बिहार में होली पर्व के लिए विधि-व्यवस्था की समीक्षा, शांति बनाए रखने के लिए सख्त कदम
सारांश
Key Takeaways
- बिहार में होली पर्व के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
- सभी जिलों में शांति समिति की बैठकें अनिवार्य हैं।
- आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने का आदेश दिया गया है।
- दंगा नियंत्रण दल को हमेशा 'रेडी मोड' में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पटना, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में मंगलवार को होली पर्व के अवसर पर राज्य में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई, जिसमें सभी जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।
इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य आगामी होली पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाना है। पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डीजे बजाने पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए।
पुलिस महानिदेशक ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ पुलिस कर्मचारियों और जवानों की विस्तृत ब्रीफिंग करें, ताकि वे अपनी ड्यूटी को सही तरीके से निभा सकें।
डीजीपी ने यह भी निर्देश दिया कि दंगा नियंत्रण दल को २४ घंटे 'रेडी मोड' में रखा जाए। इसके अलावा, संवेदनशील स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाने के लिए विशेष चेकिंग दल का गठन करने का आदेश दिया गया है। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए 'डायल 112' और जिला समन्वय केंद्रों को पूरी तरह सक्रिय रखने का भी निर्देश दिया गया। साथ ही, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अस्पतालों और फायर ब्रिगेड को 'एक्टिव मोड' में रहने का आदेश दिया गया।
अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) पंकज दराद ने कहा कि राज्य में होली का पर्व ३ और ४ मार्च को मनाया जाएगा। उन्होंने पिछले वर्ष होली के दौरान हुई लगभग २० सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए संबंधित जिलों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी। सभी जिलाधिकारी को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शांति समिति की बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित करें।