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सुरेश रैना की फील्डिंग का राज़: कैफ की कड़ी ट्रेनिंग, जोंटी रोड्स की तारीफ और सिडनी का वो दर्दनाक टकराव

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सुरेश रैना की फील्डिंग का राज़: कैफ की कड़ी ट्रेनिंग, जोंटी रोड्स की तारीफ और सिडनी का वो दर्दनाक टकराव

सारांश

सुरेश रैना ने खुलासा किया — कैफ भाई का वो सख्त नियम कि 'स्टंप पर थ्रो नहीं तो प्लेइंग इलेवन नहीं', जोंटी रोड्स जैसे आदर्श और सिडनी में इरफान पठान की टूटी पसली वाला दर्दनाक सबक। यही तीन चीजें थीं जिन्होंने एक साधारण खिलाड़ी को भारत का भरोसेमंद फील्डर बनाया।

मुख्य बातें

सुरेश रैना ने बताया कि उनके दौर में भारतीय टीम के खिलाड़ी अभ्यास से आधा घंटा पहले मैदान पर पहुंचते थे और ट्रेनिंग की शुरुआत हमेशा फील्डिंग से होती थी।
मोहम्मद कैफ का नियम था — सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं मारा तो प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी।
रैना के फील्डिंग आदर्शों में जोंटी रोड्स , मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह शामिल रहे।
सिडनी वनडे में इरफान पठान से टकराव के बाद उनकी पसली में फ्रैक्चर हो गया था; इस घटना ने रैना को फील्डरों के बीच स्पष्ट संवाद की अहमियत सिखाई।
रैना के अनुसार हाई कैच, ग्राउंड फील्डिंग, स्लिप कैच और पैरेलल कैच के अलग-अलग अभ्यास सत्रों ने भारत को विश्व की बेहतरीन फील्डिंग इकाइयों में शामिल किया।

पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने हाल ही में खुलासा किया कि अनुशासन, सीनियर खिलाड़ियों की सीख और मैदान पर हुए कड़वे अनुभवों ने उन्हें भारत के सबसे विश्वसनीय फील्डरों में से एक बनाया। रैना ने बताया कि उत्तर प्रदेश के शुरुआती प्रशिक्षण सत्रों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मैदान तक, फील्डिंग को लेकर उनकी सोच और तैयारी लगातार निखरती रही।

फील्डिंग की संस्कृति: आधा घंटा पहले मैदान पर

रैना ने जियोस्टार को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि उनके दौर में भारतीय टीम ने फील्डिंग को लेकर एक अलग ही संस्कृति विकसित की थी। उन्होंने कहा, 'हमने फील्डिंग की एक संस्कृति बनाई थी। सभी खिलाड़ी आधा घंटा पहले मैदान पर पहुंच जाते थे क्योंकि हमारी ट्रेनिंग की शुरुआत हमेशा फील्डिंग से होती थी। आज की तरह नहीं कि कुछ कैच पकड़ लिए और फील्डिंग सत्र खत्म हो गया। उस समय हम अलग-अलग हाई कैच, ग्राउंड फील्डिंग, स्लिप कैच और पैरेलल कैच का अभ्यास करते थे।'

रैना ने बताया कि मोहम्मद कैफ, जो उत्तर प्रदेश के कप्तान थे, बेहद सख्त मानक रखते थे। कैफ का स्पष्ट निर्देश था — 'अगर सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं मारोगे, तो प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी।' बीच में एक स्टंप लगाकर थ्रो की सटीकता परखी जाती थी। इन्हीं कठिन अभ्यास सत्रों ने रैना की फील्डिंग को मजबूत आधार दिया।

आदर्श खिलाड़ी: जोंटी रोड्स से तारीफ, युवराज से प्रेरणा

रैना ने स्वीकार किया कि दक्षिण अफ्रीका के महान फील्डर जोंटी रोड्स से प्रशंसा पाना हमेशा विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा, 'जोंटी रोड्स जैसे महान फील्डर से तारीफ मिलना हमेशा खास होता है। वह हमेशा हमारे आदर्श रहे हैं।'

रैना ने बताया कि घरेलू क्रिकेट में मोहम्मद कैफ और राष्ट्रीय टीम में युवराज सिंह उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने कहा, 'युवराज सिंह पॉइंट और कवर पर फील्डिंग करते थे, जबकि मैं मिड-ऑफ पर रहता था। हमने भारत के लिए जितने भी मैच साथ खेले, कोशिश यही रहती थी कि गेंद हमारे बीच से न निकल पाए।'

सिडनी का वो यादगार और दर्दनाक टकराव

रैना ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान सिडनी में खेले गए एक वनडे मैच की रोमांचक घटना साझा की। उन्होंने बताया, 'जडेजा गेंदबाजी कर रहे थे और डेविड वॉर्नर ने स्वीप शॉट खेला, जिसमें टॉप एज लग गया। मैं मिडविकेट पर था और इरफान भाई फाइन लेग से दौड़ रहे थे। मैं सिर्फ गेंद को देख रहा था — मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि इरफान भाई कहां हैं। मुझे सिर्फ गेंद, फ्लडलाइट्स, दर्शक और पीछे लहराता तिरंगा दिखाई दे रहा था।'

रैना ने आगे बताया, 'जैसे ही मैंने कैच पूरा किया, मेरी टक्कर इरफान भाई से हो गई। एक पल के लिए मुझे लगा कि अगर मेरा सिर उनके शरीर से टकरा जाता, तो या तो उन्हें गंभीर चोट लगती या मुझे। शुक्र है कि सिर्फ मेरा कंधा उनसे टकराया और मैं कैच पकड़ने में सफल रहा। लेकिन इरफान पठान की पसली में फ्रैक्चर हो गया था।'

मैदान पर संवाद की अहमियत: बड़ी सीख

इस घटना ने रैना को एक महत्वपूर्ण सबक दिया — फील्डरों के बीच स्पष्ट और जोरदार संवाद कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिसका कैच हो, उसे जोर से आवाज लगाकर बाकी फील्डरों को सतर्क करना चाहिए। यह सीख उन्होंने अपने पूरे करियर में अपनाई।

रैना ने कहा कि शुरुआती वर्षों की कड़ी ट्रेनिंग, अनुभवी साथियों से मिली प्रेरणा और मैदान पर हुए ऐसे अनुभवों ने मिलकर उन्हें एक ऐसा फील्डर बनाया जिसकी फुर्ती, पूर्वानुमान क्षमता और समर्पण की लंबे समय तक सराहना होती रही। उनकी यह यात्रा आज की युवा पीढ़ी के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब कैफ के 'स्टंप पर थ्रो या प्लेइंग इलेवन से बाहर' वाले मानक की याद दिलाना एक जरूरी संदेश है। सिडनी की घटना यह भी रेखांकित करती है कि मैदान पर संवाद की कमी किस तरह शारीरिक चोट में बदल सकती है — यह सबक आज के युवा क्रिकेटरों के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना तब था।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरेश रैना को किसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया फील्डिंग में?
सुरेश रैना ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मोहम्मद कैफ और भारतीय टीम में युवराज सिंह उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण अफ्रीका के जोंटी रोड्स उनके आदर्श फील्डर थे।
सिडनी वनडे में इरफान पठान को क्या चोट लगी थी?
सिडनी वनडे में सुरेश रैना और इरफान पठान के बीच कैच लेते समय टकराव हो गया, जिसमें इरफान पठान की पसली में फ्रैक्चर हो गया था। रैना ने बताया कि शुक्र से उनका कंधा टकराया, सिर नहीं — वरना चोट और गंभीर हो सकती थी।
मोहम्मद कैफ की फील्डिंग ट्रेनिंग कितनी कड़ी थी?
मोहम्मद कैफ उत्तर प्रदेश के कप्तान के रूप में बेहद सख्त मानक रखते थे। उनका नियम था कि अगर कोई खिलाड़ी सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं मार सकता, तो उसे प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी। बीच में स्टंप लगाकर थ्रो की सटीकता परखी जाती थी।
भारतीय टीम की फील्डिंग संस्कृति रैना के दौर में कैसी थी?
रैना के अनुसार उस दौर में सभी खिलाड़ी अभ्यास से आधा घंटा पहले मैदान पर पहुंचते थे और ट्रेनिंग की शुरुआत हमेशा फील्डिंग से होती थी। हाई कैच, ग्राउंड फील्डिंग, स्लिप कैच और पैरेलल कैच — सभी का अलग-अलग अभ्यास होता था।
सिडनी टकराव से रैना ने क्या सीखा?
इस घटना से रैना ने सीखा कि मैदान पर फील्डरों के बीच स्पष्ट और जोरदार संवाद बेहद जरूरी है। जिस फील्डर का कैच हो, उसे जोर से आवाज लगाकर बाकी खिलाड़ियों को सतर्क करना चाहिए ताकि इस तरह के टकराव से बचा जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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