कूनो से निकले चीतों ने श्योपुर में बकरी को बनाया शिकार, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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कूनो से निकले चीतों ने श्योपुर में बकरी को बनाया शिकार, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

सारांश

कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले दो चीतों ने श्योपुर के गाँव में बकरी को शिकार बनाया — वीडियो वायरल हुआ, ग्रामीणों ने ट्रैकिंग टीम को घेरा। मुआवज़े के ऐलान से तनाव कम हुआ, लेकिन चीता पुनर्वास परियोजना और मानव-वन्यजीव संघर्ष का सवाल फिर सुर्खियों में आ गया।

मुख्य बातें

कूनो नेशनल पार्क से निकले दो चीतों ने 16 मई 2026 को श्योपुर जिले के अड़वाड़ और सीताखेड़ली गाँव में एक महिला की बकरी को शिकार बनाया।
ग्रामीणों ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद ट्रैकिंग टीम मौके पर पहुँची।
ग्रामीणों ने ट्रैकिंग टीम पर कोताही का आरोप लगाया और कूनो प्रशासन से बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की माँग की।
थिरुकुराल ने कहा कि चीतों की निगरानी के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
पीड़ित महिला को उचित मुआवज़ा देने के ऐलान के बाद स्थिति शांत हुई।

कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले दो चीतों ने 16 मई 2026 को मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के अड़वाड़ और सीताखेड़ली गाँव में एक ग्रामीण महिला की बकरी को अपना शिकार बना लिया। इस घटना के बाद दोनों गाँवों में भय और आक्रोश का माहौल बन गया, और ग्रामीणों ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर खुलकर सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

शनिवार को जब चीते बकरी पर हमला कर रहे थे, तभी मौजूद ग्रामीणों ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद कूनो नेशनल पार्क की ट्रैकिंग टीम मौके पर पहुँची। ट्रैकिंग टीम के आते ही ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने टीम के सदस्यों को आड़े हाथों लिया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रैकिंग टीम की कोताही के कारण चीते खुले में विचरण कर रहे हैं, जिससे उनके पशुधन और जान-माल को खतरा है। उनका कहना था, 'जिस तरह से हमारी बकरियों को निशाना बनाया जा रहा है, उसे हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते।'

प्रशासन की प्रतिक्रिया

कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने कहा कि चीतों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उनकी निगरानी में कोई चूक न हो। ट्रैकिंग टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिस महिला की बकरी का शिकार हुआ, उसे उचित मुआवज़ा देने का ऐलान किया। मुआवज़े की घोषणा के बाद ही स्थिति कुछ हद तक शांत हो सकी।

आम जनता पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना के बाद उनके बीच असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है। उन्हें डर है कि यदि चीतों की आवाजाही पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना पहले से ही विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही है।

गौरतलब है कि पार्क के आसपास के गाँवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं, और स्थानीय निवासी लंबे समय से पर्याप्त सुरक्षा उपायों की माँग करते आए हैं।

क्या होगा आगे

ट्रैकिंग टीम ने ग्रामीणों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। अब सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन आने वाले दिनों में चीतों की निगरानी और सीमा-प्रबंधन को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

और मुआवज़े की घोषणाएँ दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं। जब तक पार्क प्रबंधन सीमा-नियंत्रण और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता नहीं देता, तब तक ऐसी घटनाएँ चीता संरक्षण की छवि को और नुकसान पहुँचाती रहेंगी।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कूनो नेशनल पार्क के चीतों ने श्योपुर में क्या किया?
कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले दो चीतों ने 16 मई 2026 को श्योपुर जिले के अड़वाड़ और सीताखेड़ली गाँव में एक ग्रामीण महिला की बकरी को शिकार बना लिया। इस घटना का वीडियो ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद ट्रैकिंग टीम मौके पर पहुँची।
ग्रामीणों ने ट्रैकिंग टीम पर क्या आरोप लगाए?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रैकिंग टीम की लापरवाही के कारण चीते पार्क की सीमा से बाहर निकल आए और उनके पशुधन को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उनका कहना था कि इस कोताही की वजह से गाँव में असुरक्षा का माहौल बन गया है।
कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने क्या कहा?
डीएफओ आर. थिरुकुराल ने कहा कि चीतों की सुरक्षा और निगरानी के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रैकिंग टीम ने पीड़ित महिला को उचित मुआवज़ा देने का ऐलान किया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई।
पीड़ित महिला को मुआवज़ा मिलेगा?
हाँ, कूनो नेशनल पार्क की ट्रैकिंग टीम ने उस महिला को उचित मुआवज़ा देने की घोषणा की है जिसकी बकरी चीतों ने मार दी। मुआवज़े के ऐलान के बाद ही ग्रामीणों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हो सका।
कूनो चीता पुनर्वास परियोजना और स्थानीय गाँवों के बीच विवाद क्यों है?
कूनो नेशनल पार्क के आसपास के गाँवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। स्थानीय निवासियों का पशुधन समय-समय पर वन्यजीवों का शिकार बनता है, जिससे उनमें असुरक्षा और आक्रोश का भाव बना रहता है। पर्याप्त सुरक्षा उपायों और त्वरित मुआवज़े की माँग लंबे समय से चली आ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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