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क्या भारतीय नौसेना को मिला नया एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट 'अंजदीप'?

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क्या भारतीय नौसेना को मिला नया एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट 'अंजदीप'?

सारांश

भारतीय नौसेना में शामिल हुआ 'अंजदीप' एक अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। यह स्वदेशी निर्माण का प्रतीक है, जो समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानें इसके विशेषताएँ और महत्व।

मुख्य बातें

अंजदीप एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है।
यह स्वदेशी निर्माण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
यह जहाज समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसका डिज़ाइन भारतीय रजिस्ट्रड ऑफ शिपिंग के मानकों के अनुसार है।

नई दिल्ली, 22 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना में ‘अंजदीप’ नामक एक नवीनतम एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट का समावेश किया गया है। यह तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे सफलतापूर्वक नौसेना को सौंपा गया है। इस नौसैनिक जहाज का निर्माण गॉर्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा सम्पूर्ण स्वदेशी रूप से किया गया है।

यह नौसैनिक जहाज चेन्नई में सोमवार को भारतीय नौसेना में शामिल हुआ। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह स्वदेशी निर्माण का एक अद्वितीय उदाहरण है। अंजदीप आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट की श्रृंखला का तीसरा जहाज है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत गॉर्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है।

भारतीय नौसेना का कहना है कि इसका निर्माण इंडियन रजिस्ट्रड ऑफ शिपिंग के मानकों के अनुसार किया गया है। यह जहाज अत्यधिक शक्तिशाली और आधुनिक क्षमताओं से लैस है। इसकी लंबाई लगभग 77 मीटर है और यह भारतीय नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक है, जो वॉटरजेट प्रोपल्शन से चलने वाला है। यह एंटी-सबमरीन शक्ति से लैस है और इसमें अत्याधुनिक लाइटवेट टॉरपीडोज, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट्स और उन्नत शैलो वॉटर सोनार सिस्टम शामिल हैं। इनकी सहायता से यह जहाज कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी पनडुब्बियों जैसे जलमग्न खतरों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। इसके अलावा, इसकी अन्य ऑपरेशनल भूमिकाएं भी हैं।

यह नौसैनिक जहाज तटीय निगरानी और समुद्र में माइन बिछाने की क्षमता रखता है। यह समुद्री सुरक्षा संचालन में बेहतरीन परिणाम देता है। इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। यह पूर्व आईएनएस अंजदीप का आधुनिक रूप है, जिसे वर्ष 2003 में नौसेना से डिकमीशन किया गया था। इसका नाम कर्णाटक के कारवार तट के पास स्थित ‘अंजदीप’ से लिया गया है, जो भारत के समुद्री क्षेत्र की रक्षा के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अंजदीप का निर्माण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज भारत के बढ़ते रक्षा-उत्पादन इकोसिस्टम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

हाल ही में भारतीय नौसेना को स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट डीएससी ए-20 भी प्राप्त हुआ है। इसे औपचारिक रूप से नौसेना ने अपने बेड़े में शामिल किया है। यह पोत तटीय क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के डाइविंग ऑपरेशन्स में उपयोग किया जाएगा और अंडरवाटर मिशन, निरीक्षण और रिकवरी कार्यों के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। इसमें उन्नत कैटामरन डिज़ाइन और अत्याधुनिक प्रणालियाँ शामिल हैं।

भारतीय नौसेना के अनुसार, इस पोत के डिजाइन फेज के दौरान विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी में इसके हाइड्रोडायनामिक विश्लेषण एवं मॉडल परीक्षण किए गए थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस जहाज का निर्माण किसने किया है?
इसका निर्माण गॉर्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा किया गया है।
अंजदीप की लंबाई कितनी है?
अंजदीप की लंबाई लगभग 77 मीटर है।
इस जहाज में कौन-कौन सी तकनीकें शामिल हैं?
इस जहाज में आधुनिक लाइटवेट टॉरपीडोज, एंटी-सबमरीन रॉकेट्स और शैलो वॉटर सोनार सिस्टम शामिल हैं।
क्या अंजदीप आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है?
हाँ, इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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