भारतीय तटरक्षक बल के चौथे NGOPV की कील-लेइंग, MDL बना रहा है 6 में से 4 स्वदेशी गश्ती पोत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित किए जा रहे छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) में से चौथे पोत की कील-लेइंग समारोह 26 जून 2025 को संपन्न हुआ। यह समारोह भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को ठोस आधार प्रदान करती है।
कील-लेइंग समारोह का महत्व
समुद्री जहाज निर्माण में कील-लेइंग को एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक अवसर माना जाता है — यह वह क्षण होता है जब किसी पोत के मुख्य ढाँचे का निर्माण औपचारिक रूप से प्रारंभ होता है। इस समारोह में भारतीय तटरक्षक बल और MDL के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि 20 दिसंबर 2023 को ICG और MDL के बीच छह NGOPV के निर्माण का अनुबंध संपन्न हुआ था, और अब उसी अनुबंध के अंतर्गत चौथे पोत का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है।
पोत की तकनीकी विशेषताएँ
निर्माणाधीन NGOPV पूरी तरह स्वदेशी डिज़ाइन और तकनीक पर आधारित है। इन पोतों में आधुनिक मशीनरी, उन्नत सेंसर प्रणाली, अत्याधुनिक नेविगेशन उपकरण और नवीनतम समुद्री निगरानी तंत्र शामिल किए जाएंगे। जहाज का डिज़ाइन, विकास और निर्माण — तीनों कार्य भारत में ही संपन्न किए जा रहे हैं।
परिचालन भूमिका और तैनाती
इन पोतों को लंबी दूरी की समुद्री गश्त, तटीय निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री कानून प्रवर्तन और विशेष सुरक्षा अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी तैनाती से तटरक्षक बल की प्रतिक्रिया क्षमता और निगरानी दायरे में उल्लेखनीय सुधार आएगा। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के मद्देनज़र यह विस्तार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उद्योग पर असर
यह परियोजना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है — इसका सीधा लाभ देश के जहाज निर्माण उद्योग, रक्षा-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र और रोज़गार सृजन को भी मिलेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वदेशी निर्माण की यह पहल भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूत करती है। तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और आपदा राहत जैसी चुनौतियों से निपटने में ये पोत निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
आगे की राह
छह में से चार पोतों की कील-लेइंग पूरी हो चुकी है। शेष दो पोतों के निर्माण की प्रगति पर रक्षा मंत्रालय की निगरानी जारी है। इस पूरी परियोजना के पूर्ण होने पर भारतीय तटरक्षक बल का बेड़ा आधुनिकता और परिचालन क्षमता के नए स्तर पर पहुँचेगा।