सिल्वेस्टर स्टेलोन ने खोला राज़: 16 साल में 'स्नेक पिट' भेजे गए, किताब 'द स्टेप्स' का यह अध्याय लिखना था सबसे कठिन
सारांश
मुख्य बातें
हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सिल्वेस्टर स्टेलोन ने अपनी आगामी किताब 'द स्टेप्स' से जुड़ा एक दर्दनाक अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि महज़ 16 साल की उम्र में वे एक अत्यंत कठोर स्कूल में पढ़ते थे, जहाँ सज़ा के तौर पर छात्रों को 'स्नेक पिट' (सांपों का गड्ढा) नामक एक विशेष स्थान पर भेजा जाता था। स्टेलोन ने कहा कि उनके जीवन के इस अध्याय को कागज़ पर उतारना किताब लिखने की पूरी प्रक्रिया का सबसे कठिन हिस्सा रहा।
इंस्टाग्राम पर साझा किया दर्द
स्टेलोन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके इस अनुभव के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कैप्शन में लिखा, 'यह 'द स्टेप्स' के सबसे मुश्किल हिस्सों में से एक था, जिसे लिखना मेरे लिए कठिन रहा। मैं 16 साल का था और एक ऐसे स्कूल में पढ़ता था, जहाँ सज़ा के तौर पर हमें उस जगह भेजा जा सकता था, जिसे हम 'स्नेक पिट' कहते थे।' वीडियो में उन्होंने विस्तार से बताया कि वह स्कूल लगभग एक सुधार गृह जैसा था, जहाँ अनुशासन बेहद सख्त था।
क्या था 'स्नेक पिट'
स्टेलोन के अनुसार, जब किसी छात्र को सज़ा दी जाती थी, तो उसे एक खास इमारत में ले जाया जाता था जिसे 'स्नेक पिट' कहा जाता था। उन्होंने कहा, 'वहाँ आपको ऐसी चीज़ों का सामना करना पड़ता है, जिनसे आपका सामना शायद कभी नहीं होता। वे डरावनी चीज़ें होती हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें जीवन की हर चुनौती से लड़ने के लिए तैयार किया।
स्टेलोन ने कहा, 'मुझे लगा कि अगर मैं इस तरह की परिस्थितियों से जूझते हुए आगे बढ़ सकता हूँ और खुद को मज़बूत बना सकता हूँ, तो ज़िंदगी में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहूँगा।' यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब वे अपनी संस्मरण किताब के प्रचार में सक्रिय हैं।
संघर्षपूर्ण रहा करियर का शुरुआती दौर
हॉलीवुड में स्टेलोन का सफ़र आसान नहीं रहा। उन्होंने 1970 में फ़िल्म 'द पार्टी एट किटी एंड स्टड्स' से अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती वर्षों में 'डाउनहिल रेसर' और 'बनानाज़' जैसी फ़िल्मों में बिना श्रेय वाले छोटे किरदार निभाए। 1974 में 'द लॉर्ड्स ऑफ फ्लैटबुश' ने उन्हें पहचान दिलाई और 1976 में फ़िल्म 'रॉकी' ने उन्हें वैश्विक स्तर पर एक बड़े सितारे के रूप में स्थापित कर दिया। उल्लेखनीय है कि इस फ़िल्म की पटकथा भी स्वयं स्टेलोन ने लिखी थी।
एक्शन सिनेमा के अजेय सितारे
'रॉकी' की सफलता के बाद स्टेलोन ने 'फर्स्ट ब्लड' में पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रहे सैनिक जॉन रैम्बो का किरदार निभाया और पाँच 'रैम्बो' फ़िल्मों में यह भूमिका जीवंत की। 'कोबरा', 'टैंगो एंड कैश', 'क्लिफहैंगर', 'डिमोलिशन मैन' और 'द स्पेशलिस्ट' उनकी अन्य चर्चित फ़िल्में रहीं। उनके करियर के शीर्ष पर उनकी तुलना अक्सर अभिनेता अर्नोल्ड श्वार्जनेगर से की जाती थी और दोनों के बीच की प्रतिद्वंद्विता भी सुर्खियों में रही।
बाद के वर्षों में स्टेलोन 'द एक्सपेंडेबल्स' फ्रेंचाइज़ी में नज़र आए। 2015 में 'क्रीड' के ज़रिए उन्होंने एक बार फिर रॉकी बाल्बोआ के किरदार में वापसी की, जिसमें वे पूर्व प्रतिद्वंद्वी अपोलो क्रीड के बेटे एडोनिस क्रीड को प्रशिक्षण देते हैं। किताब 'द स्टेप्स' के ज़रिए स्टेलोन ने पहली बार अपने जीवन के इन अनछुए पहलुओं को सार्वजनिक करने का साहस दिखाया है।