29 अक्टूबर 2026
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बिहार एमएलसी चुनाव: जदयू में खींचतान, नीरज कुमार बोले — ललन सिंह से बधाई लेने नहीं जाऊँगा

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बिहार एमएलसी चुनाव: जदयू में खींचतान, नीरज कुमार बोले — ललन सिंह से बधाई लेने नहीं जाऊँगा

सारांश

बिहार एमएलसी चुनाव में जीत के बाद जदयू की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आई — नीरज कुमार का ललन सिंह को सीधा संदेश और 'सूद सहित कर्ज लौटाने' की चेतावनी पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।

मुख्य बातें

नीरज कुमार ने पटना स्नातक सीट से लगातार चौथी बार जीत दर्ज की।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से बधाई लेने से साफ इनकार किया।
मोकामा विधायक अनंत सिंह ने चुनाव के दौरान जन सुराज उम्मीदवार डॉ.
अनुज सिंह का समर्थन किया था।
नीरज कुमार ने कहा — ललन सिंह ने सुलह की कोई कोशिश नहीं की और वे खुद सुलह के पक्षधर नहीं थे।
नीरज ने 'राजनीतिक कर्ज सूद सहित लौटाने' की बात कही, जिसे सीधी चुनौती माना जा रहा है।
जीत के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी , नीतीश कुमार और संजय झा से मुलाकात की।

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणाम घोषित होते ही जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर सुलगती अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत दर्ज करने वाले जदयू विधान पार्षद नीरज कुमार ने 29 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कर दिया कि वे केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ जदयू नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से बधाई लेने नहीं जाएँगे। इस बयान ने पार्टी की अंदरूनी असहजता को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

नीरज कुमार ने किससे मिले, किससे नहीं

जीत के बाद नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात की। लेकिन ललन सिंह से बधाई लेने के सवाल पर उनका जवाब एकदम साफ था — वे ऐसी कोई मुलाकात नहीं करेंगे।

नीरज कुमार ने कहा, 'नहीं, कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। सवाल यह पैदा होता है कि पूरे चुनावी प्रकरण में मेरा क्या गुनाह है? आखिर मेरा कोई गुनाह तो होगा न, क्या गुनाह है आखिर? तो हमको क्यों चुनाव की प्रक्रिया में इतनी परेशानी झेलनी पड़ी?' यह बयान सीधे तौर पर चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर बने तनाव की ओर इशारा करता है।

चुनावी घटनाक्रम जिसने पार्टी में दरार उजागर की

पटना स्नातक सीट पर चुनाव के दौरान मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया था — जो जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के विरुद्ध था। इससे पार्टी के भीतर मतभेद सार्वजनिक हो गए थे।

गौरतलब है कि यह बिहार की राजनीति में कोई पहली बार नहीं है जब जदयू के भीतर व्यक्तिगत समीकरण चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश करते दिखे हों। हालाँकि नीरज कुमार ने जीत हासिल की, लेकिन उनके बयान यह संकेत देते हैं कि भीतरी असंतोष अभी शांत नहीं हुआ है।

ललन सिंह पर सीधा निशाना

ललन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए नीरज कुमार ने कहा कि अगर मुंगेर के सांसद चाहते तो सुलह की स्थिति बन सकती थी, लेकिन उन्होंने खुद इसकी कोई कोशिश नहीं की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ललन सिंह सुलह के पक्षधर नहीं थे।

नीरज कुमार ने यह भी कहा कि उन्हें अपने माता-पिता और पूर्वजों से सीख मिली है कि लिया गया कर्ज लौटाना चाहिए — और वे राजनीति का यह कर्ज 'सूद सहित' लौटाएँगे। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

अनंत सिंह को लेकर तीखी टिप्पणी

विधायक अनंत सिंह से बधाई लेने के सवाल पर नीरज कुमार ने कहा कि 'ऐसे लोगों से बधाई लेने पर तो पाप चढ़ता है।' यह टिप्पणी पार्टी-विरोधी व्यवहार पर उनकी नाराज़गी को और स्पष्ट करती है।

नीरज कुमार ने यह भी बताया कि चुनाव परिणाम के बाद उनके आवास पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद हैं और लोग अलग-अलग माध्यमों से उन्हें बधाई और आशीर्वाद दे रहे हैं।

आगे क्या होगा जदयू में

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद जदयू के लिए एक नाज़ुक मोड़ पर आया है। बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दूर नहीं हैं और पार्टी के भीतर इस तरह की सार्वजनिक कटुता नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है।

अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी इन मतभेदों को पाटने में सफल होगी, या नीरज कुमार के 'सूद सहित कर्ज लौटाने' वाले बयान का असर दूरगामी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नज़रअंदाज़ करना पार्टी नेतृत्व के लिए मुश्किल होगा। मुख्यधारा की कवरेज चुनाव परिणाम पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि जदयू में ललन सिंह बनाम नीरज कुमार की यह दरार आगामी विधानसभा चुनाव की पूर्वपीठिका बन सकती है। पार्टी यदि समय रहते इस अंदरूनी कलह को नहीं सुलझाती, तो बिहार में NDA के एकजुट चेहरे को नुकसान पहुँच सकता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरज कुमार ने ललन सिंह से मिलने से क्यों इनकार किया?
नीरज कुमार का कहना है कि पटना स्नातक सीट पर चुनाव के दौरान उन्हें जानबूझकर परेशानी झेलनी पड़ी और ललन सिंह ने सुलह की कोई कोशिश नहीं की। इसलिए उन्होंने बधाई लेने के लिए मिलने से साफ इनकार किया।
बिहार एमएलसी चुनाव 2026 में जदयू की क्या स्थिति रही?
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार ने पटना स्नातक सीट जीती, लेकिन चुनाव के दौरान ही पार्टी के भीतर मतभेद सार्वजनिक हो गए थे।
अनंत सिंह का इस विवाद में क्या रोल था?
मोकामा विधायक अनंत सिंह ने चुनाव के दौरान जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार की बजाय जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया था। नीरज कुमार ने अनंत सिंह से बधाई लेने को 'पाप' करार दिया।
नीरज कुमार के 'सूद सहित कर्ज लौटाने' के बयान का क्या मतलब है?
नीरज कुमार ने संकेत दिया कि चुनाव के दौरान जिन लोगों ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कीं, उनका राजनीतिक जवाब दिया जाएगा। इसे बिहार की राजनीति में खुली प्रतिद्वंद्विता की घोषणा माना जा रहा है।
इस विवाद का जदयू पर दीर्घकालिक असर क्या हो सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह सार्वजनिक कटुता जदयू की एकजुटता की छवि को नुकसान पहुँचा सकती है, खासकर जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ क्षितिज पर हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व पर यह भार पड़ेगा कि वे पार्टी में आपसी समन्वय कैसे बहाल करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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