प्रणाली की परिचालन विश्वसनीयता और त्वरित मारक क्षमता को साबित करता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय नौसेना, वायु सेना, उद्योग जगत और DCPP भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के विकास से सशस्त्र बलों की क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी।
DRDO के उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म में क्या विशेषताएँ हैं?
ये प्लेटफॉर्म 30 मिमी क्रूलेस टरेट, 7.62 मिमी PKT गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल क्षमता से लैस हैं। इनमें STANAG स्तर 4 और 5 की सुरक्षा, उच्च गतिशीलता और एक उभयचर मॉडल भी शामिल है।
इन बख्तरबंद प्लेटफॉर्मों का निर्माण किसने किया है?
इन प्लेटफॉर्मों का निर्माण टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड ने कई लघु एवं मध्यम उद्यमों के सहयोग से किया है। वर्तमान में इनमें 65% स्वदेशी सामग्री है, जिसे 90% तक बढ़ाने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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