एमएलसी चुनाव से पहले अनंत सिंह ने नीरज कुमार को बहस की चुनौती, ₹20 करोड़ की शर्त का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की तैयारियों के बीच मोकामा के विधायक अनंत सिंह और जनता दल (यू) के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के बीच वर्षों पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। 19 सितंबर 2026 को यह टकराव उस समय और तेज हो गया जब अनंत सिंह ने सार्वजनिक मंच पर नीरज कुमार को आमने-सामने बहस की चुनौती दी और ₹20 करोड़ की शर्त लगाने तक की बात कही।
बहस की खुली चुनौती
शनिवार को अनंत सिंह ने नीरज कुमार को पटना के एक हनुमान मंदिर के पास आमने-सामने बैठकर विवादित मुद्दों पर खुली चर्चा का प्रस्ताव रखा। अनंत सिंह ने कहा, 'आइए आमने-सामने बैठकर बहस करते हैं और सारे हिसाब बराबर कर लेते हैं।' उन्होंने इस बहस के लिए ₹20 करोड़ की शर्त लगाने की भी पेशकश की।
चुनावी सरगर्मी के बीच अनंत सिंह ने यह भी माँग उठाई कि नीरज कुमार का नार्को टेस्ट कराया जाए, यह दावा करते हुए कि इससे सच्चाई सामने आएगी। वहीं, नीरज कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिसके पास कोई प्रमाण है, वह अदालत में पेश करे।
प्रतिद्वंद्विता की पृष्ठभूमि
दोनों नेताओं के बीच टकराव की जड़ें 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव तक जाती हैं। उस समय जून 2015 में हत्या के एक मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई थी, जिसके बाद जदयू ने मोकामा सीट से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया। चुनाव में अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे और 18,348 वोटों से जीत दर्ज की।
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हुई — नीरज कुमार ने अनंत सिंह के राजनीतिक रिकॉर्ड और आपराधिक मामलों को मुद्दा बनाया, जबकि अनंत सिंह खेमे ने नीरज कुमार को अपना प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी करार दिया। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि नीरज कुमार ने अनंत सिंह के लिए 'पुदीना सिंह' जैसे उपनाम का इस्तेमाल किया था।
हथियार मामले से गहरी हुई दरार
2019 में यह विवाद उस समय और गहरा हो गया जब बिहार के बाढ़ अनुमंडल स्थित अनंत सिंह के पैतृक घर पर पुलिस ने छापेमारी की। जाँच एजेंसियों ने वहाँ से एक एके-47 राइफल, गोला-बारूद और हैंड ग्रेनेड बरामद करने का दावा किया। इसके बाद अनंत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और उन्होंने दिल्ली की अदालत में आत्मसमर्पण किया।
अनंत सिंह लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया और उन्होंने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान बरामद हथियार रखने में नीरज कुमार की भूमिका थी। हालाँकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नीरज कुमार ने इसे पूरी तरह नकारा है। हथियार मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली और विशेष अदालत ने अनंत सिंह को दोषी ठहराया, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वह जेल से रिहा हुए।
एमएलसी चुनाव में नई पैंतरेबाजी
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव की तैयारियों के बीच अनंत सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नीरज कुमार की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अनंत सिंह बाद में जदयू में वापस लौट आए थे, लेकिन उन्होंने साफ कहा है कि उनका विरोध जदयू से नहीं, बल्कि नीरज कुमार से व्यक्तिगत स्तर पर है। यह बयान बिहार की जटिल गठबंधन राजनीति में एक नई दरार की ओर संकेत करता है।
बिहार की राजनीति पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर सभी दलों में रणनीतिक हलचल तेज है। मोकामा की यह पुरानी प्रतिद्वंद्विता अब पटना स्नातक सीट की लड़ाई में नया आयाम जोड़ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जदयू इस आंतरिक असहमति को किस तरह संभालती है और डॉ. अनुज सिंह की उम्मीदवारी पर समर्थन कितना जुटता है।