भवानीपुर में भाजपा की जीत से पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की संभावना: अमित शाह
सारांश
Key Takeaways
- अमित शाह ने भवानीपुर सीट पर जीत को महत्वपूर्ण बताया।
- भाजपा का लक्ष्य १७० सीटों की जीत है।
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है।
- पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल तनावपूर्ण हो गया।
- अमित शाह १६ दिनों तक बंगाल में रहेंगे।
कोलकाता, २ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा की जीत होती है, तो इससे पूरे राज्य में सत्ता परिवर्तन की संभावना बढ़ जाएगी।
भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है। अमित शाह ने सुवेंदु अधिकारी के नामांकन से पहले आयोजित रोड शो में कहा, "भाजपा एक-एक सीट जीतते हुए १७० सीटों के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। लेकिन इसका एक शॉर्टकट है, यदि भवानीपुर के मतदाता यहां जीत सुनिश्चित कर दें, तो पूरे बंगाल में सत्ता बदल जाएगी।"
अमित शाह ने याद दिलाया कि २०२१ के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था, हालांकि बाद में उन्होंने सरकार बना ली थी। उन्होंने कहा, "इस बार मैंने सुवेंदु अधिकारी से कहा है कि वे नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ें। मुझे पूरा भरोसा है कि इस बार तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री दोनों को हार का सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव खत्म होने तक वह १६ दिनों तक विभिन्न चरणों में पश्चिम बंगाल में रहेंगे और जनता से लगातार संवाद स्थापित करेंगे।
सुवेंदु अधिकारी के नामांकन के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी का काफिला अलीपुर सर्वे बिल्डिंग की ओर बढ़ रहा था, तभी हरिश चटर्जी स्ट्रीट के पास तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के इकट्ठा होने की खबर आई। यह इलाका ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के आवास के करीब है।
तृणमूल समर्थकों ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया, जिसमें एक कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया। काफिला आगे बढ़ने के बाद भाजपा समर्थकों ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। वहीं, भाजपा ने इस घटना को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए और पूछा कि केंद्रीय गृह मंत्री की सुरक्षा के बावजूद विरोधी कार्यकर्ताओं को कैसे इकट्ठा होने की अनुमति दी गई।