2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तेलंगाना: सिद्दिपेट में बकरी की बलि का वीडियो वायरल, पेटा इंडिया की शिकायत पर एफआईआर दर्ज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तेलंगाना: सिद्दिपेट में बकरी की बलि का वीडियो वायरल, पेटा इंडिया की शिकायत पर एफआईआर दर्ज

सारांश

तेलंगाना के सिद्दिपेट में बोनालु उत्सव के दौरान बकरी की बलि का वीडियो वायरल होने के बाद पेटा इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया की शिकायत पर भूमपल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। पशु क्रूरता निवारण और बलि निषेध कानूनों के तहत यह कार्रवाई राज्य में पशु संरक्षण प्रवर्तन पर नई बहस छेड़ सकती है।

मुख्य बातें

भूमपल्ली पुलिस स्टेशन ने 17 जून 2026 को बीएनएस 2023 की धारा 325 और पीसीए 1960 की धारा 11(1) के तहत एफआईआर दर्ज की।
सिद्दिपेट के खाजीपुर गाँव में पेड्डाम्मा बोनालु उत्सव के दौरान बकरी की बलि का वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ।
पेटा इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया के अडुलापुरम गौतम ने पुलिस कमिश्नर रश्मि पेरुमल (आईपीएस) के साथ मिलकर शिकायत दर्ज कराई।
पेटा इंडिया ने माँग की है कि तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धाराएँ भी एफआईआर में जोड़ी जाएँ।
इस अधिनियम की धारा 3 के तहत सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर पशु बलि पूरी तरह प्रतिबंधित है।

तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले के खाजीपुर गाँव में पेड्डाम्मा बोनालु उत्सव के दौरान एक बकरी की कथित तौर पर बेरहमी से हत्या का वीडियो सामने आने के बाद भूमपल्ली पुलिस स्टेशन ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया की संयुक्त शिकायत पर यह कार्रवाई 17 जून 2026 को हुई।

मामले का घटनाक्रम

इस पूरे मामले की शुरुआत एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो से हुई, जिसमें कुछ लोग बकरी के पैर पकड़े हुए दिख रहे हैं जबकि एक अन्य व्यक्ति बार-बार उसकी गर्दन पर वार करता दिख रहा है। यह बलि खुलेआम और सार्वजनिक रूप से की गई थी।

स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया के अडुलापुरम गौतम ने सिद्दिपेट पुलिस कमिश्नर और भूमपल्ली पुलिस स्टेशन के समन्वय से शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए) 1960 की धारा 11(1) के तहत एफआईआर दर्ज की।

पेटा इंडिया की माँग और प्रतिक्रिया

पेटा इंडिया ने पुलिस से आग्रह किया है कि एफआईआर में तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धाराएँ भी जोड़ी जाएँ, जो राज्य में सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर पशु बलि को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।

पेटा इंडिया की 'लीड क्रुएल्टी रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेटर' श्रीकुट्टी राजे ने कहा, 'पेटा इंडिया सिद्दिपेट पुलिस, खासकर पुलिस कमिश्नर रश्मि पेरुमल (आईपीएस) की सराहना करता है, जिन्होंने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि जानवरों के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'

राजे ने यह भी कहा कि जानवरों की बलि न केवल क्रूरता है, बल्कि यह समाज को हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और ऐसी पुरानी मान्यताओं को बढ़ावा देती है जो तरक्की में बाधा डालती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब भारत अंतरिक्ष मिशन शुरू कर रहा है और एआई समिट आयोजित कर रहा है, तब पशु बलि की पुरानी प्रथा का खात्मा होना सामाजिक विकास के लिए ज़रूरी है।

क्या कहता है कानून

तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धारा 3 के तहत किसी भी सार्वजनिक मंदिर, पूजा स्थल या उसके परिसर में तथा सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजनों के दौरान पशु या पक्षी बलि देना सख्ती से वर्जित है।

धारा 4 के अनुसार कोई भी व्यक्ति न तो स्वयं बलि दे सकता है, न दूसरों को इसके लिए कह सकता है, न सहयोग कर सकता है और न ही किसी भी रूप में इसमें भागीदारी कर सकता है। इसके अलावा धारा 5 के तहत मंदिर या पूजा स्थल के ट्रस्टी, पुजारी या प्रबंधन समिति को भी परिसर में बलि होने की अनुमति देना निषिद्ध है।

आगे क्या होगा

फिलहाल मामले में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। पेटा इंडिया ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की निगरानी करता रहेगा और अतिरिक्त धाराएँ जोड़े जाने तक पुलिस के संपर्क में बना रहेगा। यह मामला तेलंगाना में पशु संरक्षण कानूनों के प्रवर्तन पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सार्वजनिक उत्सवों में ऐसी घटनाएँ सामने आती रहती हैं — जो संकेत देती हैं कि कानून की जागरूकता और डर दोनों की कमी है। असली सवाल यह है कि क्या इस एफआईआर से आरोपियों पर वास्तविक कानूनी कार्रवाई होगी, या यह महज कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी। पेटा की माँग — बलि निषेध अधिनियम की धाराएँ जोड़ना — अगर मानी जाती है, तो यह मामला राज्य में एक मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना के सिद्दिपेट में बकरी बलि मामले में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
खाजीपुर गाँव में पेड्डाम्मा बोनालु उत्सव के दौरान एक बकरी की बेरहमी से हत्या का वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल होने के बाद पेटा इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया की शिकायत पर भूमपल्ली पुलिस स्टेशन ने एफआईआर दर्ज की। यह कार्रवाई बीएनएस 2023 की धारा 325 और पीसीए 1960 की धारा 11(1) के तहत हुई।
तेलंगाना में पशु बलि पर क्या कानूनी प्रतिबंध है?
तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धारा 3 के तहत राज्य में किसी भी सार्वजनिक मंदिर, पूजा स्थल या सार्वजनिक सड़क पर धार्मिक आयोजनों के दौरान पशु या पक्षी बलि देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। धारा 4 और 5 के तहत बलि में भागीदारी करने वाले व्यक्तियों और मंदिर प्रबंधन पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
पेटा इंडिया ने इस मामले में क्या माँग की है?
पेटा इंडिया ने पुलिस से आग्रह किया है कि मौजूदा एफआईआर में तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धाराएँ भी शामिल की जाएँ। संगठन ने सिद्दिपेट पुलिस कमिश्नर रश्मि पेरुमल (आईपीएस) की त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की है।
इस मामले में कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू हुए हैं?
भूमपल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए) 1960 की धारा 11(1) के तहत एफआईआर दर्ज की है। पेटा इंडिया तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धाराएँ भी जोड़वाने की माँग कर रहा है।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
फिलहाल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। पेटा इंडिया ने कहा है कि वह इस मामले की निगरानी करता रहेगा और अतिरिक्त कानूनी धाराएँ जोड़े जाने तक पुलिस के संपर्क में बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले