भोजपुर में मादा कुत्ते से कथित यौन शोषण: FIR दर्ज, पेटा इंडिया ने कानून में संशोधन की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले के बिछिआंव गाँव में एक मादा कुत्ते के साथ कथित यौन शोषण के मामले में संदेश थाना पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। स्थानीय देखभालकर्ता मुकेश कुमार की शिकायत और पशु अधिकार संगठन पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया के हस्तक्षेप के बाद यह कदम उठाया गया।
मामले का घटनाक्रम
उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 62 और 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) (ए) और 11 (1) (i) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। संदेश थाना प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि मामले की जाँच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद एक सरकारी पशु चिकित्सक ने पीड़ित मादा कुत्ते की पशु चिकित्सकीय जाँच की है। फिलहाल वह स्थानीय देखभालकर्ता मुकेश कुमार की देखरेख में है।
पेटा इंडिया की प्रतिक्रिया और माँगें
पेटा इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया टीम की एसोसिएट मैनेजर सलोनी सकरिया ने एफआईआर दर्ज करने के लिए संदेश थाना प्रभारी की सराहना की। उन्होंने कहा, "पशुओं के खिलाफ क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें कानून के तहत अधिकतम सुरक्षा मिलनी चाहिए।"
सकरिया ने यह भी कहा कि विभिन्न अध्ययनों में पशुओं के प्रति क्रूरता और इंसानों के खिलाफ हिंसा के बीच संबंध होने की बात सामने आई है। पेटा इंडिया ने केंद्र सरकार से भारतीय न्याय संहिता में संशोधन कर पशुओं के साथ यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बनाने की माँग की है।
कानूनी खामी पर चिंता
पेटा इंडिया के अनुसार, पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा दंडनीय थी, लेकिन नई भारतीय न्याय संहिता में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। संगठन के मुताबिक, यह कानूनी रिक्तता ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई की राह में बाधा बन सकती है।
संगठन ने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि पशुओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले अक्सर दर्ज ही नहीं हो पाते। उसका यह भी कहना है कि ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों में अन्य हिंसक अपराधों की ओर प्रवृत्ति होने की आशंका भी कथित तौर पर अधिक हो सकती है।
आगे की स्थिति
संदेश थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जाँच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में पशु संरक्षण कानूनों को और कड़ा बनाने की माँग लगातार बढ़ रही है। पेटा इंडिया का कहना है कि पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज में हिंसा के विरुद्ध संवेदनशीलता बढ़ाने और कानून के प्रति सम्मान को मजबूत करने में भी सहायक है।