मराठी अनिवार्यता विवाद: शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने सरकार के विरोधाभासी बयानों पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 28 अप्रैल 2025 को महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के मुद्दे पर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही परस्पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई में रहने वाले करोड़ों लोग दिल से मराठी हैं और मराठी भाषा, पहचान तथा संस्कृति का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार की अस्पष्ट नीति से भ्रम की स्थिति बन रही है।
सरकार के भीतर विरोधाभास
दुबे ने सवाल उठाया कि एक ओर सरकार के मंत्री ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने की बात करते हैं, जबकि उसी पार्टी के नेता इसका खुलकर विरोध करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह वास्तव में क्या चाहती है — क्या यह नियम हर पेशे से जुड़े व्यक्ति पर लागू होगा, या लोगों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।
दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ 1 मई से परमिट रद्द करने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ उसी मुद्दे पर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह दोहरा रवैया मराठी अस्मिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा करता है।
मीरा रोड हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया
मीरा रोड के नया नगर इलाके में सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमले की हालिया घटना पर भी दुबे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस तरह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में धर्म के आधार पर हत्या की घटना सामने आई थी, उसी तरह मीरा रोड-भायंदर क्षेत्र में इस प्रकार की वारदात चिंताजनक है।
उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण क्यों नहीं दिख रहा है। दुबे ने कहा कि यदि अपराधी बेखौफ घूमते रहेंगे, तो यह सामाजिक और राजनीतिक समरसता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हालाँकि, उन्होंने पुलिस और एटीएस (ATS) पर भरोसा जताते हुए माँग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
केईएम अस्पताल का नाम बदलने पर सवाल
किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल (केईएम अस्पताल) का नाम बदलने के मुद्दे पर भी दुबे ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल का नाम आज़ादी से पहले का है और इसे बनाने में जिस व्यक्ति या परिवार का योगदान रहा है, उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
दुबे के अनुसार, जिसने भी लोगों की जान बचाने के लिए काम किया है — चाहे वह भारतीय हो या विदेशी — उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने नाम बदलने की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जाए तो जनता को अधिक लाभ होगा, क्योंकि कई अस्पतालों में आज भी मरीजों को पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं।
आगे की राह
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में भाषाई राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। गौरतलब है कि मराठी अनिवार्यता का मुद्दा राज्य की पहचान की राजनीति से गहराई से जुड़ा है और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। शिवसेना (यूबीटी) की यह आक्रामक मुद्रा स्पष्ट संकेत देती है कि विपक्ष इस मुद्दे को सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ और तेज़ करने की तैयारी में है।