सुरेश रैना की फील्डिंग का राज़: कैफ की कड़ी ट्रेनिंग, जोंटी रोड्स की तारीफ और सिडनी का वो दर्दनाक टकराव
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने हाल ही में खुलासा किया कि अनुशासन, सीनियर खिलाड़ियों की सीख और मैदान पर हुए कड़वे अनुभवों ने उन्हें भारत के सबसे विश्वसनीय फील्डरों में से एक बनाया। रैना ने बताया कि उत्तर प्रदेश के शुरुआती प्रशिक्षण सत्रों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मैदान तक, फील्डिंग को लेकर उनकी सोच और तैयारी लगातार निखरती रही।
फील्डिंग की संस्कृति: आधा घंटा पहले मैदान पर
रैना ने जियोस्टार को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि उनके दौर में भारतीय टीम ने फील्डिंग को लेकर एक अलग ही संस्कृति विकसित की थी। उन्होंने कहा, 'हमने फील्डिंग की एक संस्कृति बनाई थी। सभी खिलाड़ी आधा घंटा पहले मैदान पर पहुंच जाते थे क्योंकि हमारी ट्रेनिंग की शुरुआत हमेशा फील्डिंग से होती थी। आज की तरह नहीं कि कुछ कैच पकड़ लिए और फील्डिंग सत्र खत्म हो गया। उस समय हम अलग-अलग हाई कैच, ग्राउंड फील्डिंग, स्लिप कैच और पैरेलल कैच का अभ्यास करते थे।'
रैना ने बताया कि मोहम्मद कैफ, जो उत्तर प्रदेश के कप्तान थे, बेहद सख्त मानक रखते थे। कैफ का स्पष्ट निर्देश था — 'अगर सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं मारोगे, तो प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी।' बीच में एक स्टंप लगाकर थ्रो की सटीकता परखी जाती थी। इन्हीं कठिन अभ्यास सत्रों ने रैना की फील्डिंग को मजबूत आधार दिया।
आदर्श खिलाड़ी: जोंटी रोड्स से तारीफ, युवराज से प्रेरणा
रैना ने स्वीकार किया कि दक्षिण अफ्रीका के महान फील्डर जोंटी रोड्स से प्रशंसा पाना हमेशा विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा, 'जोंटी रोड्स जैसे महान फील्डर से तारीफ मिलना हमेशा खास होता है। वह हमेशा हमारे आदर्श रहे हैं।'
रैना ने बताया कि घरेलू क्रिकेट में मोहम्मद कैफ और राष्ट्रीय टीम में युवराज सिंह उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने कहा, 'युवराज सिंह पॉइंट और कवर पर फील्डिंग करते थे, जबकि मैं मिड-ऑफ पर रहता था। हमने भारत के लिए जितने भी मैच साथ खेले, कोशिश यही रहती थी कि गेंद हमारे बीच से न निकल पाए।'
सिडनी का वो यादगार और दर्दनाक टकराव
रैना ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान सिडनी में खेले गए एक वनडे मैच की रोमांचक घटना साझा की। उन्होंने बताया, 'जडेजा गेंदबाजी कर रहे थे और डेविड वॉर्नर ने स्वीप शॉट खेला, जिसमें टॉप एज लग गया। मैं मिडविकेट पर था और इरफान भाई फाइन लेग से दौड़ रहे थे। मैं सिर्फ गेंद को देख रहा था — मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि इरफान भाई कहां हैं। मुझे सिर्फ गेंद, फ्लडलाइट्स, दर्शक और पीछे लहराता तिरंगा दिखाई दे रहा था।'
रैना ने आगे बताया, 'जैसे ही मैंने कैच पूरा किया, मेरी टक्कर इरफान भाई से हो गई। एक पल के लिए मुझे लगा कि अगर मेरा सिर उनके शरीर से टकरा जाता, तो या तो उन्हें गंभीर चोट लगती या मुझे। शुक्र है कि सिर्फ मेरा कंधा उनसे टकराया और मैं कैच पकड़ने में सफल रहा। लेकिन इरफान पठान की पसली में फ्रैक्चर हो गया था।'
मैदान पर संवाद की अहमियत: बड़ी सीख
इस घटना ने रैना को एक महत्वपूर्ण सबक दिया — फील्डरों के बीच स्पष्ट और जोरदार संवाद कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिसका कैच हो, उसे जोर से आवाज लगाकर बाकी फील्डरों को सतर्क करना चाहिए। यह सीख उन्होंने अपने पूरे करियर में अपनाई।
रैना ने कहा कि शुरुआती वर्षों की कड़ी ट्रेनिंग, अनुभवी साथियों से मिली प्रेरणा और मैदान पर हुए ऐसे अनुभवों ने मिलकर उन्हें एक ऐसा फील्डर बनाया जिसकी फुर्ती, पूर्वानुमान क्षमता और समर्पण की लंबे समय तक सराहना होती रही। उनकी यह यात्रा आज की युवा पीढ़ी के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनी हुई है।