तेलंगाना: सिद्दिपेट में बकरी की बलि का वीडियो वायरल, पेटा इंडिया की शिकायत पर एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले के खाजीपुर गाँव में पेड्डाम्मा बोनालु उत्सव के दौरान एक बकरी की कथित तौर पर बेरहमी से हत्या का वीडियो सामने आने के बाद भूमपल्ली पुलिस स्टेशन ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया की संयुक्त शिकायत पर यह कार्रवाई 17 जून 2026 को हुई।
मामले का घटनाक्रम
इस पूरे मामले की शुरुआत एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो से हुई, जिसमें कुछ लोग बकरी के पैर पकड़े हुए दिख रहे हैं जबकि एक अन्य व्यक्ति बार-बार उसकी गर्दन पर वार करता दिख रहा है। यह बलि खुलेआम और सार्वजनिक रूप से की गई थी।
स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया के अडुलापुरम गौतम ने सिद्दिपेट पुलिस कमिश्नर और भूमपल्ली पुलिस स्टेशन के समन्वय से शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए) 1960 की धारा 11(1) के तहत एफआईआर दर्ज की।
पेटा इंडिया की माँग और प्रतिक्रिया
पेटा इंडिया ने पुलिस से आग्रह किया है कि एफआईआर में तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धाराएँ भी जोड़ी जाएँ, जो राज्य में सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर पशु बलि को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
पेटा इंडिया की 'लीड क्रुएल्टी रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेटर' श्रीकुट्टी राजे ने कहा, 'पेटा इंडिया सिद्दिपेट पुलिस, खासकर पुलिस कमिश्नर रश्मि पेरुमल (आईपीएस) की सराहना करता है, जिन्होंने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि जानवरों के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'
राजे ने यह भी कहा कि जानवरों की बलि न केवल क्रूरता है, बल्कि यह समाज को हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और ऐसी पुरानी मान्यताओं को बढ़ावा देती है जो तरक्की में बाधा डालती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब भारत अंतरिक्ष मिशन शुरू कर रहा है और एआई समिट आयोजित कर रहा है, तब पशु बलि की पुरानी प्रथा का खात्मा होना सामाजिक विकास के लिए ज़रूरी है।
क्या कहता है कानून
तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धारा 3 के तहत किसी भी सार्वजनिक मंदिर, पूजा स्थल या उसके परिसर में तथा सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजनों के दौरान पशु या पक्षी बलि देना सख्ती से वर्जित है।
धारा 4 के अनुसार कोई भी व्यक्ति न तो स्वयं बलि दे सकता है, न दूसरों को इसके लिए कह सकता है, न सहयोग कर सकता है और न ही किसी भी रूप में इसमें भागीदारी कर सकता है। इसके अलावा धारा 5 के तहत मंदिर या पूजा स्थल के ट्रस्टी, पुजारी या प्रबंधन समिति को भी परिसर में बलि होने की अनुमति देना निषिद्ध है।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामले में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। पेटा इंडिया ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की निगरानी करता रहेगा और अतिरिक्त धाराएँ जोड़े जाने तक पुलिस के संपर्क में बना रहेगा। यह मामला तेलंगाना में पशु संरक्षण कानूनों के प्रवर्तन पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।