एमएलसी चुनाव नतीजे: बैलेट पेपर में कांग्रेस को 1 सीट, भाजपा का तंज; एमवीए ने महायुति को पछाड़ा
सारांश
मुख्य बातें
चार राज्यों में विधान परिषद (एमएलसी) की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है। 29 अक्टूबर 2026 को सामने आए इन नतीजों में कांग्रेस केवल एक सीट हासिल कर सकी, जबकि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने महाराष्ट्र में पाँच में से तीन सीटें जीतकर महायुति को पीछे छोड़ दिया।
भाजपा का कांग्रेस पर तंज
मुंबई से भाजपा विधायक राम कदम ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करती रही है, लेकिन बैलेट पेपर के ज़रिए हुए इस चुनाव में भी पार्टी केवल एक सीट जीत सकी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस खाता तक नहीं खोल सकी।
कदम ने कहा कि कांग्रेस को ईवीएम या चुनाव आयोग को दोष देने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति और कार्यशैली की समीक्षा करनी चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी मुद्दे — चाहे ईवीएम हो, एसआईआर हो या बैलेट पेपर — को उठाने से कांग्रेस के पक्ष में चुनावी नतीजे आने की गारंटी नहीं है।
भाजपा सांसद चंदोलिया का जवाब
भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने वाराणसी एमएलसी नतीजों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि जीत और हार चुनावी प्रक्रिया के दो पहलू हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े नेता भी चुनाव हारते हैं।
चंदोलिया ने यह भी कहा कि वाराणसी के एकल नतीजे को पूरे देश के जनादेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक़, उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की सीटों पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अधिकांश मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं।
एमवीए का पलटवार और महाराष्ट्र के नतीजे
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने चुनावी नतीजों को एमवीए के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि एनसीपी-एसपी ने दो सीटें जीती हैं जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली — इस तरह एमवीए ने कुल पाँच में से तीन सीटें हासिल कीं, जबकि महायुति केवल दो सीटों पर सिमट गई।
क्रास्टो ने भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए याद दिलाया कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस के लिए 'जीरो' लिखकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, लेकिन नागपुर के नतीजों के बाद उन्हें वह पोस्ट हटानी पड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी एमवीए दोनों अपने-अपने राजनीतिक आख्यान को मज़बूत करने की कोशिश में हैं।
नसीरुद्दीन शाह विवाद
राम कदम ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को लेकर भी विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे शाह की कलात्मक प्रतिभा का सम्मान करते हैं, लेकिन 2015 में एक पुस्तक विमोचन के दौरान पाकिस्तान की कथित प्रशंसा किए जाने का मुद्दा उन्होंने उठाया। कदम ने आरोप लगाया कि शाह मुगल आक्रांताओं का समर्थन करते हैं — हालाँकि यह उनका अपना आरोप है और नसीरुद्दीन शाह की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह एमएलसी चुनाव राजनीतिक दलों के लिए आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ज़मीनी हकीक़त परखने का अवसर भी माना जाता है। एमवीए के बेहतर प्रदर्शन के दावे और भाजपा के जवाबी तर्कों के बीच महाराष्ट्र में राजनीतिक तापमान बढ़ने के आसार हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से और बयानबाज़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।