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भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत: पहले नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल का कील-लेइंग समारोह कोच्चि में संपन्न

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भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत: पहले नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल का कील-लेइंग समारोह कोच्चि में संपन्न

सारांश

भारतीय नौसेना के लिए नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल का कील-लेइंग समारोह 18 सितंबर को कोच्चि में संपन्न हुआ — यह पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में भारतीय नौसेना का सबसे ठोस कदम है।

मुख्य बातें

नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) के पहले जहाज का कील-लेइंग समारोह 18 सितंबर 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में हुआ।
वाइस एडमिरल संजय साधु , कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन, मुख्य अतिथि रहे।
NGMV परियोजना का अनुबंध मार्च 2023 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ हस्ताक्षरित हुआ था।
परियोजना में उपयोग होने वाले सभी प्रमुख उपकरण पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित हैं।
यह परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' , 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' पहल के अनुरूप है।

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को नई ऊँचाई देने वाली नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) परियोजना के तहत पहले जहाज का औपचारिक निर्माण 18 सितंबर 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में आयोजित कील-लेइंग समारोह के साथ शुरू हो गया। यह समारोह भारत के समुद्री रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

कील-लेइंग समारोह: मुख्य घटनाक्रम

इस महत्वपूर्ण अवसर पर वाइस एडमिरल संजय साधु, कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे। कील-लेइंग समारोह किसी युद्धपोत के निर्माण की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक होता है और इसे भारतीय जहाज निर्माण के इतिहास में एक उल्लेखनीय पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

NGMV परियोजना: पृष्ठभूमि और अनुबंध

NGMV परियोजना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ अनुबंध मार्च 2023 में किया गया था। इन अत्याधुनिक मिसाइल वेसलों को अत्याधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से लैस किया जाएगा, जो भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। गौरतलब है कि यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें उपयोग होने वाले सभी प्रमुख उपकरण और प्रणालियाँ पूर्ण रूप से स्वदेशी रूप से विकसित एवं निर्मित की गई हैं। यह भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत', 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' पहल के सीधे अनुरूप है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी प्रौद्योगिकी पर आधारित इन जहाजों का निर्माण भारत के जहाज-निर्माण उद्योग को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक मज़बूत संकेत है।

नौसेना की रणनीतिक तैयारी

भारतीय नौसेना का दीर्घकालिक लक्ष्य खुद को एक 'फ्यूचर रेडी और कॉम्बैट रेडी फोर्स' के रूप में तैयार करना है। NGMV इसी रणनीतिक दृष्टिकोण का अभिन्न हिस्सा हैं — ये जहाज दुश्मन के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई में सक्षम होंगे और हिंद महासागर क्षेत्र के जटिल समुद्री वातावरण में प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगे। यह कोच्चि में स्थित कोचीन शिपयार्ड की क्षमता और भारत के समुद्री रक्षा उद्योग की परिपक्वता दोनों का प्रमाण है।

क्या होगा आगे

कील-लेइंग समारोह के बाद अब NGMV का पूर्ण निर्माण कार्य कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में जारी रहेगा। जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ेगा, भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी। यह परियोजना न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा को सशक्त करेगी, बल्कि देश के रक्षा निर्यात की संभावनाओं को भी नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा तब होगी जब यह जहाज वास्तविक परिचालन में उतरेगा, क्योंकि भारत के पिछले कई स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में समयसीमा और गुणवत्ता दोनों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनज़र NGMV की समय पर तैनाती केवल एक सैन्य ज़रूरत नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अनिवार्यता बन चुकी है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) क्या है?
NGMV भारतीय नौसेना के लिए विकसित की जा रही अत्याधुनिक मिसाइल युद्धपोत श्रृंखला है, जो उन्नत हथियारों और सेंसर प्रणालियों से लैस होगी। इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में हो रहा है और इसमें सभी प्रमुख उपकरण स्वदेशी रूप से विकसित हैं।
NGMV परियोजना का अनुबंध कब और किसके साथ हुआ?
NGMV परियोजना का अनुबंध मार्च 2023 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ किया गया था। यह भारतीय नौसेना और देश के जहाज-निर्माण उद्योग के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी है।
कील-लेइंग समारोह क्यों महत्वपूर्ण होता है?
कील-लेइंग समारोह किसी युद्धपोत के औपचारिक निर्माण की शुरुआत का प्रतीक है। 18 सितंबर 2026 को कोच्चि में संपन्न यह समारोह भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।
NGMV परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' से कैसे जुड़ी है?
इस परियोजना में उपयोग होने वाले सभी प्रमुख उपकरण पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित हैं। यह केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत', 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' पहल के अनुरूप है और भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मज़बूत करती है।
NGMV से भारतीय नौसेना को क्या फायदा होगा?
ये जहाज भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में त्वरित और प्रभावी युद्धक कार्रवाई की क्षमता देंगे। ये नौसेना को 'फ्यूचर रेडी और कॉम्बैट रेडी फोर्स' बनाने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएँगे और समुद्री सुरक्षा को सशक्त करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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