बिहार के तीन जिलों को फाइलेरिया उन्मूलन में UN-WHO की सराहना, संजय झा ने NDA सरकार को दिया श्रेय
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने 7 जुलाई को कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बिहार को लिम्फेटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन की दिशा में दी गई अंतरराष्ट्रीय सराहना पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण है। उनके अनुसार यह उपलब्धि पिछले दो दशकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को व्यवस्थित रूप से सुदृढ़ करने और ज़मीनी स्वास्थ्यकर्मियों को सशक्त बनाने के सुनियोजित प्रयासों का प्रतिफल है।
मुख्य उपलब्धि: तीन जिलों ने पार किया TAS-1 का कड़ा मानदंड
झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में बताया कि इस वर्ष पहली बार बिहार के अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों ने ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) के कड़े मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस सर्वे में सफलता के बाद इन तीनों जिलों में चल रहे सामूहिक दवा वितरण अभियान को बंद कर निगरानी चरण में प्रवेश किया जा सकेगा — जो फाइलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव माना जाता है। उन्होंने इसे वर्ष 2027 तक भारत से फाइलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
20 वर्षों की स्वास्थ्य नीति का परिणाम
जदयू नेता ने इस सफलता का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA सरकार द्वारा बीते 20 वर्षों में की गई स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर मजबूती को दिया। उनके अनुसार राज्य के प्रत्येक प्रखंड में स्वास्थ्य ढाँचे को सुदृढ़ किया गया और ANM तथा आशा कार्यकर्ताओं को प्रभावी प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया। गौरतलब है कि फाइलेरिया जैसी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों के उन्मूलन में ज़मीनी स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका को WHO भी निर्णायक मानता है।
DOT प्रणाली: दवा वितरण से आगे बढ़कर सुनिश्चित उपचार
झा ने बताया कि राज्य सरकार ने 'डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट' (DOT) प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया, जिसके तहत केवल दवाओं का वितरण नहीं किया गया, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में मरीज़ों को दवा का सेवन भी सुनिश्चित कराया गया। उनके अनुसार इसी वजह से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान केवल कागज़ी कवरेज तक सीमित न रहकर वास्तविक उपचार कवरेज में बदल सका।
सामूहिक प्रयास और आगे की राह
झा ने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि लाखों स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों के सामूहिक परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई स्वास्थ्य विकास यात्रा को वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है, ताकि आम नागरिकों को इलाज के लिए बड़े शहरों या मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर न रहना पड़े।