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बिहार के 3 जिलों को फाइलेरिया उन्मूलन में WHO-UN की सराहना, संजय झा ने NDA सरकार को दिया श्रेय

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बिहार के 3 जिलों को फाइलेरिया उन्मूलन में WHO-UN की सराहना, संजय झा ने NDA सरकार को दिया श्रेय

सारांश

बिहार के अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों ने पहली बार TAS-1 का कड़ा मानदंड पार किया, जिस पर UN और WHO ने सराहना की। जदयू नेता संजय कुमार झा ने इसे NDA सरकार के 20 वर्षों के DOT-आधारित स्वास्थ्य प्रयासों का परिणाम बताया और 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य को करीब बताया।

मुख्य बातें

UN और WHO ने लिम्फेटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन की दिशा में बिहार के प्रयासों की वैश्विक स्तर पर सराहना की।
बिहार के अररिया , मधेपुरा और सुपौल जिलों ने इस वर्ष पहली बार TAS-1 के कड़े मानदंड सफलतापूर्वक पूरे किए।
इन तीनों जिलों में अब सामूहिक दवा वितरण अभियान बंद कर निगरानी चरण में प्रवेश किया जा सकेगा।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इसे NDA सरकार के 20 वर्षों के सुनियोजित स्वास्थ्य प्रयासों का परिणाम बताया।
DOT (डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट) प्रणाली को इस सफलता में निर्णायक भूमिका निभाने का श्रेय दिया गया।
यह उपलब्धि वर्ष 2027 तक भारत से फाइलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मंगलवार, 7 जुलाई को कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बिहार को लिम्फेटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन की दिशा में मिली वैश्विक सराहना राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इसे पिछले दो दशकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को व्यवस्थित रूप से सुदृढ़ करने और स्वास्थ्यकर्मियों को सशक्त बनाने के सुनियोजित प्रयासों का परिणाम बताया।

मुख्य उपलब्धि: तीन जिलों ने पार किया कड़ा मानदंड

झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में बताया कि इस वर्ष पहली बार बिहार के अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों ने ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) के कड़े मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने बताया कि इन तीनों जिलों में अब सामूहिक दवा वितरण अभियान बंद कर निगरानी चरण में प्रवेश किया जा सकेगा — जो फाइलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव माना जाता है।

झा के अनुसार यह उपलब्धि वर्ष 2027 तक भारत से फाइलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि लिम्फेटिक फाइलेरिया एक मच्छर-जनित परजीवी रोग है जो अंगों में गंभीर सूजन का कारण बनता है और दशकों तक ग्रामीण बिहार में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रहा है।

NDA सरकार और नीतीश कुमार को श्रेय

जदयू नेता ने इस सफलता का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA सरकार द्वारा बीते 20 वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सुदृढ़ करने को दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया गया और स्वास्थ्यकर्मियों, ANM तथा आशा कार्यकर्ताओं को प्रभावी ढंग से प्रशिक्षित एवं सशक्त बनाया गया।

DOT प्रणाली की भूमिका

झा ने बताया कि राज्य सरकार ने 'डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट' (DOT) प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया। इस प्रणाली के तहत केवल दवाओं का वितरण ही नहीं किया गया, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में मरीजों को दवा का सेवन भी सुनिश्चित कराया गया। उन्होंने कहा कि इसी वजह से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान वास्तविक उपचार कवरेज में बदलने में सफल रहा।

सामूहिक प्रयास और आगे की राह

झा ने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि लाखों स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने विश्वास जताया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई स्वास्थ्य विकास यात्रा को वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार आगे बढ़ा रहे हैं।

झा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर निरंतर काम कर रही है, ताकि आम नागरिकों को इलाज के लिए बड़े शहरों या मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर न रहना पड़े। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, TAS-1 उत्तीर्ण करना किसी भी जिले के लिए फाइलेरिया उन्मूलन की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है, और बिहार के तीन जिलों की यह सफलता राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि यह सराहना पूरे राज्य के लिए नहीं, बल्कि विशिष्ट जिलों के लिए है — बिहार में फाइलेरिया-प्रभावित जिलों की संख्या अभी भी काफी अधिक है। DOT प्रणाली की प्रभावशीलता का दावा सही हो सकता है, परंतु स्वतंत्र सार्वजनिक स्वास्थ्य आँकड़ों से इसकी पुष्टि ज़रूरी है। यह खबर एक राजनीतिक नेता के बयान पर आधारित है, इसलिए स्वास्थ्य उपलब्धि और चुनावी श्रेय-राजनीति के बीच की रेखा को पाठकों को स्पष्ट रखना चाहिए।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार को फाइलेरिया उन्मूलन में UN और WHO की सराहना क्यों मिली?
बिहार के अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों ने इस वर्ष पहली बार ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) के कड़े मानदंड सफलतापूर्वक पूरे किए, जिसके चलते UN और WHO ने राज्य के फाइलेरिया उन्मूलन प्रयासों की सराहना की। यह मानदंड यह सुनिश्चित करता है कि किसी क्षेत्र में फाइलेरिया का संक्रमण स्तर इतना कम हो गया है कि सामूहिक दवा वितरण की आवश्यकता नहीं रही।
TAS-1 सर्वे क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
TAS-1 (ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे) WHO द्वारा निर्धारित एक कड़ा परीक्षण है जो यह तय करता है कि किसी जिले में लिम्फेटिक फाइलेरिया का प्रसार नियंत्रण सीमा से नीचे आ गया है या नहीं। इसे पास करने के बाद जिले में सामूहिक दवा वितरण अभियान बंद कर निगरानी चरण शुरू किया जाता है, जो उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव है।
फाइलेरिया उन्मूलन में DOT प्रणाली की क्या भूमिका रही?
'डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट' (DOT) प्रणाली के तहत केवल दवाएँ वितरित नहीं की गईं, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में मरीजों को दवा का सेवन भी सुनिश्चित कराया गया। जदयू नेता संजय कुमार झा के अनुसार इसी वजह से अभियान वास्तविक उपचार कवरेज में बदलने में सफल रहा।
भारत से फाइलेरिया उन्मूलन का राष्ट्रीय लक्ष्य कब तक है?
भारत सरकार ने वर्ष 2027 तक देश से लिम्फेटिक फाइलेरिया के उन्मूलन का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। बिहार के तीन जिलों की TAS-1 सफलता को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिहार में फाइलेरिया उन्मूलन का श्रेय किसे दिया जा रहा है?
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इस सफलता का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA सरकार के 20 वर्षों के प्रयासों को दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इस यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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