26 जून 2026
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क्या 'बिहार बंद' प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में है?

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क्या 'बिहार बंद' प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में है?

सारांश

बिहार में एनडीए द्वारा आयोजित 'बिहार बंद' का व्यापक असर देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। जानें इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की कहानी और इसकी राजनीतिक महत्वता।

मुख्य बातें

बिहार बंद का आयोजन एनडीए द्वारा किया गया था।
प्रदर्शन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखी गई।
राजनीतिक बयानबाजी ने इस आंदोलन को जन्म दिया।
बंद का असर राज्य भर में देखा गया।
महागठबंधन के नेताओं पर आरोप लगाए गए।

पटना, 4 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) द्वारा आयोजित 'बिहार बंद' का राज्य भर में व्यापक प्रभाव देखने को मिला। गुरुवार को, पटना सहित कई शहरों में एनडीए के कार्यकर्ता सुबह से ही सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह बंद कांग्रेस-राजद के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान के विरोध में आयोजित किया गया है।

पटना के अनीसाबाद, डाकबंगला चौराहा और अन्य प्रमुख सड़कों पर एनडीए कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने पोस्टर और बैनर के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने कहा, "हम यहाँ इसलिए हैं, क्योंकि दरभंगा में राहुल गांधी की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।"

समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में भाजपा कार्यकर्ता ने कहा, "वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी पूरी तरह से अस्वीकार्य थी।" उन्होंने प्रदर्शन के संदर्भ में कहा कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी को कोई असुविधा न हो।

इसी तरह, भागलपुर में भी गुरुवार सुबह बाजार बंद देखे गए। एनडीए कार्यकर्ता भागलपुर में 'बिहार बंद' के दौरान सड़कों पर उतरे। इस दौरान, भामाशाह और खलीफाबाग चौक पर आवाजाही रोकी गई। एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, "यह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन है। महिलाएं और अन्य लोग बहुत ही आक्रोशित हैं।"

मोतिहारी में महिलाओं ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। पार्टी के झंडे थामे और नारेबाजी करते हुए उन्होंने सड़क पर मार्च निकाला। इस दौरान, मोतिहारी में बाजार बंद देखा गया। इसी तरह, सासाराम में एनडीए कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही सड़कों को जाम कर दिया। इस दौरान, सासाराम पोस्ट ऑफिस चौक पर भी जाम लग गया था।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि जैसे वोटर अधिकार यात्रा के दौरान दरभंगा में महागठबंधन के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित किया। उन्होंने कहा, "महागठबंधन के लोगों ने भारतीय परंपरा को कलंकित किया है। इसलिए एनडीए के घटक दलों के महिला मोर्चा ने निर्णय लिया कि वे विपक्ष के नेताओं की टिप्पणी का सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।"

उमेश कुशवाहा ने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि महागठबंधन वाले लोग माफी मांगने को भी तैयार नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या विपक्ष अराजकता फैलाना चाहता है? उनके मन में क्या है? क्या विपक्ष के लोग जंगलराज को वापस लाना चाहते हैं?"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार बंद का मुख्य उद्देश्य क्या था?
बिहार बंद का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में अपनी आवाज उठाना था।
इस बंद में किन-किन शहरों में प्रदर्शन हुआ?
इस बंद में पटना, भागलपुर, मोतिहारी और सासाराम जैसे शहरों में प्रदर्शन हुए।
इस प्रदर्शन का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह प्रदर्शन राजनीतिक बयानबाजियों और उनकी सामाजिक प्रभावशीलता को दर्शाता है, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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